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विशाखा नक्षत्र में होगा पूजन
ब्यूरो/अमर उजाला रामपुर
Updated Tue, 10 Nov 2015 11:45 PM IST
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जिले भर में बुधवार को दीपों का पर्व दीपावली हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस बार दीपावली सभी के लिए शुभ लाभ प्रदान करने वाली और सौभाग्यदायी होगी। क्योंकि करीब सौ से भी अधिक साल के बाद दीपावली विशाखा नक्षत्र में होगी। विशाखा नक्षत्र के कारण इस दीपावली पर सौभाग्य, सुख-समृद्धि, एश्वर्य, बुधादित्य के साथ ही अमृत योग भी है।
ये विशेष फलकारी है। पंडितों के अनुसार दोपहर करीब डेढ़ बजे के बाद विशाखा नक्षत्र शुरू हो जाएगा। इसके बाद किसी भी समय दीपावली पूजन कर सकते हैं। विशाखा नक्षत्र में सौभाग्य, धात समेत कई विशेष योग बन रहे हैं। ये जातक को एश्वर्य, धन-संपदा, वैभव प्रदान करते हैं।
पंडित नवनीत शर्मा बताते हैं कि दीपावली पर शाम करीब साढ़े पांच बजे के बाद से लेकर साढ़े आठ बजे तक रात्रि पूजन किया जा सकता है। पंडित रामभरोसे लाल शर्मा बताते हैं कि दोपहर करीब डेढ़ बजे तक स्वाति नक्षत्र है। इसके बाद विशाखा नक्षत्र शुरू हो जाएगा। विशाखा नक्षत्र विशेष योग में होता है।
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इसलिए विशाखा नक्षत्र शुरू होने के बाद किसी भी समय पूजन किया जा सकता है। इत्र, रोली, कलावा, पान, सुपारी, फल-फूल, घी, दही, धूप, दीप, कपूर, शहद, जल पात्र, लक्ष्मी-गणेश जी की प्रतिमा, लाल वस्त्र, मिठाई, मेवा, नारियल, सिंदूर, गंगाजल, खील, बतासे, खिलौने, चांदी का सिक्के के साथ अपनी वंश परंपरा के अनुसार पूजन सामग्री को शामिल किया जा सकता है।
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ये विशेष फलकारी है। पंडितों के अनुसार दोपहर करीब डेढ़ बजे के बाद विशाखा नक्षत्र शुरू हो जाएगा। इसके बाद किसी भी समय दीपावली पूजन कर सकते हैं। विशाखा नक्षत्र में सौभाग्य, धात समेत कई विशेष योग बन रहे हैं। ये जातक को एश्वर्य, धन-संपदा, वैभव प्रदान करते हैं।
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पंडित नवनीत शर्मा बताते हैं कि दीपावली पर शाम करीब साढ़े पांच बजे के बाद से लेकर साढ़े आठ बजे तक रात्रि पूजन किया जा सकता है। पंडित रामभरोसे लाल शर्मा बताते हैं कि दोपहर करीब डेढ़ बजे तक स्वाति नक्षत्र है। इसके बाद विशाखा नक्षत्र शुरू हो जाएगा। विशाखा नक्षत्र विशेष योग में होता है।
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इसलिए विशाखा नक्षत्र शुरू होने के बाद किसी भी समय पूजन किया जा सकता है। इत्र, रोली, कलावा, पान, सुपारी, फल-फूल, घी, दही, धूप, दीप, कपूर, शहद, जल पात्र, लक्ष्मी-गणेश जी की प्रतिमा, लाल वस्त्र, मिठाई, मेवा, नारियल, सिंदूर, गंगाजल, खील, बतासे, खिलौने, चांदी का सिक्के के साथ अपनी वंश परंपरा के अनुसार पूजन सामग्री को शामिल किया जा सकता है।