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खुले में शौच मुक्त मुहिम ने दिखाया रंग, साठ हजार ने खुद बनाए शौचालय
Updated Tue, 25 Sep 2018 12:11 AM IST
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रामपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता मिशन के तहत खुले में शौच मुक्त अभियान अब लोगों की सोच बनता जा रहा है। यही वजह है कि जिले में सरकारी मदद के बिना करीब साठ हजार लोगों ने अपने घरों में शौचालय बना लिए। वहीं स्वच्छ भारत मिशन के तहत भी जिले में करीब डेढ़ लाख शौचालयों का निर्माण हो चुका है।
जिले को गांधी जयंती यानि दो अक्तूबर को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) घोषित करने की तैयारी की जा रही है। बेसलाइन के तहत ब्लॉकवार शौचालय बनने के बाद शेष शौचालयों को आवश्यकतानुसार शिफ्ट किया जा रहा है। जिससे कोई भी पात्र शौचालय से वंचित न रह सके। आज से करीब पांच साल पहले जब स्वच्छता मिशन के तहत खुले में शौच मुक्त गांव-शहरों के लिए कोशिश शुरू की गई थी तब इसकी राह आसान नहीं थी। किसी ने सरकारी मदद तो किसी ने अन्य वजहों से शुरू में इस योजना में हिस्सेेदारी की लेकिन, समय के साथ जैस-जैसे लोगों में जागरूकता बढ़ी वो किसी मदद के बिना स्वयं खुले में शौच मुक्त होने की ओर अग्रसर हो गए। जिले में साल 2013-14 से मौजूदा वित्तीय वर्ष 2018-19 तक 59909 शौचालय लोगों ने स्वयं बनाए हैं, इन शौचालय निर्माण के लिए सरकार से मदद नहीं ली गई है। हालांकि शुरुआत के बाद दूसरे और तीसरे वित्तीय वर्ष यानि साल 2014-15 में महज 398 और 2015-16 में महज 497 शौचालय ही स्वेच्छा से बनाए गए। लेकिन, इसके बाद इनकी संख्या लगातार बढ़ती गई।
वित्तीय वर्ष वार स्वेच्छा से निर्मित शौचालयों की संख्या
वित्तीय वर्ष-शौचालयों की संख्या
2013-14-1039
2014-15-398
2015-16-97
2016-17-226
2017-18-20751
2018-19-31998 (सितंबर माह की शुरुआत तक)
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गांधी जयंती तक पूरा जिला खुले में शौच मुक्त किए जाने के लिए कार्य किया जा रहा है। जिले में करीब साठ हजार लोगों ने स्वेच्छा से भी शौचालय बनाए हैं, जो अन्य लोगों के लिए प्रेरणा है। -डा. शरनजीत कौर, जिला पंचायत राज अधिकारी
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जिले को गांधी जयंती यानि दो अक्तूबर को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) घोषित करने की तैयारी की जा रही है। बेसलाइन के तहत ब्लॉकवार शौचालय बनने के बाद शेष शौचालयों को आवश्यकतानुसार शिफ्ट किया जा रहा है। जिससे कोई भी पात्र शौचालय से वंचित न रह सके। आज से करीब पांच साल पहले जब स्वच्छता मिशन के तहत खुले में शौच मुक्त गांव-शहरों के लिए कोशिश शुरू की गई थी तब इसकी राह आसान नहीं थी। किसी ने सरकारी मदद तो किसी ने अन्य वजहों से शुरू में इस योजना में हिस्सेेदारी की लेकिन, समय के साथ जैस-जैसे लोगों में जागरूकता बढ़ी वो किसी मदद के बिना स्वयं खुले में शौच मुक्त होने की ओर अग्रसर हो गए। जिले में साल 2013-14 से मौजूदा वित्तीय वर्ष 2018-19 तक 59909 शौचालय लोगों ने स्वयं बनाए हैं, इन शौचालय निर्माण के लिए सरकार से मदद नहीं ली गई है। हालांकि शुरुआत के बाद दूसरे और तीसरे वित्तीय वर्ष यानि साल 2014-15 में महज 398 और 2015-16 में महज 497 शौचालय ही स्वेच्छा से बनाए गए। लेकिन, इसके बाद इनकी संख्या लगातार बढ़ती गई।
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वित्तीय वर्ष वार स्वेच्छा से निर्मित शौचालयों की संख्या
वित्तीय वर्ष-शौचालयों की संख्या
2013-14-1039
2014-15-398
2015-16-97
2016-17-226
2017-18-20751
2018-19-31998 (सितंबर माह की शुरुआत तक)
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गांधी जयंती तक पूरा जिला खुले में शौच मुक्त किए जाने के लिए कार्य किया जा रहा है। जिले में करीब साठ हजार लोगों ने स्वेच्छा से भी शौचालय बनाए हैं, जो अन्य लोगों के लिए प्रेरणा है। -डा. शरनजीत कौर, जिला पंचायत राज अधिकारी
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