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एनएचएआई ने बंद कर दी नहर, सात साल बाद सिंचाई विभाग ने नहर खुलवाई
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रामपुर। एनएचएआई (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) की ओर से साढे़ 7 साल पहले बंद की गई नहर रविवार को सिंचाई विभाग ने आखिरकार खुलवा ही दिया। जेसीबी से नहर की सफाई कराने के साथ ही स्लैब के नीचे के कंक्रीट ब्लॉक हटवाए गए। इससे अब नहर का पानी आगे जा सकेगा, जिससे क्षेत्र की करीब सात हजार कृषि भूमि की सिंचाई हो सकेगी।
एनएचएआई (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) ने वर्ष 2013 के मध्य से 2016 के अंत तक नैनीताल हाईवे चौड़ीकरण के कार्य किया था। तब एनएचएआई ने नहर में कंक्रीट ब्लॉक लगा दिए थे, जिसकी वजह से नहर बंद हो गई थी। ये ब्लॉक इसलिए लगाए गए थे, ताकि निर्माण कार्य में दिक्कत न हो। एनएचएआई ने 2016 के अंत तक हाईवे चौड़ीकरण का कार्य पूर्ण कर लिया था। लेकिन, एनएचएआई ने अपना काम करने के बाद कंक्रीट ब्लॉक ऐसे ही नहर में छोड़ दिए।
एनएचएआई अफसरों के साथ ही सिंचाई विभाग के अफसरों ने भी इस ओर से आंखें मूंद लीं। अफसरों की लापरवाही का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ा।
नहर से कंक्रीट के ब्लॉक न हटाने के कारण नहर का पानी आगे नहीं बढ़ सका और किसानों को निजी साधनों से सिंचाई करनी पड़ी। हैरत की बात ये है कि किसानों की लगातार मांग के बाद भी 5 साल साल तक नहर को चालू नहीं किया गया। लेकिन, अब सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता सियाराम के सामने जब यह मामला आया तो उन्होंने तकनीकी जांच कराई। इसके बाद रविवार को वे जेसीबी और स्टाफ के साथ नहर पर पहुंच गए।
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उन्होंने नहर की बेहतर सफाई कराने के साथ ही कंक्रीट ब्लॉक हटाकर नहर को खुलवाया। अब इस नहर के जरिए करीब सात हजार हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई हो सकेगी। उन्होंने बताया कि इस नहर का पानी भमरौआ होते हुए शहजादनगर तक जाता है, जिससे किसानों को काफी लाभ होगा।
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एनएचएआई (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) ने वर्ष 2013 के मध्य से 2016 के अंत तक नैनीताल हाईवे चौड़ीकरण के कार्य किया था। तब एनएचएआई ने नहर में कंक्रीट ब्लॉक लगा दिए थे, जिसकी वजह से नहर बंद हो गई थी। ये ब्लॉक इसलिए लगाए गए थे, ताकि निर्माण कार्य में दिक्कत न हो। एनएचएआई ने 2016 के अंत तक हाईवे चौड़ीकरण का कार्य पूर्ण कर लिया था। लेकिन, एनएचएआई ने अपना काम करने के बाद कंक्रीट ब्लॉक ऐसे ही नहर में छोड़ दिए।
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एनएचएआई अफसरों के साथ ही सिंचाई विभाग के अफसरों ने भी इस ओर से आंखें मूंद लीं। अफसरों की लापरवाही का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ा।
नहर से कंक्रीट के ब्लॉक न हटाने के कारण नहर का पानी आगे नहीं बढ़ सका और किसानों को निजी साधनों से सिंचाई करनी पड़ी। हैरत की बात ये है कि किसानों की लगातार मांग के बाद भी 5 साल साल तक नहर को चालू नहीं किया गया। लेकिन, अब सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता सियाराम के सामने जब यह मामला आया तो उन्होंने तकनीकी जांच कराई। इसके बाद रविवार को वे जेसीबी और स्टाफ के साथ नहर पर पहुंच गए।
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उन्होंने नहर की बेहतर सफाई कराने के साथ ही कंक्रीट ब्लॉक हटाकर नहर को खुलवाया। अब इस नहर के जरिए करीब सात हजार हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई हो सकेगी। उन्होंने बताया कि इस नहर का पानी भमरौआ होते हुए शहजादनगर तक जाता है, जिससे किसानों को काफी लाभ होगा।