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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Rampur News ›   Reached Ayodhya after overcoming challenges in Ramdhun, kept in jail by police, targeted family members

Ram Mandir: रामधुन में चुनौतियों को पार कर पहुंचे थे अयोध्या, पुलिस ने जेल में रखा, परिजनों को बनाया निशाना

Mon, 08 Jan 2024 10:44 AM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर Published by: विमल शर्मा Updated Mon, 08 Jan 2024 10:44 AM IST
सार

अयोध्या में 22 जनवरी को राममंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होगी। इसको लेकर रामपुर के कारसेवक भी उत्साहित हैं। राममंदिर के लिए संघर्ष करने वाले लोगों ने बताया कि 1992 में अयोध्या की सड़कों पर रामभक्तों का सैलाब उमड़ा था। जब वह वापस लौटे तो पुलिस ने परेशान करना शुरू कर दिया था।

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Reached Ayodhya after overcoming challenges in Ramdhun, kept in jail by police, targeted family members
रामपुर के कारसेवक - फोटो : संवाद

विस्तार

अयोध्या में 22 जनवरी को भव्य राममंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होगी। इसको लेकर रामपुर के भी रामभक्तों में जबरदस्त उत्साह है। साथ ही जिले के कारसेवक 1990 से लेकर 1992 तक के उस दौर को याद कर रहे हैं, जब उन्होंने राममंदिर के लिए संघर्ष किया था। बड़ी संख्या में रामभक्त अलग-अलग तरीकों से अयोध्या पहुंचे थे।

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राममंदिर के लिए संघर्ष करने वाले कारसेवकों का कहना है कि विवादित ढांचा ढहाए जाने के दिन अयोध्या की सड़कों पर रामभक्तों का सैलाब था। सबकी जुबां पर सिर्फ राम नाम था। पुलिस व प्रशासनिक चुनौतियों को पार करते हुए रामसेवा के कार्य में हिस्सा लिया। राममंदिर का निर्माण पूरा होने पर वर्षों के संघर्ष को याद करते हुए कारसेवक अपने अनुभव बता रहे हैं। 

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पुलिस ने दर्ज किया दंगा भड़काने का झूठा मुकदमा

1990 में 15 दिन और 1992 में सात दिन तक मुझे अस्थायी जेल में रखा गया था। परिजनों को भी पुलिस ने निशाना बनाया था। जब फैजाबाद (अब अयोध्या) की जेल में बंद था, तब रामपुर में मेरे ऊपर दंगा भड़काने का मुकदमा दर्ज किया था। तब फैजाबाद प्रशासन की ओर से अस्थायी जेल में बंद होने का सर्टिफिकेट दिया गया था, जिसके बाद झूठा मुकदमा खत्म हुआ। लाठियां खाकर भी रामभक्तों ने संघर्ष किया और अब मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है। करोड़ों रामभक्तों के लिए यह गर्व की बात है। - अनिल वशिष्ठ, बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक।

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राममंदिर के लिए तमाम कारसेवकों ने बलिदान दिया। पुलिस को चकमा देकर किसी तरह अयोध्या पहुंचा था। देशभर से हजारों कार्यकर्ता अलग-अलग तरीके से अयोध्या पहुंचे थे और विवादित ढांचा गिराया गया था। पुलिस-प्रशासन की सख्ती भी रामभक्तों को नहीं रोक पाई थी। कारसेवकों के हुजूम के चलते अयोध्या में पैर रखने की भी जगह नहीं थी। सभी के संघर्ष से राममंदिर के निर्माण में सफलता मिली। हम सभी के आराध्य रामलला अब मंदिर में विराजमान होंगे। ये बेहद सौभाग्य की बात है। लोग घरों में 22 जनवरी को दीपक जलाकर दिवाली मनाएं। - सुनील कुमार झा, पूर्व जिला कोषाध्यक्ष, बजरंग दल रामपुर।

 

 

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