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भारतीय संस्कृति को समझने के लिए संस्कृत का अध्ययन आवश्यक
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रामपुर। राजकीय महिला डिग्री कालेज में शिक्षा में संस्कृत की आवश्यकता विषय पर हुई कार्यशाला में कहा गया कि भारतीय संस्कृति को जानने व समझने के लिए संस्कृत का अध्ययन आवश्यक है। संस्कृत भाषा के ज्ञान के बगैर भारतीय संस्कृति को आत्मसात नहीं किया जा सकता।
शनिवार को हुई आन लाइन व्याख्यान माला में मुख्य वक्ता संत गणिनाथ राजकीय स्नाकोत्तर मुहम्मदाबाद गोहाना के संस्कृत विभाग के प्रोफेसर डॉ.चंद्रकांत शुक्ल ने कहा कि शिक्षा में वे मूल्य होने चाहिए जिससे मिलकर सभ्य मानव का निर्माण हो। शिक्षा तभी पूर्ण होगी जब उसमें संस्कृत का सुवास होगा। जो शुद्ध ,परिमार्जित , सत्य स्वरुप और मूलरुप में विद्यामान है, वही संस्कृत है । संस्कृत सदाचार ,मानवता,मैत्री ,करुणा एवं दया के भाव को समझने व आत्मसात करने मे सहायक है।
प्राचार्य डॉ. अतुल शर्मा ने कहा कि संस्कृत भाषा सर्वाधिक वैज्ञानिक एवं तार्किक भाषा है। हमें संगणक और वैदिक गणित से बड़ी -बड़ी गणनाएं कर सकते हैं। संस्कृत विभागाध्यक्षा तथा प्रसार व्याख्यान की संयोजिका डॉ. सुनीता जायसवाल ने संस्कृत की शिक्षा में आवश्यकता पर सूत्रात्मक शैली में प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति को जानने समझने तथा आत्मसात करने के लिए संस्कृत का अध्ययन अत्यावश्यक है।
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शनिवार को हुई आन लाइन व्याख्यान माला में मुख्य वक्ता संत गणिनाथ राजकीय स्नाकोत्तर मुहम्मदाबाद गोहाना के संस्कृत विभाग के प्रोफेसर डॉ.चंद्रकांत शुक्ल ने कहा कि शिक्षा में वे मूल्य होने चाहिए जिससे मिलकर सभ्य मानव का निर्माण हो। शिक्षा तभी पूर्ण होगी जब उसमें संस्कृत का सुवास होगा। जो शुद्ध ,परिमार्जित , सत्य स्वरुप और मूलरुप में विद्यामान है, वही संस्कृत है । संस्कृत सदाचार ,मानवता,मैत्री ,करुणा एवं दया के भाव को समझने व आत्मसात करने मे सहायक है।
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प्राचार्य डॉ. अतुल शर्मा ने कहा कि संस्कृत भाषा सर्वाधिक वैज्ञानिक एवं तार्किक भाषा है। हमें संगणक और वैदिक गणित से बड़ी -बड़ी गणनाएं कर सकते हैं। संस्कृत विभागाध्यक्षा तथा प्रसार व्याख्यान की संयोजिका डॉ. सुनीता जायसवाल ने संस्कृत की शिक्षा में आवश्यकता पर सूत्रात्मक शैली में प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति को जानने समझने तथा आत्मसात करने के लिए संस्कृत का अध्ययन अत्यावश्यक है।
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