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आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति ने राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन
Updated Sun, 10 Dec 2017 11:42 PM IST
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सहारनपुर। विभिन्न मांगों को लेकर आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति ने रविवार को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर एक दिवसीय धरना देकर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम 15 सूत्रीय ज्ञापन तहसीलदार सदर सुधीर कुमार को सौंपा। उन्होंने कहा कि आजादी के 70 वर्ष बाद भी देश के वंचित समाजों को यथास्थितिवादी ताकतों ने उनके अधिकारों पर कब्जा कर रखा है।
रविवार को हकीकत नगर धरनास्थल पर आयोजित धरने पर समिति के जिलाध्यक्ष साधूराम ने कहा कि 10 दिसंबर 1948 को संयुक्त राष्ट्र ने यूनिवर्सल डिक्लेरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स की घोषणा की थी। इसके समता, स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति और बिना किसी भेदभाव के सम्मानपूर्वक जीने के अधिकार को भारतीय संविधान में शामिल किया गया है। लेकिन आजादी के 70 वर्ष बाद भी देश के वंचित, अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछडे़ और अल्पसंख्यक समाज को उनके अधिकारों से वंचित कर रखा है। महासचिव रणधीर सिंह आदि ने भी विचार रखे। ज्ञापन में उन्होंने 27 अप्रैल 2012 और इससे पूर्व 2006 में एम नागराज मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुक्रम में एक कमेटी का गठन करने और एससी, एसटी वर्ग को पदोन्नति में आरक्षण देने की मांग की। निजी क्षेत्र, पीपीए, संविदा भर्ती में एससी, एसटी, ओबीसी को समानुपातिक आरक्षण दिया जाए। राज्य के समस्त विभागों और उपक्रमों में खाली पडे आरक्षित पदों को भरने के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाया जाए। शिक्षा के बाजारीकरण और निजीकरण को बंद कर सभी को एक समान शिक्षा उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने मेडिकल कालेजों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में पिछडे़ वर्ग के दाखिलों और भर्तियों में 50 प्रतिशत का कोटा पूरा करने सहित अन्य मांग की। कस्तूरी गौतम, मतलूब हसन, सुलेखचंद, इसम सिंह, सुमित कुमार, अनुज कुमार, देवकुमार, प्रवेश कुमार, कपिल गौतम, अंकित गौतम, प्रदीप कुमार, मीनू, पूनम, रेखा, अनीता बौद्घ आदि रहे।
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रविवार को हकीकत नगर धरनास्थल पर आयोजित धरने पर समिति के जिलाध्यक्ष साधूराम ने कहा कि 10 दिसंबर 1948 को संयुक्त राष्ट्र ने यूनिवर्सल डिक्लेरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स की घोषणा की थी। इसके समता, स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति और बिना किसी भेदभाव के सम्मानपूर्वक जीने के अधिकार को भारतीय संविधान में शामिल किया गया है। लेकिन आजादी के 70 वर्ष बाद भी देश के वंचित, अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछडे़ और अल्पसंख्यक समाज को उनके अधिकारों से वंचित कर रखा है। महासचिव रणधीर सिंह आदि ने भी विचार रखे। ज्ञापन में उन्होंने 27 अप्रैल 2012 और इससे पूर्व 2006 में एम नागराज मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुक्रम में एक कमेटी का गठन करने और एससी, एसटी वर्ग को पदोन्नति में आरक्षण देने की मांग की। निजी क्षेत्र, पीपीए, संविदा भर्ती में एससी, एसटी, ओबीसी को समानुपातिक आरक्षण दिया जाए। राज्य के समस्त विभागों और उपक्रमों में खाली पडे आरक्षित पदों को भरने के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाया जाए। शिक्षा के बाजारीकरण और निजीकरण को बंद कर सभी को एक समान शिक्षा उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने मेडिकल कालेजों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में पिछडे़ वर्ग के दाखिलों और भर्तियों में 50 प्रतिशत का कोटा पूरा करने सहित अन्य मांग की। कस्तूरी गौतम, मतलूब हसन, सुलेखचंद, इसम सिंह, सुमित कुमार, अनुज कुमार, देवकुमार, प्रवेश कुमार, कपिल गौतम, अंकित गौतम, प्रदीप कुमार, मीनू, पूनम, रेखा, अनीता बौद्घ आदि रहे।
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