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डॉक्टर बनकर रह रहा बांग्लादेशी नागरिक फर्जी दस्तावेजों के साथ गिरफ्तार
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गिरफ्तार किया गया बांग्लादेशी युवक देवाशीष।
- फोटो : RAMPUR
शाहबाद (रामपुर)। फर्जी तरीके से भारतीय पासपोर्ट समेत अन्य दस्तावेज बनवाकर शाहबाद में डॉक्टर के रूप में रह रहे एक बांग्लादेशी युवक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से भारतीय पासपोर्ट, आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और एक बांग्लादेश का पासपोर्ट आदि दस्तावेज जब्त कर लिए हैं। फिलहाल आरोपी को जेल भेज दिया गया है।
सोमवार को शाहबाद पुलिस ने अप्रवासन (इमीग्रेशन) विभाग से आई एक पासपोर्ट की जांच के आधार पर संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिक को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, इमीग्रेशन विभाग ने बरेली पासपोर्ट कार्यालय को देवाशीष मंडल नाम के एक व्यक्ति के पासपोर्ट पर शक के आधार पर जांच के लिए भेजा था। इसकी जांच जब स्थानीय पुलिस और खुफिया एजेंसी के पास आई तो देवाशीष मंडल के सभी दस्तावेजों की जांच की गई। इसमें देवाशीष मंडल के नाम से भारतीय पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, आधार कार्ड और पैन कार्ड फर्जी तरीके से तैयार करवाए हुए पाए गए।
इन सभी दस्तावेजों में आरोपी ने अपना पता शाहबाद के मोहल्ला सादात का दर्ज कराया हुआ था। भारतीय पासपोर्ट में देवाशीष की जन्मतिथि (01 जनवरी 1991) अंकित है। साथ ही पुलिस को आरोपी के पास से एक वीजा भी मिला है। इसमें उसका नाम देवाशीष विश्वास, निवासी ग्राम वारी अली थाना चौगसा जनपद जसर, बांग्लादेश अंकित था। बांग्लादेश के पासपोर्ट पर देवाशीष साल 2012 में तीन माह के वीजा पर भारत आया था। इसके बाद वह वापस बांग्लादेश नहीं गया। बल्कि उसने भारतीय दस्तावेज तैयार कराकर यहीं बस गया।
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पुलिस के मुताबिक, आरोपी देवाशीष पिछले करीब चार साल से बरेली जिले के सिरौली कस्बे के मोहल्ला साहूकारा में रह रहा था। यहां पर वह डॉक्टर की तरह रह रहा था और एक क्लीनिक का संचालन करता था। क्षेत्र में लोग उसे बंगाली डॉक्टर के रूप में ही पहचानते थे।
फिलहाल सोमवार को पुलिस ने देवाशीष को गिरफ्तार करते हुए आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी करना), 467 (दस्तावेजों में हेराफेरी करना), 468, 472 (दस्तावेजों में हेराफेरी कर अनुचित ढंग से लाभ अर्जित करना), पासपोर्ट अधिनियम 12 (1ए) और विदेशी अधिनियम 14ए के तहत रिपोर्ट दर्ज कर जेल भेज दिया है।
इमीग्रेशन विभाग ने पासपोर्ट कार्यालय बरेली को एक संदिग्ध बांग्लादेशी युवक के पासपोर्ट की जांच भेजी थी। जांच में बांग्लादेशी युवक देवाशीष द्वारा फर्जी ढंग से वीजा समाप्त होने के बाद भारत में ही रुककर आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और पासपोर्ट बनवाने की पुष्टि हुई है। इस पर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी से फर्जी दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। - अंकित मित्तल, एसपी-रामपुर।
बरेली में अपना मकान, बंगाली नाम से क्लीनिक चलाता था देवाशीष
