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चारागाह की भूमि मुक्त कराने के निर्देश
Updated Fri, 25 Aug 2017 01:19 AM IST
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सहारनपुर। सरकारी और ग्राम समाज की भूमि को कब्जा मुक्त कराने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। अपर जिलाधिकारी एसके दूबे ने बृहस्पतिवार को बिड़वी शुगर मिल के कब्जे वाली चारागाह की भूमि को चिह्नित करने के निर्देश एसडीएम नकुड को दिए हैं। क्षेत्र के किसानों का दावा है कि यह जमीन करीब 250 बीघा है।
बिड़वी शुगर मिल को चलवाने और उसके कब्जे में चारागाह की भूमि को मुक्त कराने की लड़ाई लड़ रहे किसान हित एवं गो सेवा समिति से जुडे़ किसानों का संघर्ष अब रंग लाता दिखाई दे रहा है। अपर जिलाधिकारी प्रशासन ने एसडीएम नकुड़ को दूरभाष पर ग्राम बिड़वी स्थित चारागाह की भूमि को चिह्नित करने के निर्देश दिए हैं। बता दें कि मिल को चलवाने और उनसे कब्जे वाली चारागाह की भूमि को मुक्त कराने के लिए पिछले कई वर्षों से किसान हित एवं गो सेवा समिति से जुडे़ किसान संघर्ष कर रहे हैं। समिति से जुडे़ किसान नेता बिट्टू नंबरदार का आरोप है कि मिल के कब्जे में करीब 250 बीघा भूमि गो चारागाह की है। ग्राम समाज की यह भूमि फेडरेशन द्वारा लगाई गई बिड़वी शुगर मिल को वर्ष 1989 में जनहित के नाम पर दे दी गई थी। लेकिन इस मिल को वर्ष 2009-10 में निजी क्षेत्र को कौड़ियों के भाव दे दिया गया था। इसके बाद सिर्फ तीन सीजन ही मिल को चलाया गया है। किसान नेता का कहना है कि जब मिल का संचालन नहीं हो रहा है, ऐसे में ग्राम समाज की चारागाह की भूमि उसे वापस मिलनी चाहिए।
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बिड़वी शुगर मिल को चलवाने और उसके कब्जे में चारागाह की भूमि को मुक्त कराने की लड़ाई लड़ रहे किसान हित एवं गो सेवा समिति से जुडे़ किसानों का संघर्ष अब रंग लाता दिखाई दे रहा है। अपर जिलाधिकारी प्रशासन ने एसडीएम नकुड़ को दूरभाष पर ग्राम बिड़वी स्थित चारागाह की भूमि को चिह्नित करने के निर्देश दिए हैं। बता दें कि मिल को चलवाने और उनसे कब्जे वाली चारागाह की भूमि को मुक्त कराने के लिए पिछले कई वर्षों से किसान हित एवं गो सेवा समिति से जुडे़ किसान संघर्ष कर रहे हैं। समिति से जुडे़ किसान नेता बिट्टू नंबरदार का आरोप है कि मिल के कब्जे में करीब 250 बीघा भूमि गो चारागाह की है। ग्राम समाज की यह भूमि फेडरेशन द्वारा लगाई गई बिड़वी शुगर मिल को वर्ष 1989 में जनहित के नाम पर दे दी गई थी। लेकिन इस मिल को वर्ष 2009-10 में निजी क्षेत्र को कौड़ियों के भाव दे दिया गया था। इसके बाद सिर्फ तीन सीजन ही मिल को चलाया गया है। किसान नेता का कहना है कि जब मिल का संचालन नहीं हो रहा है, ऐसे में ग्राम समाज की चारागाह की भूमि उसे वापस मिलनी चाहिए।
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