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आक्रोशित किसानों ने किया कचहरी का घेराव, की नारेबाजी
Updated Tue, 10 Jul 2018 01:57 AM IST
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किसानों के जाम में फंसा जिलाधिकारी का काफिला।
- फोटो : अमर उजाला
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भारतीय किसान यूनियन से जुड़े किसानों ने सोमवार को प्रदर्शन कर किसानों की फसलों के दाम लागत में पचास फीसदी मुनाफा जोड़कर निर्धारित करने के समेत दस मांगों के निस्तारण का मुद्दा उठाया। किसान कलक्ट्रेट तक बैलगाड़ी और ट्रैक्टर ट्रालियों से पहुंचे। यहां गेट पर प्रदर्शन कर प्रशासन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन सौंपा।
प्रदेश भर में आंदोलन के तहत जिले भर के किसान सिविल लाइंस स्थित भारतीय किसान यूनियन के कार्यालय पर एकत्र हुए। किसान अपने साथ बैलगाड़ी और ट्रैक्टर ट्राली लेकर पहुंचे। यहां पर जिलाध्यक्ष हसीब अहमद ने कहा कि सरकार किसानों की समस्याओं की अनदेखी कर रही है।
जिस कारण किसानों की समस्याओं की सूची लगातार लंबी होती जा रही है। कहा कि हर साल औसतन 4 से 6 फीसदी किसान भूमिहर होकर मजदूरी कर रहे हैं। कहा कि सरकार को किसानों की फसल और दूध, सब्जी का न्यूनतम मूल्य लागत में पचास फीसदी मुनाफा जोड़कर तय करना होगा।
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सरकार ने जो हाल में खरीफ फसल का एमएसपी घोषित किया है वो किसानों को मंजूर नहीं। इसके बाद किसान बैलगाड़ियों से जुलूस की शक्ल में कलक्ट्रेट पहुंचे और गेट पर प्रदर्शन कर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। जिसमें सरकार से किसानों को ट्रैक्टर, डीजल पंप सेट आदि पर एनजीटी की दस साल की बाध्यता से छूट देने, किसान के आत्महत्या करने पर उसके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने, बकाया गन्ना भुगतान करने, सभी किसानों का पूर्ण कर्ज माफ करने, सिंचाई के लिए नई नहर बनाने और पुरानी नहरों की मरम्मत कर पानी छुड़वाने आदि के साथ दस मांगों के निस्तारण की मांग की।
ज्ञापन सौंपने वालों में शंखधार, विनोद यादव, अजय बाबू गंगवार, अमृतपाल सिंह, बलवीर सिंह, दरयाव सिंह, खुशीराम, फौजी बुद्धा, रंजीत यादव, इरफान, होरी लाल, अजीत सिंह, वीरेश शर्मा, रामपाल सिंह, प्रकाश सिंह, देवेंद्र गंगवार, मुनेंद्र सिंह, मेहंदी हसन, ब्रह्माशंकर पांडे, मुजीब कमाल, रनवीर यादव, सुनील कुमार सिंह, मुनीश गंगवार, हरपाल सिंह, पप्पू यादव रहे।
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प्रदेश भर में आंदोलन के तहत जिले भर के किसान सिविल लाइंस स्थित भारतीय किसान यूनियन के कार्यालय पर एकत्र हुए। किसान अपने साथ बैलगाड़ी और ट्रैक्टर ट्राली लेकर पहुंचे। यहां पर जिलाध्यक्ष हसीब अहमद ने कहा कि सरकार किसानों की समस्याओं की अनदेखी कर रही है।
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जिस कारण किसानों की समस्याओं की सूची लगातार लंबी होती जा रही है। कहा कि हर साल औसतन 4 से 6 फीसदी किसान भूमिहर होकर मजदूरी कर रहे हैं। कहा कि सरकार को किसानों की फसल और दूध, सब्जी का न्यूनतम मूल्य लागत में पचास फीसदी मुनाफा जोड़कर तय करना होगा।
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सरकार ने जो हाल में खरीफ फसल का एमएसपी घोषित किया है वो किसानों को मंजूर नहीं। इसके बाद किसान बैलगाड़ियों से जुलूस की शक्ल में कलक्ट्रेट पहुंचे और गेट पर प्रदर्शन कर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। जिसमें सरकार से किसानों को ट्रैक्टर, डीजल पंप सेट आदि पर एनजीटी की दस साल की बाध्यता से छूट देने, किसान के आत्महत्या करने पर उसके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने, बकाया गन्ना भुगतान करने, सभी किसानों का पूर्ण कर्ज माफ करने, सिंचाई के लिए नई नहर बनाने और पुरानी नहरों की मरम्मत कर पानी छुड़वाने आदि के साथ दस मांगों के निस्तारण की मांग की।
ज्ञापन सौंपने वालों में शंखधार, विनोद यादव, अजय बाबू गंगवार, अमृतपाल सिंह, बलवीर सिंह, दरयाव सिंह, खुशीराम, फौजी बुद्धा, रंजीत यादव, इरफान, होरी लाल, अजीत सिंह, वीरेश शर्मा, रामपाल सिंह, प्रकाश सिंह, देवेंद्र गंगवार, मुनेंद्र सिंह, मेहंदी हसन, ब्रह्माशंकर पांडे, मुजीब कमाल, रनवीर यादव, सुनील कुमार सिंह, मुनीश गंगवार, हरपाल सिंह, पप्पू यादव रहे।