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स्वर्गधाम में चिताओं के लिए कम पड़ी जगह, वैकल्पिक व्यवस्था कर किया जा रहा अंतिम संस्कार
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रामपुर। स्वर्गधाम में मृतकों के अंतिम संस्कार के मामले में पिछले सभी रिकार्ड टूट गए हैं। आलम यह है कि स्वर्गधाम में अंतिम संस्कार करने के लिए जगह भी कम पड़ गई। मंगलवार को ही एक दिन में 15 शवों का दाह संस्कार हुआ, जो अब तक का सर्वाधिक स्तर है। अचानक एक के बाद एक शव आने की वजह से स्वर्गधाम प्रबंधक कमेटी को मजबूर होकर वैकल्पिक व्यवस्था करानी पड़ी, जिसके बाद शवों का अंतिम संस्कार हो सका।
कोरोना संक्रमण का दायरा दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को ही जिले में 116 नए संक्रमित सामने आए हैं। इसके अलावा लोगों की जान भी जा रही है। बीते दस दिनों की बात की जाए तो सिर्फ स्वर्गधाम में ही 77 शवों का अंतिम संस्कार हो चुका है। हालांकि, इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि जिन शवों का अंतिम संस्कार हुआ है, वे भी कोविड-19 से पीड़ित थे। किन्तु, कुछ शव तो ऐसे थे, जिनका दाह संस्कार कोविड-19 के प्रोटोकॉल के तहत किया गया था। स्वर्गधाम प्रबंधन कमेटी के सदस्यों की मानें तो बीते तीन दशक में ऐसा कभी नहीं हुआ कि एक दिन में 15 शवों का अंतिम संस्कार हुआ हो। मंगलवार को तो सभी रिकार्ड टूट गए। एक के बाद एक शव आते गए। आलम यह हो गया कि अंतिम संस्कार करने के लिए जगह तक कम पड़ गई। बाद में स्वर्गधाम प्रबंधन कमेटी को वैकल्पिक व्यवस्था करानी पड़ी, जिसके बाद शवों का अंतिम संस्कार हुआ। कमेटी के अध्यक्ष राजीव मांगलिक की मानें तो स्वर्गधाम में अंतिम संस्कार के लिए दस शेड बने हुए हैं, लेकिन एक के बाद एक इतने शव आ गए कि दूसरे स्थान पर शवों का अंतिम संस्कार हुआ। 20 अप्रैल को 11, 24 अप्रैल को 12 शवों का अंतिम संस्कार हुआ था, जबकि 27 अप्रैल को 15 चिताओं को जलाया गया।
आम का सीजन होने की वजह से लकड़ी भी होने लगी किल्लत
रामपुर। स्वर्गधाम में यूं तो लकड़ी की भरमार रहती थी। दान करने वालों के साथ ही स्वर्गधाम की ओर से भी बड़े पैमाने पर लकड़ी खरीदी जाती थी, जो कई कई सालों तक पड़ी रहती थी। वर्तमान में हालात ऐसे हैं कि स्वर्गधाम में भी लकड़ी की किल्लत होने लगी है। पहले लकड़ी के जो ढेर दिखाई देते थे, वे अब काफी कम हो गए हैं। हालांकि, स्वर्गधाम प्रबंधन कमेटी के सदस्यों की मानें तो फिलहाल लकड़ी की कोई कमी नहीं है। आम का सीजन होने की वजह से आम की लकड़ी मिलने में समस्या हो रही है। फिलहाल, इतनी लकड़ी तो है ही कि आगामी कुछ दिनों में कोई दिक्कत नहीं होगी।
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कोरोना संक्रमण का दायरा दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को ही जिले में 116 नए संक्रमित सामने आए हैं। इसके अलावा लोगों की जान भी जा रही है। बीते दस दिनों की बात की जाए तो सिर्फ स्वर्गधाम में ही 77 शवों का अंतिम संस्कार हो चुका है। हालांकि, इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि जिन शवों का अंतिम संस्कार हुआ है, वे भी कोविड-19 से पीड़ित थे। किन्तु, कुछ शव तो ऐसे थे, जिनका दाह संस्कार कोविड-19 के प्रोटोकॉल के तहत किया गया था। स्वर्गधाम प्रबंधन कमेटी के सदस्यों की मानें तो बीते तीन दशक में ऐसा कभी नहीं हुआ कि एक दिन में 15 शवों का अंतिम संस्कार हुआ हो। मंगलवार को तो सभी रिकार्ड टूट गए। एक के बाद एक शव आते गए। आलम यह हो गया कि अंतिम संस्कार करने के लिए जगह तक कम पड़ गई। बाद में स्वर्गधाम प्रबंधन कमेटी को वैकल्पिक व्यवस्था करानी पड़ी, जिसके बाद शवों का अंतिम संस्कार हुआ। कमेटी के अध्यक्ष राजीव मांगलिक की मानें तो स्वर्गधाम में अंतिम संस्कार के लिए दस शेड बने हुए हैं, लेकिन एक के बाद एक इतने शव आ गए कि दूसरे स्थान पर शवों का अंतिम संस्कार हुआ। 20 अप्रैल को 11, 24 अप्रैल को 12 शवों का अंतिम संस्कार हुआ था, जबकि 27 अप्रैल को 15 चिताओं को जलाया गया।
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आम का सीजन होने की वजह से लकड़ी भी होने लगी किल्लत
रामपुर। स्वर्गधाम में यूं तो लकड़ी की भरमार रहती थी। दान करने वालों के साथ ही स्वर्गधाम की ओर से भी बड़े पैमाने पर लकड़ी खरीदी जाती थी, जो कई कई सालों तक पड़ी रहती थी। वर्तमान में हालात ऐसे हैं कि स्वर्गधाम में भी लकड़ी की किल्लत होने लगी है। पहले लकड़ी के जो ढेर दिखाई देते थे, वे अब काफी कम हो गए हैं। हालांकि, स्वर्गधाम प्रबंधन कमेटी के सदस्यों की मानें तो फिलहाल लकड़ी की कोई कमी नहीं है। आम का सीजन होने की वजह से आम की लकड़ी मिलने में समस्या हो रही है। फिलहाल, इतनी लकड़ी तो है ही कि आगामी कुछ दिनों में कोई दिक्कत नहीं होगी।
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