शाहबाद (रामपुर)। फर्जी पासपोर्ट व अन्य दस्तावेजों के साथ गिरफ्तार किए गए बांग्लादेशी नागरिक देवाशीष करीब नौ साल से देश रह रहा था। इस दौरान पिछले करीब चार साल से वह बरेली जिले के सिरौली कस्बे में एक बंगाली डॉक्टर नाम से क्लीनिक चला रहा था। यहां उसका अपना मकान भी है। शाहबाद और सिरौली में रहते हुए कभी किसी को उस पर शक नहीं हुआ। हर कोई उसे पश्चिम बंगाल का ही समझता था। सोमवार को देवाशीष के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के बाद शाहबाद नगर से लेकर सिरौली तक के लोगों में चर्चाएं शुरू हो गईं। लोगों को विश्वास नहीं हो रहा था कि उनके बीच एक बांग्लादेशी नागरिक अवैध ढंग से रह रहा है।
फर्जी दस्तावेजों की सही से जांच हो तो कई आरोपियों की गर्दन फंसनी तय
शाहबाद(रामपुर)। तीन माह के वीजा पर आए बांग्लादेशी नागरिक देवाशीष वीजा अवधि खत्म होने के बाद रामपुर के शाहबाद नगर में जाकर रहने लगा। यहां पर ही उसने अपने भारतीय पासपोर्ट समेत अन्य दस्तावेज बनवा लिए। लेकिन भारतीय विदेश मंत्रालय से लेकर गृह मंत्रालय और इमीग्रेशन विभाग को धोखाधड़ी की भनक तक नहीं लगी। लेकिन फर्जी दस्तावेज कहां से बनवाए गए, इसकी सही से जांच हो तो कई आरोपियों की गर्दन फंसनी तय है।
इमीग्रेशन विभाग से बरेली पासपोर्ट कार्यालय में आई देवाशीष के पासपोर्ट की जांच से उसके बांग्लादेशी नागरिक होने का खुलासा हुआ है। लेकिन सिस्टम की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान खड़े हुए हैं। पुलिस और खुफिया जांच में पता चला कि देवाशीष 29 जुलाई 2012 से 28 अक्तूबर 2012 तक के वीजा पर कोलकाता आया था। इसके लिए उसने अपने बांग्लादेशी पासपोर्ट का प्रयोग किया था। इस पर उसका पता निवासी ग्राम वारी अली थाना व तहसील चौगासा जिला जसर, बांग्लादेश दर्ज था। वीजा अवधि समाप्त होने के बाद साल 2013 में रामपुर जिले की एक प्लाई फैक्टरी में आकर मजदूरी करने लगा। इस दौरान वह शाहबाद के मोहल्ला सादात में रहा।
कुछ समय बाद देवाशीष विश्वास ने अपना नाम बदलकर देवाशीष मंडल रख लिया और शाहबाद के इसी मोहल्ले के पते मकान संख्या 162, सादात शाहबाद से ही भारतीय पासपोर्ट, आधार कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस बनवा लिए। बैंक खाता भी खोल लिया। इसके बाद साल 2107 में देवाशीष बरेली जिले के सिरौली कस्बे में जाकर रहने लगा और वहां पर उसने अपना मकान बना लिया। वह सिरौली में ही बंगाली डॉक्टर बनकर झोलाछाप चिकित्सक के रूप में काम करने लगा।
सवाल यह उठता है कि बांग्लादेशी नागरिक को किस तरह तो पहले बिना पुलिस जांच पड़ताल के रामपुर में मजदूरी मिली और फिर दस्तावेज बनवाए। इन दस्तावेजों के बनवाने में फर्जीवाड़ा का खेला कहां से शुरू हुआ यह जांच का विषय है। अगर फर्जी दस्तावेज तैयार होने की शुरूआत का पता चलता है तो कई आरोपियों की गर्दन फंसना तय है।
ऐसे पकड़ में आया मामला
रामपुर। देवाशीष 23 अक्तूबर 2021 को सड़क मार्ग से बांग्लादेश जा रहा था। इस दौरान हरिदासपुर स्थित इंडियन कस्टम की चेकिंग पोस्ट पर जब उसके दस्तावेजों की जांच की गई तो कर्मियों को उसके पासपोर्ट पर शक हुआ। इसके बाद इमीग्रेशन विभाग की ओर से देवाशीष के भारतीय पासपोर्ट जिसका नंबर हृ3438697 है। उसे जांच के लिए बरेली पासपोर्ट कार्यालय भेजा गया। यहां से यह पासपोर्ट जांच के लिए रामपुर पुलिस और खुफिया एजेंसी के पास आया। इस जांच में देवाशीष का पासपोर्ट जिन दस्तावेजों के आधार पर बना था वह फर्जी ढंग से बनवाए गए पाए गए। साथ देवाशीष के बांग्लादेशी नागरिक होने और उसके पास से बरामद वीजा से बांग्लादेशी पासपोर्ट होने की भी बात सामने आई। जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। संवाद
