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किसानों का भविष्य चौपट करने को बनाए कृषि कानून
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भोट (रामपुर)। नए कृषि कानूनों की वापसी की मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन का धरना 128वें दिन भी जारी रहा। इस दौरान धरना स्थल पर बैठे किसानों ने केंद्र सरकार पर देश के किसानों के साथ धोखा करने का आरोप लगाते हुए केंद्र सरकार पर किसान विरोधी होने का आरोप लगाया। आक्रोशित किसानों ने नारेबाजी व प्रदर्शन कर तीनों कृषि कानूनों को वापस किए जाने की मांग की।
कोयला टोल प्लाजा पर भाकियू से जुड़े किसान पिछले 128 दिनों से सरकार के नए कृषि कानूनों के विरोध में धरने पर बैठे हैं। शनिवार को धरने पर बैठे किसानों को संबोधित करते हुए भाकियू मंडल उपाध्यक्ष मोहम्मद तालिब ने कहा कि अभी तो किसान आंदोलन को दस महीने ही हुए हैं। सरकार अभी इन कृषि कानूनों से किसानों और देश को होने वाले नुकसान को समझ नहीं पा रही है। जल्दी ही सरकार की भी समझ में आ जाएगा कि यह कानून किसानों के लिए नुकसानदेह और और फिर वह कानून भी वापस लेगी। इसलिए, किसान हिम्मत न हारें व धरने पर डटे रहें। किसानों के कुछ महीने आंदोलन करने से एक फसल ही नष्ट होगी और अगर यह कृषि कानून लागू हो गए, तो यह देश के किसानों का भविष्य ही चौपट हो जाएगा। उन्होंने सरकार से तीनों कृषि कानूनों वापस करने की मांग की है। इस दौरान तौकीर अहमद, जाकिर नबी, इरफान हसन, हाफिज रेहान, सरताज अली, नईम, अब्दुल मुस्तफा, जुम्मा अली, फिरासत, नौशाद, दिलशाद, चंद्रसेन, छिद्दा अली, हरिओम, फरीद, देवीदास आदि मौजूद रहे।
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कोयला टोल प्लाजा पर भाकियू से जुड़े किसान पिछले 128 दिनों से सरकार के नए कृषि कानूनों के विरोध में धरने पर बैठे हैं। शनिवार को धरने पर बैठे किसानों को संबोधित करते हुए भाकियू मंडल उपाध्यक्ष मोहम्मद तालिब ने कहा कि अभी तो किसान आंदोलन को दस महीने ही हुए हैं। सरकार अभी इन कृषि कानूनों से किसानों और देश को होने वाले नुकसान को समझ नहीं पा रही है। जल्दी ही सरकार की भी समझ में आ जाएगा कि यह कानून किसानों के लिए नुकसानदेह और और फिर वह कानून भी वापस लेगी। इसलिए, किसान हिम्मत न हारें व धरने पर डटे रहें। किसानों के कुछ महीने आंदोलन करने से एक फसल ही नष्ट होगी और अगर यह कृषि कानून लागू हो गए, तो यह देश के किसानों का भविष्य ही चौपट हो जाएगा। उन्होंने सरकार से तीनों कृषि कानूनों वापस करने की मांग की है। इस दौरान तौकीर अहमद, जाकिर नबी, इरफान हसन, हाफिज रेहान, सरताज अली, नईम, अब्दुल मुस्तफा, जुम्मा अली, फिरासत, नौशाद, दिलशाद, चंद्रसेन, छिद्दा अली, हरिओम, फरीद, देवीदास आदि मौजूद रहे।
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