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दुष्कर्म के मामले में पूर्व गंज थाना प्रभारी को कोर्ट से झटका, अग्रिम जमानत याचिका खारिज
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रामपुर। सामूहिक दुष्कर्म के मामले में पूर्व गंज थाना प्रभारी समेत चार आरोपियों को कोर्ट ने झटका दिया है। कोर्ट ने इस मामले में सभी आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है।
सिविल लाइंस थाना क्षेत्र निवासी एक महिला ने गंज थाने में प्रभारी के पद पर तैनात रहे रामवीर सिंह समेत चार लोगों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म और मारपीट के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। महिला का आरोप था कि वह एक निजी अस्पताल में काम करती थी। पांच अप्रैल की शाम को अस्पताल के संचालक अपने दोस्त और घटना के वक्त गंज थाना प्रभारी रामवीर सिंह के साथ अस्पताल पहुंचे थे। यहां पर आरोपियों ने महिला के साथ मारपीट की और दुष्कर्म किया था। इसके बाद जबरन कागज पर हस्ताक्षर करा लिए थे। आरोप है कि दो लोगों को महिला की हत्या करने के लिए बुला लिया था। वह महिला की हत्या करने के लिए कार में डालकर ले जा रहे थे। इस बीच डॉयल 100 की गाड़ी पहुंच गई थी तो आरोपी उसे छोड़कर फरार हो गए थे।
पीड़ित ने पुलिस पर मामले के आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई न करने और साक्ष्य मिटाने तक का आरोप लगाया था। मामले में पुलिस ने पूर्व गंज थाना प्रभारी रामवीर सिंह, निजी अस्पताल संचालक विनोद कुमार यादव, मनोज और विजय सक्सेना के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 डी (सामूहिक दुष्कर्म), 323 (मारपीट करना), 326 (अंग भंग करना), 504 (गाली-गलौज करना), 406 (अमानत में खयानत करना) के आरोप में रिपोर्ट दर्ज की थी। इसके बाद कोर्ट ने पिछली तारीख पर आरोपियों की 15 दिसंबर तक अंतरिम जमानत मंजूर की थी।
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बुधवार को इस मामले में जिला जज गौरव कुमार श्रीवास्तव की कोर्ट में सुनवाई हुई। शासकीय अधिवक्ता अरुण प्रकाश सक्सेना ने बताया कि कोर्ट में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से दलील दी गई कि आरोपियों द्वारा महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया था। यह घटना जघन्य अपराध की श्रेणी में आती है। ऐसे में जब एक आरोपी गंज थाने का पुलिस इंस्पेक्टर रहा हो तो आशंका है कि उसके द्वारा वादी मुकदमा और उसके गवाहों को धमकाया जाएगा। साथ ही मुकदमे को प्रभावित किया जा सकता है। वहीं सह अभियुक्त भी काफी प्रभावशाली हैं। ऐसे में आरोपियों की जमानत मंजूर न की जाए। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि आरोपियों को झूठा फंसाया गया है। उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं हैं। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने पूर्व गंज थाना प्रभारी रामवीर सिंह समेत चारों आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है।
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सिविल लाइंस थाना क्षेत्र निवासी एक महिला ने गंज थाने में प्रभारी के पद पर तैनात रहे रामवीर सिंह समेत चार लोगों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म और मारपीट के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। महिला का आरोप था कि वह एक निजी अस्पताल में काम करती थी। पांच अप्रैल की शाम को अस्पताल के संचालक अपने दोस्त और घटना के वक्त गंज थाना प्रभारी रामवीर सिंह के साथ अस्पताल पहुंचे थे। यहां पर आरोपियों ने महिला के साथ मारपीट की और दुष्कर्म किया था। इसके बाद जबरन कागज पर हस्ताक्षर करा लिए थे। आरोप है कि दो लोगों को महिला की हत्या करने के लिए बुला लिया था। वह महिला की हत्या करने के लिए कार में डालकर ले जा रहे थे। इस बीच डॉयल 100 की गाड़ी पहुंच गई थी तो आरोपी उसे छोड़कर फरार हो गए थे।
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पीड़ित ने पुलिस पर मामले के आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई न करने और साक्ष्य मिटाने तक का आरोप लगाया था। मामले में पुलिस ने पूर्व गंज थाना प्रभारी रामवीर सिंह, निजी अस्पताल संचालक विनोद कुमार यादव, मनोज और विजय सक्सेना के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 डी (सामूहिक दुष्कर्म), 323 (मारपीट करना), 326 (अंग भंग करना), 504 (गाली-गलौज करना), 406 (अमानत में खयानत करना) के आरोप में रिपोर्ट दर्ज की थी। इसके बाद कोर्ट ने पिछली तारीख पर आरोपियों की 15 दिसंबर तक अंतरिम जमानत मंजूर की थी।
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बुधवार को इस मामले में जिला जज गौरव कुमार श्रीवास्तव की कोर्ट में सुनवाई हुई। शासकीय अधिवक्ता अरुण प्रकाश सक्सेना ने बताया कि कोर्ट में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से दलील दी गई कि आरोपियों द्वारा महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया था। यह घटना जघन्य अपराध की श्रेणी में आती है। ऐसे में जब एक आरोपी गंज थाने का पुलिस इंस्पेक्टर रहा हो तो आशंका है कि उसके द्वारा वादी मुकदमा और उसके गवाहों को धमकाया जाएगा। साथ ही मुकदमे को प्रभावित किया जा सकता है। वहीं सह अभियुक्त भी काफी प्रभावशाली हैं। ऐसे में आरोपियों की जमानत मंजूर न की जाए। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि आरोपियों को झूठा फंसाया गया है। उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं हैं। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने पूर्व गंज थाना प्रभारी रामवीर सिंह समेत चारों आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है।