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अदालतों में सुलह-समझौते से निपटाए 64993 वाद
रामपुर/अमर उजाला ब्यूराे
Updated Sun, 13 Nov 2016 12:54 AM IST
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राष्ट्रीय मेगा लोक अदालत
- फोटो : अमर उजाला
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राष्ट्रीय मेगा लोक अदालत में शनिवार को पिछली लोक अदालतों के मुकाबले कई गुना अधिक मुकदमों का निस्तारण करके नया रिकार्ड बनाया गया। इस बार सुलह-समझौते के आधार पर 64953 वाद निस्तारित किए गए। मेगा लोक अदालत का जनपद न्यायाधीश अनिल कुमार गुप्ता ने जिलाधिकारी अमित किशोर और पुलिस अधीक्षक संजीव त्यागी की मौजूदगी में फीता काटकर शुभारंभ किया।
उन्होंने कहा कि गरीबों को त्वरित एवं सस्ता न्याय दिलाना ही इस लोक अदालत का मकसद है। जनपद न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय मेगा लोक अदालत का आयोजन शनिवार को किया गया। जिलाविधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं जिला जज अनिल कुमार गुप्ता ने उद्घाटन के बाद कहा कि त्वरित, सस्ता एवं सुलभ न्याय पाना प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है।
उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायामूर्ति के निर्देशानुसार देश एवं प्रदेश के सभी तहसील से लेकर उच्चतम न्यायालय स्तर तक के सभी अदालतों में राष्ट्रीय लोक अदालतों का आयोजन किया गया, जिसके के तहत रामपुर में कुल 64953 वाद निस्तारित किए गए। कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत में सुलह योग्य सभी फौजदारी, दीवानी, भरण-पोषण, वैवाहिक, पारिवारिक, स्टाप, पंजीयन, मोटर दुर्घटना प्रतिकर, चकबन्दी, श्रम, उपभोक्ता फोरम, भूमि अधिग्रहण, बाट माप, कराधान प्रकरण, बैंक रिकवरी, किरायेदारी, ऋण वसूली, उत्तराधिकार प्रमाण-पत्र, बिजली चोरी, जल एवं गृहकर, सेवा सम्बन्धित मामले, मनोरंजनकर, विकास प्राधिकरण, वन, पुलिस, दुकान एवं वाणिज्य अधिनियम, रेलवे दावा, स्थायी लोक अदालत, मनरेगा आदि के प्रकरण संदर्भित किये गए। आज सभी अधिकारियों के प्रयास से 64953 वाद निपटाए गए, यह अब तक की बड़ी संख्या हैं।
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उन्होंने कहा कि जिन वादियों द्वारा इस सुनहरे मौके का फायदा नहीं लिया जा सका है, वे अपने वाद प्रत्येक माह आयोजित होने वाले लोक अदालतों में नियत करा सकते हैं। इस मौके पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण प्रमोद कुमार-e अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीष कुमार-प्रथम, अपर जिलाधिकारी मार्तण्ड प्रताप सिंह, उप निदेशक कृषि वीरेंद्र कुमार, लीड बैंक अधिकारी प्रवीन सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक तारिक खां के अतिरिक्त विभिन्न बैंकों के अधिकारी आदि उपस्थित थे।
लोक अदालत में निर्णय के हैं कई फायदे
जिला जज ने बताया कि लोक अदालत में वादों के निस्तारण हेतु किसी प्रकार का कोई शुल्क देय नहीं है और मामलों के निस्तारण पर न्याय शुल्क की वापसी की भी व्यवस्था है। उन्होंने बताया कि लोक अदालत द्वारा पारित निर्णय के विरूद्ध किसी भी न्यायालय में अपील नहीं की जा सकती। आपसी समझौते के आधार पर आवेदन-पत्र देकर लंबित मुकदमों से हमेशा के लिए छुटकारा पाया जा सकता हैं।
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उन्होंने कहा कि गरीबों को त्वरित एवं सस्ता न्याय दिलाना ही इस लोक अदालत का मकसद है। जनपद न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय मेगा लोक अदालत का आयोजन शनिवार को किया गया। जिलाविधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं जिला जज अनिल कुमार गुप्ता ने उद्घाटन के बाद कहा कि त्वरित, सस्ता एवं सुलभ न्याय पाना प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है।
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उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायामूर्ति के निर्देशानुसार देश एवं प्रदेश के सभी तहसील से लेकर उच्चतम न्यायालय स्तर तक के सभी अदालतों में राष्ट्रीय लोक अदालतों का आयोजन किया गया, जिसके के तहत रामपुर में कुल 64953 वाद निस्तारित किए गए। कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत में सुलह योग्य सभी फौजदारी, दीवानी, भरण-पोषण, वैवाहिक, पारिवारिक, स्टाप, पंजीयन, मोटर दुर्घटना प्रतिकर, चकबन्दी, श्रम, उपभोक्ता फोरम, भूमि अधिग्रहण, बाट माप, कराधान प्रकरण, बैंक रिकवरी, किरायेदारी, ऋण वसूली, उत्तराधिकार प्रमाण-पत्र, बिजली चोरी, जल एवं गृहकर, सेवा सम्बन्धित मामले, मनोरंजनकर, विकास प्राधिकरण, वन, पुलिस, दुकान एवं वाणिज्य अधिनियम, रेलवे दावा, स्थायी लोक अदालत, मनरेगा आदि के प्रकरण संदर्भित किये गए। आज सभी अधिकारियों के प्रयास से 64953 वाद निपटाए गए, यह अब तक की बड़ी संख्या हैं।
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उन्होंने कहा कि जिन वादियों द्वारा इस सुनहरे मौके का फायदा नहीं लिया जा सका है, वे अपने वाद प्रत्येक माह आयोजित होने वाले लोक अदालतों में नियत करा सकते हैं। इस मौके पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण प्रमोद कुमार-e अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीष कुमार-प्रथम, अपर जिलाधिकारी मार्तण्ड प्रताप सिंह, उप निदेशक कृषि वीरेंद्र कुमार, लीड बैंक अधिकारी प्रवीन सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक तारिक खां के अतिरिक्त विभिन्न बैंकों के अधिकारी आदि उपस्थित थे।
लोक अदालत में निर्णय के हैं कई फायदे
जिला जज ने बताया कि लोक अदालत में वादों के निस्तारण हेतु किसी प्रकार का कोई शुल्क देय नहीं है और मामलों के निस्तारण पर न्याय शुल्क की वापसी की भी व्यवस्था है। उन्होंने बताया कि लोक अदालत द्वारा पारित निर्णय के विरूद्ध किसी भी न्यायालय में अपील नहीं की जा सकती। आपसी समझौते के आधार पर आवेदन-पत्र देकर लंबित मुकदमों से हमेशा के लिए छुटकारा पाया जा सकता हैं।