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वजन सप्ताह के दौरान 17984 बच्चे कुपोषित चिन्हित
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रामपुर। आंगनबाड़ी केंद्रों पर आयोजित किए गए वजन सप्ताह के दौरान 229723 बच्चों का वजन लिया गया, जिनमें 202672 बच्चे मानक के अनुरूप स्वस्थ पाए गए। वहीं, उम्र के अनुसार वजन के मानक के अंतर्गत 17984 बच्चे कुपोषित और 5952 अति कुपोषित मिले। लंबाई के अनुसार वजन के लिए निर्धारित मानक के तहत 1108 गंभीर अति कुपोषित (सैम) तथा 4427 मध्यम अतिकुपोषित (मैम) बच्चे चिह्नित किए गए।
जिला कार्यक्रम अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी के नेतृत्व में जनपद में वजन सप्ताह के अंतर्गत कुपोषित बच्चों को चिन्हित कर लिया गया है। गंभीर अति कुपोषित बच्चों के उपचार के लिए जिला अस्पताल में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र में बच्चों को भर्ती कराने के लिए उनके अभिभावकों को प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि बच्चे गंभीर अतिकुपोषण की श्रेणी से बाहर निकल सकें तथा उनका बेहतर स्वास्थ्य के साथ शारीरिक और मानसिक विकास संभव हो सकें। उन्होंने बताया कि एक्यूट मैलन्यूट्रीशन एक जन स्वास्थ्य समस्या है और इसके उपचार के लिए स्वास्थ्य एवं पोषण की विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। सैम बच्चों में मृत्यु की सम्भावना सामान्य बच्चों की तुलना में नौ गुना अधिक होती है। सभी सैम व मैम बच्चों को गहन देखभाल की आवश्यकता होती है, जिससे कि वह इससे बाहर निकल सकें। चिकित्सीय जटिलता से ग्रसित गंभीर तीव्र कुपोषित (सैम) बच्चों की देखभाल के लिए जनपद स्तर पर सरकारी अस्पताल में पोषण पुनर्वास केंद्र को संचालित किया जा रहा है। अब एक जुलाई से दो अक्तूबर के मध्य सैम, मैम व गंभीर अल्पवजन बच्चों के लिए सघन अभियान ‘‘संभव पोषण संवर्धन की ओर एक कदम’’ के रूप में आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। माह सितम्बर में पोषण माह का आयोजन होगा तथा 20-25 सितम्बर के मध्य वजन सप्ताह का पुन: आयोजन करते हुए किए गए प्रयासों की समीक्षा की जाएगी। संभव अभियान के प्रभावी कियान्वयन के लिए जिले के जन-प्रतिनिधियों एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के नेतृत्व में शुभारंभ कराया जाएगा।
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जिला कार्यक्रम अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी के नेतृत्व में जनपद में वजन सप्ताह के अंतर्गत कुपोषित बच्चों को चिन्हित कर लिया गया है। गंभीर अति कुपोषित बच्चों के उपचार के लिए जिला अस्पताल में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र में बच्चों को भर्ती कराने के लिए उनके अभिभावकों को प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि बच्चे गंभीर अतिकुपोषण की श्रेणी से बाहर निकल सकें तथा उनका बेहतर स्वास्थ्य के साथ शारीरिक और मानसिक विकास संभव हो सकें। उन्होंने बताया कि एक्यूट मैलन्यूट्रीशन एक जन स्वास्थ्य समस्या है और इसके उपचार के लिए स्वास्थ्य एवं पोषण की विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। सैम बच्चों में मृत्यु की सम्भावना सामान्य बच्चों की तुलना में नौ गुना अधिक होती है। सभी सैम व मैम बच्चों को गहन देखभाल की आवश्यकता होती है, जिससे कि वह इससे बाहर निकल सकें। चिकित्सीय जटिलता से ग्रसित गंभीर तीव्र कुपोषित (सैम) बच्चों की देखभाल के लिए जनपद स्तर पर सरकारी अस्पताल में पोषण पुनर्वास केंद्र को संचालित किया जा रहा है। अब एक जुलाई से दो अक्तूबर के मध्य सैम, मैम व गंभीर अल्पवजन बच्चों के लिए सघन अभियान ‘‘संभव पोषण संवर्धन की ओर एक कदम’’ के रूप में आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। माह सितम्बर में पोषण माह का आयोजन होगा तथा 20-25 सितम्बर के मध्य वजन सप्ताह का पुन: आयोजन करते हुए किए गए प्रयासों की समीक्षा की जाएगी। संभव अभियान के प्रभावी कियान्वयन के लिए जिले के जन-प्रतिनिधियों एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के नेतृत्व में शुभारंभ कराया जाएगा।
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