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बासमती धान की पाटा पद्धति से होता है अधिक फुटाव
Updated Sun, 01 Jul 2018 11:40 PM IST
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सहारनपुर। बासमती धान की खेती करने वाले किसानों के लिए यह अच्छी खबर है। बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान द्वारा विकसित की गई पाटा तकनीक के प्रयोग से धान में अधिक फुटाव होता है। जिसके चलते बासमती धान के उत्पादन में खासी बढ़ोत्तरी होती है।
जनपद को बासमती धान की खेती के लिए देश भर में जाना जाता है। यहां के किसान बडे़ रकबे में बासमती धान की खेती करते हैं। अधिकतर किसान धान में अच्छे फुटाव के लिए रसायनों का इस्तेमाल करते हैं। जिससे न सिर्फ खेती की उत्पादन लागत में बढ़ोत्तरी होती है, बल्कि रसायनों का अधिक प्रयोग मानव स्वास्थ्य पर पर भी विपरीत असर डालता है। इसको देखते हुए बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान से पाटा तकनीक को विकसित किया है। इस तकनीक में धान लगाने के 15 से 25 दिनों के मध्य एक हल्का पाटा, जिसका वजन 12 से 18 किलो तक हो, को खेत में पानी भरकर एक से दो बार तक रस्सी की सहायता से दो व्यक्तियों द्वारा चलाया जा सकता है। इससे पौधों जड़ों से कल्ले अधिक निकलते हैं। इसके चलते उत्पादन में भी बढ़ोत्तरी होती है।
पाटा तकनीक के फायदे
- धान में फुटाव अधिक
- भूमि में वायु संचार अधिक
- भूमि में दरार नहीं पड़ती
- पानी की काफी बचत
- सभी पौधों की समान बढ़वार
- प्रारंभिक अवस्था में पत्ती लपेटक कीट से बचाव
- पाटा तकनीक बासमती धान के लिए वरदान साबित हो रही है। इससे न सिर्फ धान में कल्ले अधिक निकलते हैं, बल्कि उत्पादन भी ज्यादा होता है। बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान से इस तकनीक को विकसित किया है।
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- डॉ. महावीर सिंह, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र।
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जनपद को बासमती धान की खेती के लिए देश भर में जाना जाता है। यहां के किसान बडे़ रकबे में बासमती धान की खेती करते हैं। अधिकतर किसान धान में अच्छे फुटाव के लिए रसायनों का इस्तेमाल करते हैं। जिससे न सिर्फ खेती की उत्पादन लागत में बढ़ोत्तरी होती है, बल्कि रसायनों का अधिक प्रयोग मानव स्वास्थ्य पर पर भी विपरीत असर डालता है। इसको देखते हुए बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान से पाटा तकनीक को विकसित किया है। इस तकनीक में धान लगाने के 15 से 25 दिनों के मध्य एक हल्का पाटा, जिसका वजन 12 से 18 किलो तक हो, को खेत में पानी भरकर एक से दो बार तक रस्सी की सहायता से दो व्यक्तियों द्वारा चलाया जा सकता है। इससे पौधों जड़ों से कल्ले अधिक निकलते हैं। इसके चलते उत्पादन में भी बढ़ोत्तरी होती है।
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पाटा तकनीक के फायदे
- धान में फुटाव अधिक
- भूमि में वायु संचार अधिक
- भूमि में दरार नहीं पड़ती
- पानी की काफी बचत
- सभी पौधों की समान बढ़वार
- प्रारंभिक अवस्था में पत्ती लपेटक कीट से बचाव
- पाटा तकनीक बासमती धान के लिए वरदान साबित हो रही है। इससे न सिर्फ धान में कल्ले अधिक निकलते हैं, बल्कि उत्पादन भी ज्यादा होता है। बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान से इस तकनीक को विकसित किया है।
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- डॉ. महावीर सिंह, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र।