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परीक्षा नहीं प्रतीक्षा से मिलते हैं भगवान: शंभूनाथ जी महाराज
Updated Sun, 12 Aug 2018 12:46 AM IST
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रामपुर। श्री रामकथा महोत्सव में कथा व्यास ने अहिल्या और शबरी के उद्दार प्रसंगों का वर्णन किया। कहा कि भगवान परीक्षा से नहीं अपितु प्रतीक्षा से प्राप्त होते हैं।
दत्तराम शिवालय में चल रहे श्रीराम कथा महोत्सव के दूसरे दिन काशी से पधारे कथा व्यास पंडित शंभूनाथ महाराज ने कहा कि भगवान परीक्षा से नहीं प्रतीक्षा से मिलते हैं। भक्त शिरोमणि शबरी ने जीवन भर प्रभु के आने की प्रतीक्षा की और जीवन के अंतिम समय में प्रभु राम ने स्वयं उन्हें अपने दर्शन देकर परमधाम प्रदान किया। गौतम ऋषि की नारी अहिल्या का भी प्रतीक्षा करने पर ही उद्धार हुआ। सती और सूर्पनखा ने भगवान की परीक्षा ली जिसके परिणाम में एक को भगवान शंकर का बिरह मिला तो दूसरी को अपनी दुर्गति के साथ-साथ पूरी कुटुंब का नाश मिला। उन्होंने कहा कि राम कथा जीवन जीने की कला सिखाती है और मोक्ष का मार्ग दिखाती है। भगवान राम ने ब्राह्मण, गाय, संत-महात्मा और देवताओं के कल्याण के लिए मानव रूप में अवतार लिया और दुखी मानवता का उद्धार किया। कलियुग में राम का नाम भवसागर से पार कराने वाली नौका है। हमें सच्चे मन से प्रभु की उपासना करनी चाहिए। कथा के आरंभ में आशीष गोयल ने सपत्नीक श्री रामचरितमानस का पूजन- वंदन किया। महाआरती के पश्चात प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर मुनीश चंद्र शर्मा, सौरभ पाठक, दीपक शर्मा, रामबाबू शर्मा, अभिषेक शर्मा, प्रदीप अग्रवाल, अमूल सक्सेना, श्याम कृष्ण शर्मा, सुधा शर्मा, मंजू शर्मा, मीनाक्षी शर्मा, संजय पाठक, अंबर वशिष्ठ आदि मौजूद रहे।
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दत्तराम शिवालय में चल रहे श्रीराम कथा महोत्सव के दूसरे दिन काशी से पधारे कथा व्यास पंडित शंभूनाथ महाराज ने कहा कि भगवान परीक्षा से नहीं प्रतीक्षा से मिलते हैं। भक्त शिरोमणि शबरी ने जीवन भर प्रभु के आने की प्रतीक्षा की और जीवन के अंतिम समय में प्रभु राम ने स्वयं उन्हें अपने दर्शन देकर परमधाम प्रदान किया। गौतम ऋषि की नारी अहिल्या का भी प्रतीक्षा करने पर ही उद्धार हुआ। सती और सूर्पनखा ने भगवान की परीक्षा ली जिसके परिणाम में एक को भगवान शंकर का बिरह मिला तो दूसरी को अपनी दुर्गति के साथ-साथ पूरी कुटुंब का नाश मिला। उन्होंने कहा कि राम कथा जीवन जीने की कला सिखाती है और मोक्ष का मार्ग दिखाती है। भगवान राम ने ब्राह्मण, गाय, संत-महात्मा और देवताओं के कल्याण के लिए मानव रूप में अवतार लिया और दुखी मानवता का उद्धार किया। कलियुग में राम का नाम भवसागर से पार कराने वाली नौका है। हमें सच्चे मन से प्रभु की उपासना करनी चाहिए। कथा के आरंभ में आशीष गोयल ने सपत्नीक श्री रामचरितमानस का पूजन- वंदन किया। महाआरती के पश्चात प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर मुनीश चंद्र शर्मा, सौरभ पाठक, दीपक शर्मा, रामबाबू शर्मा, अभिषेक शर्मा, प्रदीप अग्रवाल, अमूल सक्सेना, श्याम कृष्ण शर्मा, सुधा शर्मा, मंजू शर्मा, मीनाक्षी शर्मा, संजय पाठक, अंबर वशिष्ठ आदि मौजूद रहे।
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