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चुनाव आयोग के प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक दलों में हलचल तेज
सार
चुनाव आयोग ने यह प्रस्ताव रखा है कि राजनीतिक दलों को घोषणा पत्र में मुफ्त रेवडियों के वादे के साथ-साथ यह भी बताना होगा कि वे उनका खर्च कहां से और कैसे उठाएंगे।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी रेवड़ी संस्कृति के खिलाफ हैं।
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विस्तार
रामपुर। चुनाव आयोग ने यह प्रस्ताव रखा है कि राजनीतिक दलों को घोषणा पत्र में मुफ्त रेवडियों के वादे के साथ-साथ यह भी बताना होगा कि वे उनका खर्च कहां से और कैसे उठाएंगे। आयोग ने इसके लिए आचार संहिता में संशोधन का प्रस्ताव दिया है और राजनीतिक दलों से इस पर उनकी प्रतिक्रिया मांगी है। हालांकि इस प्रस्ताव पर कई विपक्षी दलों ने कड़े तेवर दिखाए हैं।
भाजपा ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया है। भाजपा के जिला महामंत्री अशोक विश्नोई का कहना है कि हमारी पार्टी इस संस्कृति के खिलाफ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी रेवड़ी संस्कृति के खिलाफ हैं। कई बार अक्सर होता है कि चुनावों के वक्त कई राजनीतिक दल जनता से झूठे वादे करके सत्ता में आ जाते हैं, लेकिन इसको पूरा नहीं कर पाते हैं। अगर उनको यह बताना पड़ेगा कि अपने वादे को वो कहां से पूरा करेंगे तो वो जनता से झूठे वादे नहीं कर पाएंगे। कई बार इस तरह के वादों का सरकारी खजाने पर असर पड़ता है, जिसका अर्थव्यवस्था पर दूरगामी असर पड़ता है।कांग्रेस के जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र देव गुप्ता का कहना है कि हमारी पार्टी रेवड़ी संस्कृति के खिलाफ है, लेकिन कहीं यह प्रस्ताव सत्ताधारी पार्टी को लाभ पहुंचाने के लिए तो नहीं लाया जा रहा है। इस बारे में अधिकृत टिप्पणी हमारी पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा। जहां तक मेरी व्यक्तिगत राय सवाल है तो इससे चुनाव आयोग का कोई लेना देना नहीं होना चाहिए। यह राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के भावना के खिलाफ है। यह भारत के लोकतंत्र को कमजोर कर सकता है।
बसपा के जिला महामंत्री राजेश प्रकाश सैनी का कहना है कि चुनाव आयोग का प्रस्ताव तो ठीक है, लेकिन संशय इस बात को लेकर है कि कहीं इसका मकसद केंद्र में सत्ताधारी दल को लाभ पहुंचाना तो नहीं है। क्योंकि कुछ दिन पहले जिस बात को प्रधानमंत्री ने कहा था, अब चुनाव आयोग उसका प्रस्ताव लेकर आया है। चुनाव आयोग के ऐसा कुछ नहीं करना चाहिए जिससे उसकी विश्वसनीयता कम हो।
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आम आदमी पार्टी (आप) के प्रदेश प्रवक्ता फैसल खां लाला का कहना है कि जनता के टैक्स के पैसे से जनता को मुफ़्त सुवधाएं देना हर राजनीतिक पार्टी की जिम्मेदारी होती है। जो पार्टियां अपने घोषणा पत्र में किये गए वादों को पूरा न करें उनकी मान्यता ख़त्म कर देना चाहिए। यदि भ्रष्टाचार पर पूरी तरह से रोक लग जाए तो जनता से किए वादों को पूरा किया जा सकता है और सरकारी ख़जाने पर भी इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नही पड़ेगा।
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भाजपा ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया है। भाजपा के जिला महामंत्री अशोक विश्नोई का कहना है कि हमारी पार्टी इस संस्कृति के खिलाफ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी रेवड़ी संस्कृति के खिलाफ हैं। कई बार अक्सर होता है कि चुनावों के वक्त कई राजनीतिक दल जनता से झूठे वादे करके सत्ता में आ जाते हैं, लेकिन इसको पूरा नहीं कर पाते हैं। अगर उनको यह बताना पड़ेगा कि अपने वादे को वो कहां से पूरा करेंगे तो वो जनता से झूठे वादे नहीं कर पाएंगे। कई बार इस तरह के वादों का सरकारी खजाने पर असर पड़ता है, जिसका अर्थव्यवस्था पर दूरगामी असर पड़ता है।कांग्रेस के जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र देव गुप्ता का कहना है कि हमारी पार्टी रेवड़ी संस्कृति के खिलाफ है, लेकिन कहीं यह प्रस्ताव सत्ताधारी पार्टी को लाभ पहुंचाने के लिए तो नहीं लाया जा रहा है। इस बारे में अधिकृत टिप्पणी हमारी पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा। जहां तक मेरी व्यक्तिगत राय सवाल है तो इससे चुनाव आयोग का कोई लेना देना नहीं होना चाहिए। यह राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के भावना के खिलाफ है। यह भारत के लोकतंत्र को कमजोर कर सकता है।
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बसपा के जिला महामंत्री राजेश प्रकाश सैनी का कहना है कि चुनाव आयोग का प्रस्ताव तो ठीक है, लेकिन संशय इस बात को लेकर है कि कहीं इसका मकसद केंद्र में सत्ताधारी दल को लाभ पहुंचाना तो नहीं है। क्योंकि कुछ दिन पहले जिस बात को प्रधानमंत्री ने कहा था, अब चुनाव आयोग उसका प्रस्ताव लेकर आया है। चुनाव आयोग के ऐसा कुछ नहीं करना चाहिए जिससे उसकी विश्वसनीयता कम हो।
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आम आदमी पार्टी (आप) के प्रदेश प्रवक्ता फैसल खां लाला का कहना है कि जनता के टैक्स के पैसे से जनता को मुफ़्त सुवधाएं देना हर राजनीतिक पार्टी की जिम्मेदारी होती है। जो पार्टियां अपने घोषणा पत्र में किये गए वादों को पूरा न करें उनकी मान्यता ख़त्म कर देना चाहिए। यदि भ्रष्टाचार पर पूरी तरह से रोक लग जाए तो जनता से किए वादों को पूरा किया जा सकता है और सरकारी ख़जाने पर भी इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नही पड़ेगा।