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लर्निंग लाइसेंस बनाने में लिए जाते 1500 रुपये

Mon, 19 Sep 2016 11:55 PM IST
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूराे
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूराे Updated Mon, 19 Sep 2016 11:55 PM IST
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Learning  license illegal fee of Rs 1,500
ड्राइविंग लाइसेंस - फोटो : getty images
जिले में बिना सुविधा शुल्क के लाइसेंस बनाना आसान नहीं है। अभी हाल में ही नवागत डीएम अनुज कुमार झा की चेकिंग में वसूली की बात सामने आई थी। उन्होंने व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए थे, लेकिन परिवहन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत के चलते दलालों पर शिकंजा नहीं कस पाया है। 
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मौजूदा समय में एआरटीओ कार्यालय में हर दिन 100 लर्निंग और 50 परमानेंट लाइसेंस बनाए जा रहे हैं। जानकार बताते हैं कि लर्निंग और परमानेंट लाइसेंस बनाने की सरकारी फीस बहुत कम है, लेकिन यह व्यवस्था दलालों के हवाले है। लर्निंग लाइसेंस बनाने में एक हजार से 1500 रुपये लिए जाते हैं।

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वहीं परमानेंट लाइसेंस में दो हजार से 2500 रुपये लिए जा रहे हैं। अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से लाइसेंस बनाने का यह खेल अरसे से चल रहा है, लेकिन इस पर रोक नहीं लग पा रही है। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यदि यहां पर छापेमारी की जाए तो लाइसेंस बनाने के गोरखधंधे पकड़ में आ सकता है।

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प्रदेश में एक अक्तूबर से ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) ऑनलाइन बनेंगे। इसके लिए परिवहन आयुक्त के रवींद्र नायक ने सभी जिलों के संभागीय परिवहन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। हालांकि इसका कोई आदेश अभी यहां नहीं पहुंचा है।

 

एआरटीओ कार्यालय रायबरेली में पहले लाइसेंस बनवाने पर लोगों को लिखित परीक्षा देनी पड़ती थी। इस व्यवस्था में बदलाव किया गया है। अब कंप्यूटर के समक्ष परीक्षा देनी पड़ती है। इसके बाद भी लाइसेंस बन पाता है। इस व्यवस्था के लिए कंप्यूटर की व्यवस्था कराई गई है। पर ऑनलाइन व्यवस्था के लिए कोई आदेश नहीं आया है।

जहानाबाद निवासी परवेज, बस स्टेशन निवासी शिव प्रसाद, मलिकमऊ निवासी प्रशांत मिश्रा और दीप चौधरी का कहना है कि यदि डीएल बनाने की ऑनलाइन व्यवस्था अच्छी है। इससे भागदौड़ कम होगी। कहते हैं कि मौजूदा समय में लाइसेंस बनाने मेें दिक्कत होती है।
 

दलालों के बिना लाइसेंस बिना आसान नहीं है। तय फीस से मनमाना रुपया वसूला जाता है। अधिकारी, कर्मचारी भी इसमें शामिल रहते हैं। जिला प्रशासन को चाहिए कि दलालों के खिलाफ कार्रवाई करें, ताकि लाइसेंस बनाने में हो रही मनमानी बंद हो।

एआरटीअाे प्रशासन पुष्पांजलि मित्रा गौतम का कहना है डीएल ऑनलाइन बनाने का कोई आदेश अभी नहीं आया है। पहले लाइसेंस बनाने पर लिखित परीक्षा देनी थी, जिसमें बदलाव करके अब कंप्यूटर के सामने परीक्षा देनी पड़ रही है।



तय फीस पर ही लर्निंग और परमानेंट लाइसेंस बनाए जाते हैं। यदि दफ्तर में तैनात अधिकारी, कर्मचारी या फिर कोई बाहरी व्यक्ति लाइसेंस बनाने के नाम पर तय फीस से अधिक रुपया ले रहा है तो लोग शिकायत कर सकते हैं। इस पर कार्रवाई की जाएगी।

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