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रजा लाइब्रेरी में स्वतंत्रता सेनानियों की मुद्रित पुस्तकों की प्रदर्शनी का आयोजन
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रामपुर। अमृत महोत्सव श्रृंखला के अन्तर्गत रजा लाइब्रेरी में संग्रहित स्वतंत्रता सेनानियों की मुद्रित पुस्तकों की प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। दरबार हॉल में आयोजित प्रदर्शनी का उद्घाटन राजकीय रजा स्नातकोत्तर महाविद्यालय के उर्दू विभाग के अध्यक्ष डॉ. मोहम्मद अरशद रिजवी, नसीरूद्दीन खां एवं डॉ. अबुसाद इस्लाही ने किया।
इस अवसर पर रामपुर के स्वतंत्रता सेनानी रहे अब्दुल वहाब खां के भतीजे नासिरूद्दीन खां ने बताया कि यह बहुत गर्व की बात है कि हम लोग आजादी के 75 वर्ष होने जा रहे हैं और भारत सरकार इस अवसर पर आजादी का अमृत महोत्सव मना रही है। कहा कि वहाब खां ने जनमानस की परेशानियों, जुल्म तथा नाइंसाफी और तालीमी सहूलियत और रोजगार के लिए रियासत के मौजूद हुक्मरानों को इस ध्यान दिलाने के लिए एक खत लिखा। उनकी यह कोशिश व्यक्तिगत थी, लेकिन बाद में उनके साथ प्रतिष्ठित और मशहूर लोग उनके साथ हो गए। 1933 में उन्हें अंजुमन-ए-खुददाम-वतन का सदर नियुक्त कर दिया गया। अंजुमन-ए-खुददाम-वतन बाद में नेशनल कांफ्रेंस हुआ और बाद में नेशनल कांफ्रेंस को इंडियन नेशनल कांग्रेस में शामिल कर दिया। वहाब खां जंगे-आजादी के लिए कई बार जेल गए।
इस अवसर पर डॉ. मोहम्मद अरशद रिजवी ने कहा कि जब हम ब्रिटिश शासन के युग के बारे में सोचते हैं तो ध्यान आता है कि जब करोड़ों लोग स्वतंत्रता का इंतजार कर रहे थे, तो यह स्वतंत्रता के 75 वर्षों के उत्सव को और भी महत्वपूर्ण बना देता है। आजादी का अमृत महोत्सव आजादी की लड़ाई के साथ-साथ आजाद भारत के सपनों और कर्तव्यों को देश के सामने रखकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देगा। इस अवसर पर गांधी जी बातें, गांधी जी के मुखतलिफ रूप, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, रामप्रसाद बिस्मिल, नेताजी सुभाषचन्द्र बोस, इंकलाब, शहीद अशफाकउल्ला खां और उनका युग, भगत सिंह और स्वतंत्रता संग्राम इत्यादि मुद्रित पुस्तकों को प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी 18 से 26 जुलाई तक चलेगी।
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इस अवसर पर रामपुर के स्वतंत्रता सेनानी रहे अब्दुल वहाब खां के भतीजे नासिरूद्दीन खां ने बताया कि यह बहुत गर्व की बात है कि हम लोग आजादी के 75 वर्ष होने जा रहे हैं और भारत सरकार इस अवसर पर आजादी का अमृत महोत्सव मना रही है। कहा कि वहाब खां ने जनमानस की परेशानियों, जुल्म तथा नाइंसाफी और तालीमी सहूलियत और रोजगार के लिए रियासत के मौजूद हुक्मरानों को इस ध्यान दिलाने के लिए एक खत लिखा। उनकी यह कोशिश व्यक्तिगत थी, लेकिन बाद में उनके साथ प्रतिष्ठित और मशहूर लोग उनके साथ हो गए। 1933 में उन्हें अंजुमन-ए-खुददाम-वतन का सदर नियुक्त कर दिया गया। अंजुमन-ए-खुददाम-वतन बाद में नेशनल कांफ्रेंस हुआ और बाद में नेशनल कांफ्रेंस को इंडियन नेशनल कांग्रेस में शामिल कर दिया। वहाब खां जंगे-आजादी के लिए कई बार जेल गए।
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इस अवसर पर डॉ. मोहम्मद अरशद रिजवी ने कहा कि जब हम ब्रिटिश शासन के युग के बारे में सोचते हैं तो ध्यान आता है कि जब करोड़ों लोग स्वतंत्रता का इंतजार कर रहे थे, तो यह स्वतंत्रता के 75 वर्षों के उत्सव को और भी महत्वपूर्ण बना देता है। आजादी का अमृत महोत्सव आजादी की लड़ाई के साथ-साथ आजाद भारत के सपनों और कर्तव्यों को देश के सामने रखकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देगा। इस अवसर पर गांधी जी बातें, गांधी जी के मुखतलिफ रूप, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, रामप्रसाद बिस्मिल, नेताजी सुभाषचन्द्र बोस, इंकलाब, शहीद अशफाकउल्ला खां और उनका युग, भगत सिंह और स्वतंत्रता संग्राम इत्यादि मुद्रित पुस्तकों को प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी 18 से 26 जुलाई तक चलेगी।
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