{"_id":"62489e19d853c761fe74a85d","slug":"kavi-samelan-in-rampur-rampur-news-mbd4234662187","type":"story","status":"publish","title_hn":"तुमने पत्थर सा दिल हमको कह तो दिया, पत्थरों पे लिखोगे तो मिटेगा नहीं------","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तुमने पत्थर सा दिल हमको कह तो दिया, पत्थरों पे लिखोगे तो मिटेगा नहीं------
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रामपुर। मानस सत्संग मंडल की ओर से नव संवत्सर पर हुए अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को आधी रात के बाद तक बांधे रखा। कवियों द्वारा प्रस्तुत हास्य रस की रचना सुनकर श्रोता ठहाके लगाते रहे तो कभी वीर रस की रचनाओं ने श्रोताओं में जोश भर दिया। दिल्ली से आए गीतकार विष्णु सक्सेना ने कहा--तुमने पत्थर का दिल हमको कह तो दिया, पत्थरों पर लिखोगे मिटेगा नहीं।
शुक्रवार की रात सिविल लाइंस स्थित आदर्श रामलीला मैदान में हुए अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का शुभारंभ अतिथियों सुभाष नंदा, संरक्षक धनंजय पाठक संरक्षक, पैक्सपेड चेयरमैन सूर्य प्रकाश पाल, संयोजक जुगेश अरोरा कुक्कू, बृजेश गुप्ता व महेश गुप्ता ने जुनेजा ने भगवान गणेश और मां सरस्वती की प्रतिमाओं के सम्मुख दीप प्रज्जवलित और माल्यार्पण कर किया। प्रख्यात गीतकार विष्णु सक्सेना ने मां सरस्वती की वंदना प्रस्तुत कर मां के चरणों में नमन किया। इसके बाद हाथरस से आए कवि पदम अलबेला ने अपनी रचना को कुछ इस तरह पढ़ा--अरे यूपी वालों खुशियां उछालो, योगी जी का शासन फिर आ रहा है । माफिया डरे हैं दुबके पड़े हैं बुलडोजर का करतब नजर आ रहा है। आगरा से आई श्रृंगार रस की कवियत्री रुचि चतुर्वेदी ने अपने खास अंदाज में प्रस्तुति करते हुए कहा--लाल महावर लगे मेरे इन पाँव की चिंता मत करना, सीमा पर जागे रहना तुम गाँव की चिंता मत करना, ठिठुरन हो या कड़ी धूप हो छाँव की चिंता मत करना। लगे युद्ध में चोट अगर तो घाव की चिंता मत करना। तेज नारायण बैचेन में भी काव्य पाठ प्रस्तुत किया। बरेली के डा. राहुल अवस्थी ने अपनी रचना कुछ इस तरह प्रस्तुत की। जीवन हर दुख से रीता हो जाएगा, आ रहा होगा तो जीता हो जाएगा। मध्य प्रदेश के मुरैना के व्यंग्यकार तेज नारायण शर्मा अपने व्यंग से दर्शकों को गुदगुदाते और हंसाते रहे। उन्होंने कहा---मैंने जब हिंदू का चेहरा लगाया तो मुसलमानों ने पीटा, मैंने जब मुसलमान का चेहरा लगाया तो हिंदुओं ने पीटा, मैंने जब सिख का चेहरा लगाया तो दोनों ने मुझे पीटा लेकिन, मैंने जब औरत का चेहरा लगाया तो तीनों ने एक दूसरे को पीटा। देवास से आए वीर रस के कवि शशिकांत यादव ने वीर रस की कविताएं सुनाकर जोश भर दिया। उन्होंने सर्जिकल अटैक के प्रमाण मांग रहे और कश्मीरी पंडितों के अत्याचार पर हंसने वाले तंज कसते हुए कहा - संविधान की शपथ ली थी तो खाई कसमों को दिल से निभाना चाहिए। जनता के मत कर्ज तुम्हारी कुर्सियों पर सैनिकों-शहीदों का स्वाभिमान भी नहीं बचा सको तो हाथ चूड़ी पहन कर बैठ जाना चाहिए। रात करीब 1.30 बजे तक चले कवि सम्मेलन में श्रोता काव्य की रसधारा में गोते लगाते रहे। राजेंद्र स्वरूप भटनागर , अनिल वशिष्ठ, श्रीष गुप्ता, दिलीप सक्सेना, भारत भूषण गुप्ता, तारिक अब्दुल्ला ,मुनन भाई, राजीव मांगलिक, मोहन लाल सैनी, डॉ. अनिल गुप्ता, राजीव सिंघल, वीरेंद्र गर्ग, संजीव अग्रवाल, भूप सिंह यादव, सोनी ताऊ, अमित मेंदीरत्ता, संदीप अग्रवाल सोनी, निक्कू पंडित, अनुज सक्सेना, गोविंद पांडेय, नरेश सक्सेना, राकेश सिंघल, अनूप अग्रवाल, सतेन्द्र भटनागर, दीपक जिंदल, चंद्र प्रकाश शर्मा आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
