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पटवाई में हुई अनोखी शादी, न दान, न दहेज और न बाराती
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शाहबाद। पटवाई में हुई अनोखी शादी की लोगों में खूब चर्चा है। न दान, न दहेज और न बराती, इस शादी की खासियत रही। साधारण कपड़ों में दूल्हा आया और बिना शृंगार के ही दुल्हन को विदा कराकर ले गया। हल्दी, मेहंदी और मंडप आदि रस्माें रिवाज के बिना यह अनोखी शादी मात्र बीस मिनट में संपन्न हो गई। यह शादी क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी रही। उधर परिजनों ने बताया कि युवक इंटर पास करने के बाद रुद्रपुर के एक निजी कंपनी में काम करता है। वहीं युवती हाईस्कूल परीक्षा पास करने के बाद सिलाई सेंटर का संचालन कर युवतियों को सिखाने का काम करती है।
रामपुर के पुराना गंज निवासी अर्जुन ने अपनी बेटी का रिश्ता सैदनगर के भूप सिंह के बेटे हरिओम से लगभग तीन माह पूर्व तय किया था। दोनों संबंधियों के बीच तीन जुलाई को शादी होना तय हो गया। जिसके बाद रविवार तीन जुलाई को दुल्हन शीतल और दूल्हा हरिओम ने जीवन के सात फेरे लिए। यह शादी पटवाई के गांव रतनपुरा जनूबी में संपन्न हुई। इस शादी में कोई बराती नजर नहीं आए। दान, दहेज को भी शादी से दूर रखा गया। यहां तक कि दूल्हा बिना सेहरे के और दुल्हन बिना शृंगार के साधारण कपड़ों में नजर आई। उसके हाथों में मेहंदी तक लगी हुई नहीं थी। बीस मिनट के अंदर यह अनोखी शादी संपन्न हो गई। दोनों परिवार के लोगों ने बताया की इस तरह से दहेज रूपी सामाजिक कुरीतियों को खत्म किया जा सकता है। इस शादी में किसी का ज्यादा खर्च नहीं हुआ। दूल्हा-दुल्हन की मंत्रोचारण के साथ शादी संपन्न करा दी गई। दोनों परिवार के लोगों ने बताया कि वह संत रामपाल महाराज के प्रवचनों से प्रभावित होकर और उनके ज्ञान के आधार पर बिना दान दहेज के एक साधारण तरीके से शादी को संपन्न कराया गया है। क्षेत्र में इस तरह की पहली शादी होने की चर्चा है। शादी के संपन्न होने के बाद जिसको इसकी जानकारी हुई, वे लोग मौके पर पहुंचे और दोनों परिवारों समेत दूल्हा और दुल्हन को शुभकामनाएं दीं।
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रामपुर के पुराना गंज निवासी अर्जुन ने अपनी बेटी का रिश्ता सैदनगर के भूप सिंह के बेटे हरिओम से लगभग तीन माह पूर्व तय किया था। दोनों संबंधियों के बीच तीन जुलाई को शादी होना तय हो गया। जिसके बाद रविवार तीन जुलाई को दुल्हन शीतल और दूल्हा हरिओम ने जीवन के सात फेरे लिए। यह शादी पटवाई के गांव रतनपुरा जनूबी में संपन्न हुई। इस शादी में कोई बराती नजर नहीं आए। दान, दहेज को भी शादी से दूर रखा गया। यहां तक कि दूल्हा बिना सेहरे के और दुल्हन बिना शृंगार के साधारण कपड़ों में नजर आई। उसके हाथों में मेहंदी तक लगी हुई नहीं थी। बीस मिनट के अंदर यह अनोखी शादी संपन्न हो गई। दोनों परिवार के लोगों ने बताया की इस तरह से दहेज रूपी सामाजिक कुरीतियों को खत्म किया जा सकता है। इस शादी में किसी का ज्यादा खर्च नहीं हुआ। दूल्हा-दुल्हन की मंत्रोचारण के साथ शादी संपन्न करा दी गई। दोनों परिवार के लोगों ने बताया कि वह संत रामपाल महाराज के प्रवचनों से प्रभावित होकर और उनके ज्ञान के आधार पर बिना दान दहेज के एक साधारण तरीके से शादी को संपन्न कराया गया है। क्षेत्र में इस तरह की पहली शादी होने की चर्चा है। शादी के संपन्न होने के बाद जिसको इसकी जानकारी हुई, वे लोग मौके पर पहुंचे और दोनों परिवारों समेत दूल्हा और दुल्हन को शुभकामनाएं दीं।
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