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सहकारी समितियों के कर्मचारियों को मिले माध्यमिक शिक्षकों की तरह वेतन
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रामपुर। सहकारी समितियों के सचिव वेतन व पदोन्नति की मांग को लेकर हड़ताल पर चले गए हैं। इसके तहत कर्मचारियों ने विकास भवन में धरना दिया। इस दौरान समितियों में ताले लटके रहे। नतीजतन किसानों को खाद का वितरण नहीं हो सका।
संयुक्त सहकारी समिति कर्मचारी समन्वय समिति के बैनरतले सचिव विकास भवन में एकत्र हुए। इसके बाद नारेबाजी करते हुए धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि नियोजित हजारों सचिवों, आंकिक, लिपिक, विक्रेता, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी एवं चौकीदारों को वर्षों से वेतन नहीं मिल रहा है। इस कारण कर्मचारी आर्थिक बदहाली के शिकार हैं। जून 2003 को एक अधिसूचना जारी कर सरकार द्वारा पैक्स कर्मचारियों का वेतन पैक्स व्यवसाय से उपार्जित लाभ पर आधारित कर दिया।
वक्ताओं ने कहा कि कर्मचारियों के आंदोलन की वजह से सपा सरकार ने छह हजार प्रति समिति प्रतिमाह माध्यमिक शिक्षा की भांति देने का निर्णय लिया था, जिसे तत्कालीन सरकार ने कैबिनेट से भी पास करा लिया, किन्तु इसके बाद भी कर्मचारियों को एक पैसा भी नहीं मिला। उन्होंने समितियों के कर्मचारियों को माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों की तरह से वेतन दिलाने एवं पदोन्नति कराने की मांग की है।
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संयुक्त सहकारी समिति कर्मचारी समन्वय समिति के बैनरतले सचिव विकास भवन में एकत्र हुए। इसके बाद नारेबाजी करते हुए धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि नियोजित हजारों सचिवों, आंकिक, लिपिक, विक्रेता, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी एवं चौकीदारों को वर्षों से वेतन नहीं मिल रहा है। इस कारण कर्मचारी आर्थिक बदहाली के शिकार हैं। जून 2003 को एक अधिसूचना जारी कर सरकार द्वारा पैक्स कर्मचारियों का वेतन पैक्स व्यवसाय से उपार्जित लाभ पर आधारित कर दिया।
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वक्ताओं ने कहा कि कर्मचारियों के आंदोलन की वजह से सपा सरकार ने छह हजार प्रति समिति प्रतिमाह माध्यमिक शिक्षा की भांति देने का निर्णय लिया था, जिसे तत्कालीन सरकार ने कैबिनेट से भी पास करा लिया, किन्तु इसके बाद भी कर्मचारियों को एक पैसा भी नहीं मिला। उन्होंने समितियों के कर्मचारियों को माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों की तरह से वेतन दिलाने एवं पदोन्नति कराने की मांग की है।
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