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नदी में बहा घोड़ा बग्गी चालक, सकुशल निकाला
Updated Wed, 15 Aug 2018 12:32 AM IST
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नदी में बहा घोड़ा बग्गी चालक, सकुशल निकाला
बेहट/शाकंभरी (सहारनपुर)। जाको राखे साइयां मार सके ना कोय वाली कहावत उस समय चरितार्थ हो गई, जब गांव समसपुर नौगांवा निवासी एक घोड़ा बोगी चालक नदी में बहने पर गांव वालों के रेस्क्यू के दो घंटे बाद जिंदा निकाल लिया गया।
बता दें कि 12 अगस्त को गांव समसपुर नौगांवा निवासी बुरहान (40) पुत्र हकीम मिर्जापुर मंडी में अमरूद बेचने गया था। उधर से आते समय रात्रि में 7:30 बजे के लगभग जैसे ही मिर्जापुर सुंदरपुर हाईवे स्थित शाहपुर गाड़ा के रपटे पर पहुंचकर पार करने लगा तो नदी के पानी का बहाव तेज हो गया और बुरहान घोड़ा बोगी सहित बह गया। गांव के लोगों ने उसके परिजनों को सूचना दी। सूचना पर गांववालों का हुजूम उसको बचाने के लिए शाहपुर गाड़ा जा पहुंचा। तेज बारिश में भी उसके भाई बुल्ला और अन्य ग्रामीण जाटोवाला के स्पोर्ट्स कॉलेज के पास जा पहुंचे । उसके भाई ने टॉर्च की लाइट नदी के दूसरी तरफ की तो उधर से आवाज आई। इसके बाद ग्रामीणों ने रस्से डालकर खुद ही रेस्क्यू करना शुरू किया और कुछ लोगों ने रस्से को पकड़ा और 10 लड़के नदी में उतर गए।
ग्रामीणों के मुताबिक दो लड़के भी बहने वाले थे, उनको भी बमुश्किल बचाते हुए रेस्क्यू जारी रखा और बुरहान को सकुशल निकाल लिया। बुरहान के मुताबिक डूबने के बाद उसने खुदा का नाम लेना शुरू किया। उसने बताया कि किसी बाहरी शक्ति ने उसको उठाकर एक टापू पर रख दिया वह बेहोश हो गया। जब गांववालों ने आवाज लगाई तब उसको होश आया था।बुरहान के डूबने के बाद सकुशल बचने से हर कोई स्तब्ध है। लगभग 18 वर्ष पूर्व भी बुरहान मजदूरी करने के दौरान एक कच्ची मिट्टी की दीवार गिरने के बाद उसके नीचे से सकुशल निकल आया था।
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बेहट/शाकंभरी (सहारनपुर)। जाको राखे साइयां मार सके ना कोय वाली कहावत उस समय चरितार्थ हो गई, जब गांव समसपुर नौगांवा निवासी एक घोड़ा बोगी चालक नदी में बहने पर गांव वालों के रेस्क्यू के दो घंटे बाद जिंदा निकाल लिया गया।
बता दें कि 12 अगस्त को गांव समसपुर नौगांवा निवासी बुरहान (40) पुत्र हकीम मिर्जापुर मंडी में अमरूद बेचने गया था। उधर से आते समय रात्रि में 7:30 बजे के लगभग जैसे ही मिर्जापुर सुंदरपुर हाईवे स्थित शाहपुर गाड़ा के रपटे पर पहुंचकर पार करने लगा तो नदी के पानी का बहाव तेज हो गया और बुरहान घोड़ा बोगी सहित बह गया। गांव के लोगों ने उसके परिजनों को सूचना दी। सूचना पर गांववालों का हुजूम उसको बचाने के लिए शाहपुर गाड़ा जा पहुंचा। तेज बारिश में भी उसके भाई बुल्ला और अन्य ग्रामीण जाटोवाला के स्पोर्ट्स कॉलेज के पास जा पहुंचे । उसके भाई ने टॉर्च की लाइट नदी के दूसरी तरफ की तो उधर से आवाज आई। इसके बाद ग्रामीणों ने रस्से डालकर खुद ही रेस्क्यू करना शुरू किया और कुछ लोगों ने रस्से को पकड़ा और 10 लड़के नदी में उतर गए।
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ग्रामीणों के मुताबिक दो लड़के भी बहने वाले थे, उनको भी बमुश्किल बचाते हुए रेस्क्यू जारी रखा और बुरहान को सकुशल निकाल लिया। बुरहान के मुताबिक डूबने के बाद उसने खुदा का नाम लेना शुरू किया। उसने बताया कि किसी बाहरी शक्ति ने उसको उठाकर एक टापू पर रख दिया वह बेहोश हो गया। जब गांववालों ने आवाज लगाई तब उसको होश आया था।बुरहान के डूबने के बाद सकुशल बचने से हर कोई स्तब्ध है। लगभग 18 वर्ष पूर्व भी बुरहान मजदूरी करने के दौरान एक कच्ची मिट्टी की दीवार गिरने के बाद उसके नीचे से सकुशल निकल आया था।
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