Azam Khan Case: क्या कहा था आजम खां ने जो कोर्ट ने सुनाई इतनी सख्त सजा, अभी दर्ज हैं 90 केस, पहली में मिली सजा
जिस मुकदमे में कोर्ट ने गुरुवार को आजम खां को सजा सुनाई है वह भी 2019 में दर्ज हुआ था। हालांकि इस कोर्ट से आजम खां को अंतरिम जमानत मिल गई है, लेकिन इससे उनकी परेशानियां कम नहीं होंगी।
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सपा नेता आजम खां पर 90 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। कोर्ट से कुर्की का वारंट होने के बाद आजम खां ने अपनी पत्नी डॉ. तजीन फात्मा और बेटे अब्दुल्ला आजम के साथ 26 फरवरी 2020 को रामपुर की कोर्ट में आत्मसर्मपण कर दिया था। इसके बाद तीनों को सीतापुर की जेल भेज दिया गया था। कोर्ट से जमानत मिलने के बाद पहले डॉ. तजीन फात्मा और बाद में अब्दुल्ला आजम जेल से बाहर आ गए थे। आजम खां 27 महीने तक जेल में रहने के बाद इसी साल मई महीने में जेल से बाहर आए हैं।
आजम खां के खिलाफ रामपुर और मुरादाबाद सहित प्रदेश के अन्य कई शहरों में मुकदमे दर्ज हैं। उनके खिलाफ सबसे अधिक मुकदमे 2019 में दर्ज हुए थे। 2019 में आजम खां के खिलाफ आलियागंज के किसानों की जमीन कब्जाने के आरोप में 26, यतीमखाना प्रकरण में 12, डूंगरपुर प्रकरण में 12 और आचार संहिता उल्लंघन सहित अन्य कई मामलों में मुकदमे दर्ज हुए थे। अधिकांश मुकदमे ट्रायल पर चल रहे हैं। यह पहला मुकदमा है जिसमें आजम खां को सजा मिली है। जिस मुकदमे में कोर्ट ने बृहस्पतिवार को आजम खां को सजा सुनाई है वह भी 2019 में दर्ज हुआ था। हालांकि इस कोर्ट से आजम खां को अंतरिम जमानत मिल गई है, लेकिन इससे उनकी परेशानियां कम नहीं होंगी।
क्या कहा था आजम खां ने
आजम खां ने 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान मिलक के खाता नगरिया गांव में एक जनसभा को संबोधित किया था। जनसभा में उन्होंने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, तत्कालीन जिलाधिकारी, जिला प्रशासन और अन्य अधिकारियों के खिलाफ टिप्पणी की थी।
32 पेज में हैं कोर्ट का फैसला
भड़काऊ भाषण देने के मामले में विशेष न्यायाधीश एमपी-एमएलए (मजिस्ट्रेट ट्रायल) कोर्ट ने आजम खां के खिलाफ 32 पन्नों में अपना फैसला सुनाया है। जिसमें अभियोजन पक्ष से लेकर बचाव पक्ष और विवादित भाषण की सीडी तक का जिक्र है। अभियोजन की ओर से मौखिक साक्ष्य के रूप में कराई गई गवाही का उल्लेख, दस्तावेजी साक्ष्य रूप में भाषण की सीडी, सीडी का प्रमाणपत्र, नक्शा नजरी, अभियोजन स्वीकृति, आरोप पत्र, चिक एफआईआर, मुकदमा कायम जीडी का उल्लेख किया गया है। आजम खां की ओर से दर्ज कराए गए उनके बयान, उनकी ओर से पेश किए गए गवाहों का विवरण, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की नजीरों का भी उल्लेख किया गया है।
सरकार की मजबूत पैरवी से आजम खां मिली सजा
सरकार की ओर से पैरवी के लिए अभियोजन की टीम उतारी गई थी। जिसमें अभियोजन की ओर से प्रभारी संयुक्त निदेशक अभियोजन संतोष कुमार सिंह, एसपीओ राकेश कुमार मौर्या, पीओ अमरनाथ तिवारी, एपीओ नीरज कुमार, एपीओ ह्दयेश कुमार और एपीओ केके तिवारी की ओर से पैरवी की गई। उनकी मजबूत पैरवी से अभियोजन को सफलता मिली है।
मुकदमे में कब क्या हुआ
-07 अप्रैल 2019 को आजम खां ने मिलक के खाता नगरिया में जनसभा को किया था संबोधित ।
-09 अप्रैल 2019 को मिलक कोतवाली में दर्ज हुआ आजम खां के खिलाफ मुकदमा।
-17 मार्च 2020 पुलिस ने मुकदमे की विवेचना के बाद कोर्ट में दाखिल किया आरोप पत्र।
-17 मार्च 2020 को कोर्ट ने लिया मामले में संज्ञान।
-12 नवंबर 2021 को कोर्ट ने आजम खां पर किया आरोप तय।
-01 अक्तूबर 2022 को आजम खां ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से दर्ज कराए थे अपने बयान।
15 अक्तूबर 2022 को अभियोजन की बहस पूरी।
21 अक्तूबर 2022 को बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष की बहस पूरी।
27 अक्तूबर 2022 को कोर्ट ने आजम खां को तीन माह की कैद और छह हजार रुपये जुर्माने की सुनाई सजा।