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निदेशक का आदेश निरस्त, शासन से मिली डिग्री कॉलेज को क्लीनचिट
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रायबरेली। बिना मान्यता के वर्ष 2015-16 में 103 छात्राओं का दाखिला लेकर छह लाख रुपये से अधिक के छात्रवृत्ति के घपले में फंसे महाराणा प्रताप महिला महाविद्यालय डलमऊ शासन ने क्लीनचिट दे दी है।
तत्कालीन डीएम की संस्तुति पर समाज कल्याण निदेशक ने कॉलेज को काली सूची में शामिल कर दिया था, लेकिन टीम की जांच के बाद प्रमुख सचिव ने कॉलेज को बहाल कर दिया है।
संबंधित धनराशि जमा किए जाने और वर्तमान में अध्ययनरत छात्राओं के भविष्य को देखते हुए शासन ने यह निर्णय लिया है। शासन ने माना कि विश्वविद्यालय के स्तर से किए गए विलंब के कारण गड़बड़ी हुई। हालांकि कॉलेज ने जानबूझकर गड़बड़ी नहीं की, बल्कि त्रुटिवश ऐसा हो गया था।
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महाराणा प्रताप महिला महाविद्यालय डलमऊ में वर्ष 2015-16 में छात्रवृत्ति घोटाले की शिकायत होने के बाद जिला विकास अधिकारी एके वैश्य और जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. चंद्रशेखर मालवीय की टीम को जांच करके अपनी रिपोर्ट दी थी।
जांच में पाया गया था कि राम मनोहर लोहिया महाविद्यालय रायबरेली से वर्ष 2016 में बीए प्रथम वर्ष की परीक्षा पास करने वाली छात्रा प्रियंका यादव को महाराणा प्रताप महाविद्यालय डलमऊ से छात्रवृत्ति दी गई थी।
इसी तरह छात्रा पिंकी सोनकर ने राम मनोहर लोहिया महाविद्यालय रायबरेली से वर्ष 2016 में बीए प्रथम वर्ष की परीक्षा पास की थी। उसे भी महाराणा प्रताप महाविद्यालय डलमऊ में दाखिला दिखाकर उसे भी छात्रवृत्ति दी गई थी।
राम मनोहर लोहिया महाविद्यालय रायबरेली से वर्ष 2016 में बीए प्रथम वर्ष की परीक्षा पास करने वाली छात्रा प्रीती मिश्रा को महाराणा प्रताप महाविद्यालय डलमऊ से छात्रवृत्ति दी गई थी।
करीब छह लाख रुपये की गड़बड़ी की पुष्टि होने के बाद तत्कालीन डीएम नेहा शर्मा ने कॉलेज को काली सूची में डालने की संस्तुति कर दी थी। फरवरी 2020 में समाज कल्याण निदेशक ने कॉलेज को काली सूची में डाल दिया था।
इसके बाद गठित टीम ने जांच करके शासन को रिपोर्ट उपलब्ध कराई, जिसके बाद प्रमुख सचिव ने महाराणा प्रताप महिला महाविद्यालय को क्लीन चिट दे दी है। आदेश में कहा गया है कि कॉलेज ने जानबूझकर ऐसा नहीं किया।
विश्वविद्यालय स्तर से हुए विलंब के कारण त्रुटिवश छात्रवृत्ति में गड़बड़ी हुई। कॉलेज की ओर से अपव्यय की धनराशि 6,01,060 रुपये राजकोष जमा कर दिए गए हैं।
विश्वविद्यालय के स्तर से देरी और वर्तमान समय में अध्ययनरत छात्राओं के भविष्य को देखते हुए निदेशक के 25 फरवरी 2020 के काली सूची में कॉलेज को डालने के आदेश को निरस्त कर दिया गया है।
महाराणा प्रताप महिला महाविद्यालय डलमऊ में छात्रवृत्ति में गड़बड़ी के मामले में प्रमुख सचिव का पत्र आ गया है। कॉलेज के काली सूची में शामिल किए जाने के निदेशक के आदेश को निरस्त किया गया है। कॉलेज की ओर से राजकोष में संबंधित धनराशि भी जमा करा दी गई है।- सुनीता सिंह, समाज कल्याण अधिकारी