शुक्रवार की रात सिविल लाइंस स्थित आदर्श रामलीला मैदान में हुए अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का शुभारंभ अतिथियों सुभाष नंदा, संरक्षक धनंजय पाठक संरक्षक, पैक्सपेड चेयरमैन सूर्य प्रकाश पाल, संयोजक जुगेश अरोरा कुक्कू, बृजेश गुप्ता व महेश गुप्ता ने जुनेजा ने भगवान गणेश और मां सरस्वती की प्रतिमाओं के सम्मुख दीप प्रज्जवलित और माल्यार्पण कर किया। प्रख्यात गीतकार विष्णु सक्सेना ने मां सरस्वती की वंदना प्रस्तुत कर मां के चरणों में नमन किया। इसके बाद हाथरस से आए कवि पदम अलबेला ने अपनी रचना को कुछ इस तरह पढ़ा--अरे यूपी वालों खुशियां उछालो, योगी जी का शासन फिर आ रहा है । माफिया डरे हैं दुबके पड़े हैं बुलडोजर का करतब नजर आ रहा है। आगरा से आई श्रृंगार रस की कवियत्री रुचि चतुर्वेदी ने अपने खास अंदाज में प्रस्तुति करते हुए कहा--लाल महावर लगे मेरे इन पाँव की चिंता मत करना, सीमा पर जागे रहना तुम गाँव की चिंता मत करना, ठिठुरन हो या कड़ी धूप हो छाँव की चिंता मत करना। लगे युद्ध में चोट अगर तो घाव की चिंता मत करना। तेज नारायण बैचेन में भी काव्य पाठ प्रस्तुत किया। बरेली के डा. राहुल अवस्थी ने अपनी रचना कुछ इस तरह प्रस्तुत की। जीवन हर दुख से रीता हो जाएगा, आ रहा होगा तो जीता हो जाएगा। मध्य प्रदेश के मुरैना के व्यंग्यकार तेज नारायण शर्मा अपने व्यंग से दर्शकों को गुदगुदाते और हंसाते रहे। उन्होंने कहा---मैंने जब हिंदू का चेहरा लगाया तो मुसलमानों ने पीटा, मैंने जब मुसलमान का चेहरा लगाया तो हिंदुओं ने पीटा, मैंने जब सिख का चेहरा लगाया तो दोनों ने मुझे पीटा लेकिन, मैंने जब औरत का चेहरा लगाया तो तीनों ने एक दूसरे को पीटा। देवास से आए वीर रस के कवि शशिकांत यादव ने वीर रस की कविताएं सुनाकर जोश भर दिया। उन्होंने सर्जिकल अटैक के प्रमाण मांग रहे और कश्मीरी पंडितों के अत्याचार पर हंसने वाले तंज कसते हुए कहा - संविधान की शपथ ली थी तो खाई कसमों को दिल से निभाना चाहिए। जनता के मत कर्ज तुम्हारी कुर्सियों पर सैनिकों-शहीदों का स्वाभिमान भी नहीं बचा सको तो हाथ चूड़ी पहन कर बैठ जाना चाहिए। रात करीब 1.30 बजे तक चले कवि सम्मेलन में श्रोता काव्य की रसधारा में गोते लगाते रहे। राजेंद्र स्वरूप भटनागर , अनिल वशिष्ठ, श्रीष गुप्ता, दिलीप सक्सेना, भारत भूषण गुप्ता, तारिक अब्दुल्ला ,मुनन भाई, राजीव मांगलिक, मोहन लाल सैनी, डॉ. अनिल गुप्ता, राजीव सिंघल, वीरेंद्र गर्ग, संजीव अग्रवाल, भूप सिंह यादव, सोनी ताऊ, अमित मेंदीरत्ता, संदीप अग्रवाल सोनी, निक्कू पंडित, अनुज सक्सेना, गोविंद पांडेय, नरेश सक्सेना, राकेश सिंघल, अनूप अग्रवाल, सतेन्द्र भटनागर, दीपक जिंदल, चंद्र प्रकाश शर्मा आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन