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हालात : रामपुर के 45 साल के सियासी रण में आजम खां पहली बार चुनावी परिदृश्य से बाहर
Mon, 10 Jan 2022 02:07 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 10 Jan 2022 02:07 AM IST
सार
फरवरी 2020 से सीतापुर की जेल में आजम खां। मंडल में सपा के हैं 12 विधायक, रामपुर में दो।
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सपा नेता आजम खां।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
रामपुर के 45 साल के सियासी इतिहास में पहली बार आजम खां राजनीतिक परिदृश्य से बाहर हैं। 1977 के विधानसभा चुनाव से लेकर 2019 के लोकसभा चुनाव तक आजम खां ही जिले की सियासत का केंद्र बिंदु रहे हैं। इस विधानसभा चुनाव में पिछले लगभग 45 साल के इतिहास में यह पहला मौका है जब आजम की अब तक सक्रिय भूमिका नहीं है। आजम खां फरवरी 2020 से सीतापुर की जेल में बंद हैं।
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प्रदेश में विधानसभा चुनावों का बिगुल बज चुका है, ऐसे में देश की राजनीति में मुस्लिम चेहरे के रूप में पहचान रखने वाले आजम खां के सामने इस बार अपने सियासी गढ़ को बचाने की चुनौती होगी। वह सियासी गढ़ को कैसे बचाएंगे यह तो भविष्य ही बताएगा, लेकिन आजम पिछले लगभग 45 सालों से रामपुर के साथ-साथ मंडल में पार्टी की नैया पार लगाने की कमान संभालते आए हैं। फिलहाल, मुरादाबाद मंडल की 27 विधानसभा सीटों में से 12 पर सपा काबिज है। रामपुर की स्वार सीट पर पिछले चुनाव में सपा का प्रत्याशी जीता जरूर था, फिलहाल यह सीट खाली है।
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आजम खां ने 1977 से सक्रिय चुनावी राजनीति में भाग लेना शुरू किया था। पहली बार वो 1977 में रामपुर शहर सीट से विधानसभा का चुनाव लड़े थे और हार गए, तब उनकी उम्र लगभग 30 वर्ष थी। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा 1980 के बाद हुए विधानसभा के 10 चुनावों में से वह नौ बार जीते। विधानसभा के पिछले चुनाव में सपा ने रामपुर से तीन सीटों पर जीत हासिल की थी। आजम खां के पुत्र अब्दुल्ला आजम स्वार से निर्वाचित हुए थे। हालांकि, बाद में हाईकोर्ट ने एक चुनावी याचिका की सुनवाई के दौरान उनकी विधायकी रद्द कर दी थी। 2019 के लोकसभा चुनाव में आजम खां रामपुर संसदीय सीट से चुनाव लड़े और विजयी रहे। रामपुर विधानसभा सीट पर हुए उप चुनाव में आजम खां की पत्नी डॉ. तजीन फात्मा विजयी हुई थीं।
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एक सौ से अधिक मुकदमे दर्ज होने के बाद आजम खां फरवरी 2020 से अपने पुत्र अब्दुल्ला आजम के साथ सीतापुर की जेल में हैं। उनके साथ उनकी पत्नी डॉ. तजीन फात्मा भी जेल गई थीं। सभी मुकदमों में जमानत होने के बाद वो जेल से बाहर हैं। कोरोना संक्रमण के चलते जेल में मिलाई भी बंद हो गई है। अब सपा और आजम खां दोनों के सामने विधानसभा चुनावों में प्रचार से लेकर अपनी बात जनता के बीच तक पहुंचाने की चुनौती होगी। वहीं आजम खां से सपा पार्टी के प्रमुख नेता अन्य चुनावों की भांति आमने-सामने बैठकर भी रणनीति पर चर्चा या तैयारी नहीं कर सकेंगे।
रामपुर से विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं आजम
पिछले विधानसभा चुनाव में आजम खां रामपुर शहर सीट से चुनाव जीते थे। 2019 के लोकसभा चुनाव में रामपुर से सांसद का चुनाव जीतने के बाद उन्होंने विधायकी छोड़ दी थी। उनके इस्तीफे पर खाली हुई सीट पर उप चुनाव हुआ तो यहां से उनकी पत्नी डॉ. तजीन फात्मा चुनाव जीतीं। चुनाव का एलान होने के बाद उनके समर्थकों में इस बात की चर्चा है कि आजम खां रामपुर शहर सीट से विधानसभा का चुनाव लड़ सकते हैं। भले ही उनको जेल से ही चुनाव क्यों ना लड़ना पड़े। हालांकि, इसे लेकर अभी तक पार्टी की ओर से अधिकृत रूप से कोई एलान नहीं किया गया है। सपा के जिलाध्यक्ष वीरेंद्र गोयल का कहना है कि आजम खां के चाहने वालों की इच्छा है कि वो विधानसभा का चुनाव लड़ें। इस बारे में अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान और खुद आजम खां द्वारा लिया जाएगा।