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तत्कालीन डीएम की संस्तुति पर समाज कल्याण निदेशक ने कॉलेज को काली सूची में शामिल कर दिया था, लेकिन टीम की जांच के बाद प्रमुख सचिव ने कॉलेज को बहाल कर दिया है।
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संबंधित धनराशि जमा किए जाने और वर्तमान में अध्ययनरत छात्राओं के भविष्य को देखते हुए शासन ने यह निर्णय लिया है। शासन ने माना कि विश्वविद्यालय के स्तर से किए गए विलंब के कारण गड़बड़ी हुई। हालांकि कॉलेज ने जानबूझकर गड़बड़ी नहीं की, बल्कि त्रुटिवश ऐसा हो गया था।
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महाराणा प्रताप महिला महाविद्यालय डलमऊ में वर्ष 2015-16 में छात्रवृत्ति घोटाले की शिकायत होने के बाद जिला विकास अधिकारी एके वैश्य और जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. चंद्रशेखर मालवीय की टीम को जांच करके अपनी रिपोर्ट दी थी।
जांच में पाया गया था कि राम मनोहर लोहिया महाविद्यालय रायबरेली से वर्ष 2016 में बीए प्रथम वर्ष की परीक्षा पास करने वाली छात्रा प्रियंका यादव को महाराणा प्रताप महाविद्यालय डलमऊ से छात्रवृत्ति दी गई थी।
इसी तरह छात्रा पिंकी सोनकर ने राम मनोहर लोहिया महाविद्यालय रायबरेली से वर्ष 2016 में बीए प्रथम वर्ष की परीक्षा पास की थी। उसे भी महाराणा प्रताप महाविद्यालय डलमऊ में दाखिला दिखाकर उसे भी छात्रवृत्ति दी गई थी।
राम मनोहर लोहिया महाविद्यालय रायबरेली से वर्ष 2016 में बीए प्रथम वर्ष की परीक्षा पास करने वाली छात्रा प्रीती मिश्रा को महाराणा प्रताप महाविद्यालय डलमऊ से छात्रवृत्ति दी गई थी।
करीब छह लाख रुपये की गड़बड़ी की पुष्टि होने के बाद तत्कालीन डीएम नेहा शर्मा ने कॉलेज को काली सूची में डालने की संस्तुति कर दी थी। फरवरी 2020 में समाज कल्याण निदेशक ने कॉलेज को काली सूची में डाल दिया था।
इसके बाद गठित टीम ने जांच करके शासन को रिपोर्ट उपलब्ध कराई, जिसके बाद प्रमुख सचिव ने महाराणा प्रताप महिला महाविद्यालय को क्लीन चिट दे दी है। आदेश में कहा गया है कि कॉलेज ने जानबूझकर ऐसा नहीं किया।
विश्वविद्यालय स्तर से हुए विलंब के कारण त्रुटिवश छात्रवृत्ति में गड़बड़ी हुई। कॉलेज की ओर से अपव्यय की धनराशि 6,01,060 रुपये राजकोष जमा कर दिए गए हैं।
विश्वविद्यालय के स्तर से देरी और वर्तमान समय में अध्ययनरत छात्राओं के भविष्य को देखते हुए निदेशक के 25 फरवरी 2020 के काली सूची में कॉलेज को डालने के आदेश को निरस्त कर दिया गया है।
महाराणा प्रताप महिला महाविद्यालय डलमऊ में छात्रवृत्ति में गड़बड़ी के मामले में प्रमुख सचिव का पत्र आ गया है। कॉलेज के काली सूची में शामिल किए जाने के निदेशक के आदेश को निरस्त किया गया है। कॉलेज की ओर से राजकोष में संबंधित धनराशि भी जमा करा दी गई है।- सुनीता सिंह, समाज कल्याण अधिकारी