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Rampur News: आबादी की जमीन को कृषि भूमि दर्शाकर रजिस्ट्री कराने की जांच शुरू
Thu, 10 Sep 2026 01:29 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
Updated Thu, 10 Sep 2026 01:29 AM IST
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भोट। थाना क्षेत्र के पेमपुर मजरा हिम्मतनगर गांव में आबादी की जमीन को कृषि भूमि दर्शाकर रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज कराए जाने के आरोपों की जांच शुरू हो गई है। ग्रामीणों की शिकायत पर अधिकारियों के आदेश के बाद बुधवार को रजिस्ट्रार कार्यालय की टीम गांव पहुंची। टीम ने गांव की आबादी और अभिलेखों में दर्ज जमीनों की रजिस्ट्री से संबंधित जानकारी जुटाई और ग्रामीणों से आवश्यक जानकारी ली।
सोमवार को हिम्मतनगर गांव के ग्रामीणों ने जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर शिकायत की थी। ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि गांव में आबादी की जमीन, मकान, विद्यालय, मस्जिद और कब्रिस्तान आदि होने के बावजूद कुछ लोगों ने कथित रूप से राजस्व कर्मचारियों से मिलीभगत कर जमीन को अभिलेखों में कृषि भूमि दर्शाकर उसकी रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज करा लिया है।
यह भी आरोप था कि जमीन खरीदने वाले लोग पूर्व में खरीदी गई जमीन को दोबारा खरीदने का दबाव बना रहे हैं। ऐसा नहीं करने पर बस्ती में बने मकानों को ध्वस्त कराने की धमकी दे रहे हैं।
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ग्रामीणों ने जमीन की खरीद-फरोख्त, रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज की जांच कराने के साथ ही मौके का स्थलीय निरीक्षण कर करीब 30 वर्ष पुरानी आबादी की वास्तविक स्थिति राजस्व अभिलेखों में दर्ज कराने की मांग की थी। इसके अलावा रजिस्ट्री के दौरान आबादी और निर्माणों को छिपाकर स्टांप शुल्क या राजस्व में अनियमितता किए जाने के आरोपों की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की गई थी।
निबंधन सहायक पुनीत श्रीवास्तव ने बताया कि आईजीआरएस पोर्टल पर एक शिकायत आई थी। अधिकारियों के आदेश पर बुधवार को रजिस्ट्रार कार्यालय की टीम गांव पहुंची और मौके की स्थिति तथा संबंधित अभिलेखों की जानकारी जुटाई है।
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सोमवार को हिम्मतनगर गांव के ग्रामीणों ने जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर शिकायत की थी। ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि गांव में आबादी की जमीन, मकान, विद्यालय, मस्जिद और कब्रिस्तान आदि होने के बावजूद कुछ लोगों ने कथित रूप से राजस्व कर्मचारियों से मिलीभगत कर जमीन को अभिलेखों में कृषि भूमि दर्शाकर उसकी रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज करा लिया है।
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यह भी आरोप था कि जमीन खरीदने वाले लोग पूर्व में खरीदी गई जमीन को दोबारा खरीदने का दबाव बना रहे हैं। ऐसा नहीं करने पर बस्ती में बने मकानों को ध्वस्त कराने की धमकी दे रहे हैं।
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ग्रामीणों ने जमीन की खरीद-फरोख्त, रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज की जांच कराने के साथ ही मौके का स्थलीय निरीक्षण कर करीब 30 वर्ष पुरानी आबादी की वास्तविक स्थिति राजस्व अभिलेखों में दर्ज कराने की मांग की थी। इसके अलावा रजिस्ट्री के दौरान आबादी और निर्माणों को छिपाकर स्टांप शुल्क या राजस्व में अनियमितता किए जाने के आरोपों की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की गई थी।
निबंधन सहायक पुनीत श्रीवास्तव ने बताया कि आईजीआरएस पोर्टल पर एक शिकायत आई थी। अधिकारियों के आदेश पर बुधवार को रजिस्ट्रार कार्यालय की टीम गांव पहुंची और मौके की स्थिति तथा संबंधित अभिलेखों की जानकारी जुटाई है।