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सोमवार को शाहबाद पुलिस ने अप्रवासन (इमीग्रेशन) विभाग से आई एक पासपोर्ट की जांच के आधार पर संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिक को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, इमीग्रेशन विभाग ने बरेली पासपोर्ट कार्यालय को देवाशीष मंडल नाम के एक व्यक्ति के पासपोर्ट पर शक के आधार पर जांच के लिए भेजा था। इसकी जांच जब स्थानीय पुलिस और खुफिया एजेंसी के पास आई तो देवाशीष मंडल के सभी दस्तावेजों की जांच की गई। इसमें देवाशीष मंडल के नाम से भारतीय पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, आधार कार्ड और पैन कार्ड फर्जी तरीके से तैयार करवाए हुए पाए गए।
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इन सभी दस्तावेजों में आरोपी ने अपना पता शाहबाद के मोहल्ला सादात का दर्ज कराया हुआ था। भारतीय पासपोर्ट में देवाशीष की जन्मतिथि (01 जनवरी 1991) अंकित है। साथ ही पुलिस को आरोपी के पास से एक वीजा भी मिला है। इसमें उसका नाम देवाशीष विश्वास, निवासी ग्राम वारी अली थाना चौगसा जनपद जसर, बांग्लादेश अंकित था। बांग्लादेश के पासपोर्ट पर देवाशीष साल 2012 में तीन माह के वीजा पर भारत आया था। इसके बाद वह वापस बांग्लादेश नहीं गया। बल्कि उसने भारतीय दस्तावेज तैयार कराकर यहीं बस गया।
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पुलिस के मुताबिक, आरोपी देवाशीष पिछले करीब चार साल से बरेली जिले के सिरौली कस्बे के मोहल्ला साहूकारा में रह रहा था। यहां पर वह डॉक्टर की तरह रह रहा था और एक क्लीनिक का संचालन करता था। क्षेत्र में लोग उसे बंगाली डॉक्टर के रूप में ही पहचानते थे।
फिलहाल सोमवार को पुलिस ने देवाशीष को गिरफ्तार करते हुए आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी करना), 467 (दस्तावेजों में हेराफेरी करना), 468, 472 (दस्तावेजों में हेराफेरी कर अनुचित ढंग से लाभ अर्जित करना), पासपोर्ट अधिनियम 12 (1ए) और विदेशी अधिनियम 14ए के तहत रिपोर्ट दर्ज कर जेल भेज दिया है।
इमीग्रेशन विभाग ने पासपोर्ट कार्यालय बरेली को एक संदिग्ध बांग्लादेशी युवक के पासपोर्ट की जांच भेजी थी। जांच में बांग्लादेशी युवक देवाशीष द्वारा फर्जी ढंग से वीजा समाप्त होने के बाद भारत में ही रुककर आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और पासपोर्ट बनवाने की पुष्टि हुई है। इस पर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी से फर्जी दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। - अंकित मित्तल, एसपी-रामपुर।
बरेली में अपना मकान, बंगाली नाम से क्लीनिक चलाता था देवाशीष
शाहबाद (रामपुर)। फर्जी पासपोर्ट व अन्य दस्तावेजों के साथ गिरफ्तार किए गए बांग्लादेशी नागरिक देवाशीष करीब नौ साल से देश रह रहा था। इस दौरान पिछले करीब चार साल से वह बरेली जिले के सिरौली कस्बे में एक बंगाली डॉक्टर नाम से क्लीनिक चला रहा था। यहां उसका अपना मकान भी है। शाहबाद और सिरौली में रहते हुए कभी किसी को उस पर शक नहीं हुआ। हर कोई उसे पश्चिम बंगाल का ही समझता था। सोमवार को देवाशीष के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के बाद शाहबाद नगर से लेकर सिरौली तक के लोगों में चर्चाएं शुरू हो गईं। लोगों को विश्वास नहीं हो रहा था कि उनके बीच एक बांग्लादेशी नागरिक अवैध ढंग से रह रहा है।
