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लंपी स्किन डिजीज की रोकथाम को लेकर उठाए जाएं प्रभारी कदम

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 29 Aug 2022 11:12 PM IST
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take impressive action to check lampi skin deasese
रामपुर। जिले में लंपी स्किन डिजीज के प्रसार को प्रभावी तरीके से रोकने के लिए जिला प्रशासन द्वारा की गई तैयारियों को लेकर प्रबंध निदेशक पीसीडीएफ ने विकास भवन सभागार में मुख्य विकास अधिकारी और पशुपालन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की।
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बैठक के दौरान एमडी पीसीडीएफ कुणाल सिल्कू ने कहा कि जनपद में अभी आधिकारिक तौर पर लंपी स्किन डिजीज का कोई मामला चिन्हित नहीं हुआ है, परंतु विशेष सतर्कता में कोई कमी नहीं आनी चाहिए। उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी नंदकिशोर कलाल से प्रशासनिक स्तर पर तैयारियों के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करते हुए कहा कि शासन द्वारा यह निर्णय लिया कि प्रत्येक जिले में एक डेडीकेटेड गौशाला संक्रमित पशुओं के आइसोलेशन के लिए आरक्षित की जाए। जिसमें लंपी स्किन डिजीज के उपचार के लिए पर्याप्त प्रबंध और जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध रहें। इसलिए जिले में एक डेडीकेटेड गौशाला तैयार हो, जिससे भविष्य में संक्रमित पशुओं को अन्य पशुओं से अलग करके रखा जा सके तथा उनका बेहतर उपचार संभव हो सके। उन्होंने कहा कि इस बीमारी के प्रसार में वेक्टर के रूप में मच्छर और मक्खियां सहयोगी बन रही हैं, इसलिए नगरीय क्षेत्रों में अधिशासी अधिकारी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में जिला पंचायत राज अधिकारी के नेतृत्व में टीमों द्वारा फॉगिंग और सैनिटाइजेशन नियमित रूप से होता रहे, ताकि मच्छर और मक्खियां न पनप सकें। अन्य जनपदों से पशुधन के प्रवेश पर प्रभावी तरीके से रोक लगाई जाए, क्योंकि अन्य जनपदों से आने वाले संक्रमित पशुओं से जनपद में भी संक्रमण फैल सकता है। उन्होंने कहा कि सभी खंड विकास अधिकारी अपने क्षेत्रों के ग्राम प्रधान, गौशाला संचालकों और प्रमुख गौ-पालकों के साथ बैठक करके उन्हें लंपी स्किन डिसीज के लक्षण के बारे में जानकारी प्रदान कराएं। साथ ही किसी भी पशु में इसके लक्षण दिखने पर तत्काल प्रभावी कदम उठाने में भी उनका सहयोग प्राप्त करें। यदि जनपद में कहीं भी लंपी स्किन डिसीज का मामला पाया जाता है तो पांच किलोमीटर के दायरे में मौजूद पशुओं में प्राथमिकता से वैक्सीनेशन होना चाहिए। साथ ही फॉगिंग और सैनिटाइजेशन के लिए विशेष कदम उठाए जाएं। वैक्सिनेशन के दौरान ऐसी व्यवस्था विकसित होनी चाहिए, जिसमें कोल्ड चौन दुरुस्त बनी रहे, ताकि वैक्सीन आपूर्ति में किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो।
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