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कांग्रेस और बसपा समेत जिले के 34 प्रत्याशियों की जमानत राशि जब्त
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रामपुर। कांग्रेस और बसपा समेत जिले में 34 प्रत्याशी ऐसे हैं, जो अपनी जमानत राशि तक नहीं बचा सके। जमानत राशि बचाने के लिए प्रत्याशी को कुल विधिमन्य वोटों के छठवें हिस्से से अधिक वोट प्राप्त करने होते हैं, लेकिन सपा और भाजपा के अलावा किसी भी प्रत्याशी को इतने वोट नहीं मिल सके।
विधानसभा चुनाव के तहत रामपुर में दूसरे चरण में 14 फरवरी को मतदान हुआ था। जिसकी मतगणना गुरुवार 10 मार्च को हुई। जिसमें जिले की तीन सीटों पर फिर से सपा काबिज हो गई, जबकि दो सीटों पर भाजपा की जीत हुई। रामपुर विधानसभा सीट से सपा के आजम खां की बंपर जीत हुई, जबकि स्वार सीट से उनके पुत्र अब्दुल्ला आजम विजयी रहे। वहीं, चमरौआ सीट से सपा के नसीर अहमद खां दूसरी बार विधायक बने, तो मिलक सुरक्षित सीट से भाजपा की राजबाला और बिलासपुर से भाजपा के बलदेव सिंह औलख अपनी सीट बचाने में सफल रहे। इन पांचों सीटों में मुकाबला सिर्फ सपा और भाजपा के बीच ही रहा। लिहाजा, दोनों ही पार्टियों को भरपूर वोट मिले और इन पार्टियों के प्रत्याशी अपनी जमानत राशि बचाने में सफल रहे। लेकिन, कांग्रेस और बसपा के प्रत्याशियों समेत पांचों सीटों पर उतरे 34 प्रत्याशी अपनी जमानत राशि बचाने में नाकाम रहे। यानी जिले में कुल 44 प्रत्याशियों में से दस प्रत्याशी ही अपनी जमानत राशि बचा सके जबकि 34 की जमानत राशि जब्त हो गई। दरअसल, जमानत राशि बचाने के लिए प्रत्याशी को मतगणना में विधिमन्य वोटों का छठवां हिस्सा प्राप्त करना होता है, लेकिन सपा और भाजपा के अलावा किसी भी दल के प्रत्याशी को इतने वोट नहीं मिल सके। लिहाजा, सभी की जमानत राशि जब्त हो गई।
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विधानसभा चुनाव के तहत रामपुर में दूसरे चरण में 14 फरवरी को मतदान हुआ था। जिसकी मतगणना गुरुवार 10 मार्च को हुई। जिसमें जिले की तीन सीटों पर फिर से सपा काबिज हो गई, जबकि दो सीटों पर भाजपा की जीत हुई। रामपुर विधानसभा सीट से सपा के आजम खां की बंपर जीत हुई, जबकि स्वार सीट से उनके पुत्र अब्दुल्ला आजम विजयी रहे। वहीं, चमरौआ सीट से सपा के नसीर अहमद खां दूसरी बार विधायक बने, तो मिलक सुरक्षित सीट से भाजपा की राजबाला और बिलासपुर से भाजपा के बलदेव सिंह औलख अपनी सीट बचाने में सफल रहे। इन पांचों सीटों में मुकाबला सिर्फ सपा और भाजपा के बीच ही रहा। लिहाजा, दोनों ही पार्टियों को भरपूर वोट मिले और इन पार्टियों के प्रत्याशी अपनी जमानत राशि बचाने में सफल रहे। लेकिन, कांग्रेस और बसपा के प्रत्याशियों समेत पांचों सीटों पर उतरे 34 प्रत्याशी अपनी जमानत राशि बचाने में नाकाम रहे। यानी जिले में कुल 44 प्रत्याशियों में से दस प्रत्याशी ही अपनी जमानत राशि बचा सके जबकि 34 की जमानत राशि जब्त हो गई। दरअसल, जमानत राशि बचाने के लिए प्रत्याशी को मतगणना में विधिमन्य वोटों का छठवां हिस्सा प्राप्त करना होता है, लेकिन सपा और भाजपा के अलावा किसी भी दल के प्रत्याशी को इतने वोट नहीं मिल सके। लिहाजा, सभी की जमानत राशि जब्त हो गई।
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