फर्जी दस्तावेजों की सही से जांच हो तो कई आरोपियों की गर्दन फंसनी तय
शाहबाद(रामपुर)। तीन माह के वीजा पर आए बांग्लादेशी नागरिक देवाशीष वीजा अवधि खत्म होने के बाद रामपुर के शाहबाद नगर में जाकर रहने लगा। यहां पर ही उसने अपने भारतीय पासपोर्ट समेत अन्य दस्तावेज बनवा लिए। लेकिन भारतीय विदेश मंत्रालय से लेकर गृह मंत्रालय और इमीग्रेशन विभाग को धोखाधड़ी की भनक तक नहीं लगी। लेकिन फर्जी दस्तावेज कहां से बनवाए गए, इसकी सही से जांच हो तो कई आरोपियों की गर्दन फंसनी तय है।
इमीग्रेशन विभाग से बरेली पासपोर्ट कार्यालय में आई देवाशीष के पासपोर्ट की जांच से उसके बांग्लादेशी नागरिक होने का खुलासा हुआ है। लेकिन सिस्टम की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान खड़े हुए हैं। पुलिस और खुफिया जांच में पता चला कि देवाशीष 29 जुलाई 2012 से 28 अक्तूबर 2012 तक के वीजा पर कोलकाता आया था। इसके लिए उसने अपने बांग्लादेशी पासपोर्ट का प्रयोग किया था। इस पर उसका पता निवासी ग्राम वारी अली थाना व तहसील चौगासा जिला जसर, बांग्लादेश दर्ज था। वीजा अवधि समाप्त होने के बाद साल 2013 में रामपुर जिले की एक प्लाई फैक्टरी में आकर मजदूरी करने लगा। इस दौरान वह शाहबाद के मोहल्ला सादात में रहा।
कुछ समय बाद देवाशीष विश्वास ने अपना नाम बदलकर देवाशीष मंडल रख लिया और शाहबाद के इसी मोहल्ले के पते मकान संख्या 162, सादात शाहबाद से ही भारतीय पासपोर्ट, आधार कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस बनवा लिए। बैंक खाता भी खोल लिया। इसके बाद साल 2107 में देवाशीष बरेली जिले के सिरौली कस्बे में जाकर रहने लगा और वहां पर उसने अपना मकान बना लिया। वह सिरौली में ही बंगाली डॉक्टर बनकर झोलाछाप चिकित्सक के रूप में काम करने लगा।
सवाल यह उठता है कि बांग्लादेशी नागरिक को किस तरह तो पहले बिना पुलिस जांच पड़ताल के रामपुर में मजदूरी मिली और फिर दस्तावेज बनवाए। इन दस्तावेजों के बनवाने में फर्जीवाड़ा का खेला कहां से शुरू हुआ यह जांच का विषय है। अगर फर्जी दस्तावेज तैयार होने की शुरूआत का पता चलता है तो कई आरोपियों की गर्दन फंसना तय है।
ऐसे पकड़ में आया मामला
रामपुर। देवाशीष 23 अक्तूबर 2021 को सड़क मार्ग से बांग्लादेश जा रहा था। इस दौरान हरिदासपुर स्थित इंडियन कस्टम की चेकिंग पोस्ट पर जब उसके दस्तावेजों की जांच की गई तो कर्मियों को उसके पासपोर्ट पर शक हुआ। इसके बाद इमीग्रेशन विभाग की ओर से देवाशीष के भारतीय पासपोर्ट जिसका नंबर हृ3438697 है। उसे जांच के लिए बरेली पासपोर्ट कार्यालय भेजा गया। यहां से यह पासपोर्ट जांच के लिए रामपुर पुलिस और खुफिया एजेंसी के पास आया। इस जांच में देवाशीष का पासपोर्ट जिन दस्तावेजों के आधार पर बना था वह फर्जी ढंग से बनवाए गए पाए गए। साथ देवाशीष के बांग्लादेशी नागरिक होने और उसके पास से बरामद वीजा से बांग्लादेशी पासपोर्ट होने की भी बात सामने आई। जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। संवाद