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फूलों वाली सरसों की फसल में रोग का खतरा

Sun, 01 Jan 2017 11:21 PM IST
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूराे
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूराे Updated Sun, 01 Jan 2017 11:21 PM IST
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Flowered mustard crop disease risk
कोहरे की मार से सरसों को होगा नुकसान - फोटो : अमर उजाला
जिले में कई दिन से छाई बदली व कोहरे ने किसानों की टेंशन बढ़ा दी है। लगातार सर्दी व बदली के कारण सरसों की फसल में माहू कीट लगने की संभावना बढ़ गई है। जिला कृषि अधिकारी ने माहू कीट दिखाई पड़ने पर तत्काल आवश्यक कीट नाशक दवा का छिड़काव करने की आवश्यकता बताई है। 
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रबी सीजन में किसानों ने 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल पर सरसों की बोआई की है। कुछ किसानों ने नवंबर में अपने खेतों में केवल सरसों बोई है तो कुछ ने दिसंबर में गेहूं के साथ सरसों की बोआई की है। पहले बोई गई सरसों में फूल आ गए हैं और फलियां बनने लगी हैं।
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इसी बीच मौसम सर्द हो चला है। हालात यह है कि कोहरा पड़ने के साथ कई दिन से आसमान में बदली छाई है। लगातार मौसम इसी तरह रहा तो सरसों की फसल में माहू कीट लग सकता है। समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो फसल खराब हो जाएगी।
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अफसरों की मानें तो माहू कीट हल्के भूरे रंग का बहुत छोटे आकार का होता है। दूर से देखने पर यह दिखाई नहीं पड़ता है, लेकिन इसका प्रकोप तेजी से फैलता है इस लिए माहू कीट का समय रहते उपचार किया जाना चाहिए।

जिला कृषि अधिकारी सतीश कुमार पांडेय का कहना है कि अक्तूबर व नवंबर में बोई गई सरसों की फसल में  फूल लगना शुरू हुए है। जो बोआई दिसंबर में की गई है, उसमें अभी फूल आना बाकी है। वैसे तो अभी कोई नुकसान नहीं है, लेकिन इसी तरह मौसम रहा तो फसल को नुकसान हो सकता है।


किसान अपने खेतों का निरीक्षण करते रहे कीट के लक्षण दिखने पर किसान सरसों की फसल में क्लोरोपाइरीफास एक लीटर दवा 600 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करें या इमिडा क्लोरोपिड रोगार नाम की दवा 300 एमएल मात्रा को 600 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करें। 
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