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Rampur News: धर्म परिवर्तन मामले में आरोपी महिला की गिरफ्तारी पर 29 अक्तूबर तक रोक
Thu, 27 Aug 2026 12:28 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
Updated Thu, 27 Aug 2026 12:28 AM IST
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रामपुर। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धर्म परिवर्तन मामले में पटवाई थाने में दर्ज एफआईआर के मामले में आरोपी महिला को राहत देते हुए 29 अक्तूबर तक उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने मामले को विचारणीय मानते हुए राज्य सरकार और शिकायतकर्ता पक्ष को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है।
पटवाई थाने में 29 मई को निस्बी निवासी शेर सिंह की ओर से कुछ लोगों पर धर्म परिवर्तन कराने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया गया था। इस मामले में गांव निवासी सुनीता के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया था। आरोपी महिला की ओर से हाईकोर्ट में अपने अधिवक्ता के माध्यम से याचिका दाखिल की गई थी।
हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति राजीव गुप्ता और देवेंद्र सिंह प्रथम की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता राजेश कुमार मिश्रा तथा राज्य की ओर से एजीए और अधिवक्ता अनुराग पटेल व विवेक कुमार मिश्रा उपस्थित हुए।
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याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि वह पूरी तरह निर्दोष हैं और उन्हें दुर्भावनापूर्ण इरादे से मामले में झूठा फंसाया गया है। यह भी कहा गया कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं।
अधिवक्ता ने एफआईआर निरस्त किए जाने की मांग की। सुनवाई के बाद कोर्ट ने मामले को विचारणीय माना। पक्षकारों की ओर से जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए समय मांगा गया, जिस पर अदालत ने चार सप्ताह का समय प्रदान किया। राज्य की ओर से एजीए को भी इसी अवधि में जवाब दाखिल करने की अनुमति दी गई है। जवाबी हलफनामे के बाद प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है।
हाईकोर्ट ने मामले को 29 अक्तूबर को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया। साथ ही स्पष्ट किया कि तब तक 29 मई को पटवाई थाने में दर्ज मामले के संबंध में याचिकाकर्ता को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।
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पटवाई थाने में 29 मई को निस्बी निवासी शेर सिंह की ओर से कुछ लोगों पर धर्म परिवर्तन कराने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया गया था। इस मामले में गांव निवासी सुनीता के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया था। आरोपी महिला की ओर से हाईकोर्ट में अपने अधिवक्ता के माध्यम से याचिका दाखिल की गई थी।
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हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति राजीव गुप्ता और देवेंद्र सिंह प्रथम की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता राजेश कुमार मिश्रा तथा राज्य की ओर से एजीए और अधिवक्ता अनुराग पटेल व विवेक कुमार मिश्रा उपस्थित हुए।
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याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि वह पूरी तरह निर्दोष हैं और उन्हें दुर्भावनापूर्ण इरादे से मामले में झूठा फंसाया गया है। यह भी कहा गया कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं।
अधिवक्ता ने एफआईआर निरस्त किए जाने की मांग की। सुनवाई के बाद कोर्ट ने मामले को विचारणीय माना। पक्षकारों की ओर से जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए समय मांगा गया, जिस पर अदालत ने चार सप्ताह का समय प्रदान किया। राज्य की ओर से एजीए को भी इसी अवधि में जवाब दाखिल करने की अनुमति दी गई है। जवाबी हलफनामे के बाद प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है।
हाईकोर्ट ने मामले को 29 अक्तूबर को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया। साथ ही स्पष्ट किया कि तब तक 29 मई को पटवाई थाने में दर्ज मामले के संबंध में याचिकाकर्ता को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।