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कटरी के छह गांवों में एक माह के भीतर 30 लोगों की हो गई थी मौत, अफसर बने अंजान

Sun, 16 May 2021 07:34 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 16 May 2021 07:34 PM IST
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Covid
डलमऊ (रायबरेली)। ...गंगा कटरी क्षेत्र के छह गांवों में अजीब सा सन्नाटा है। जहां कभी हर समय चहल-पहल हुआ करती थी, अब वहां खामोशी सी छाई है। ...गांव में लगभग सभी घरों के दरवाजे हमेशा बंद रहते हैं।
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...नुक्कड़ व खलिहान पर लगने वाली चौपालें बंद हैं। घर-घर में लोग बीमार हैं। कोई बुखार से तो किसी को सांस लेने में तकलीफ है। गांव में एक माह के भीतर 30 लोगों की मौत हो चुकी है। रोजाना गांव से अर्थियां उठ रही हैं।
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पर अधिकारी अंजान हैं। स्वास्थ्य विभाग के जिन अफसरों पर इन लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने की जिम्मेदारी है, वह ध्यान नहीं दे रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की नाकामी के चलते ग्रामीणों की जिंदगी रामभरोसे है। इससे लोगों में नाराजगी है।
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डलमऊ ब्लॉक क्षेत्र के चकमलिक भींटी, जहांगीराबाद, जमाल नगर मोह्द्दिीनपुर, बबुरा, चांदपूर लूक, कल्यानपुर बैंती गांव गंगा कटरी क्षेत्र में पड़ते हैं। कटरी क्षेत्र में होने के नाते यहां पर स्वास्थ्य सुविधाएं पूरी तरह से नदारद हैं।
कोरोना काल में भी स्वास्थ्य टीम गांवों में पहुंचकर लोगों की जांच और इलाज कराना जरूरी नहीं है। इसका खामियाजा अब यहां के ग्रामीणों को जान गंवाकर चुकाना पड़ रहा है।
कटरी क्षेत्र के आठ हजार आबादी वाली ग्राम पंचायत चकमलिक भींटी में स्वास्थ्य सुविधाएं लोगों को नसीब नहीं हो पाईं हैं। लोग इंतजार में हैं कि कब उनके गांव स्वास्थ्य टीम जांच करने आएगी।
आए दिन गांव में हो रही मौतों से लोग दहशत में हैं। गांव के महावीर बताते हैं कि उनकी पत्नी तारावती (65) को बुखार व सांस लेने में समस्या थी। इलाज नहीं मिल पाया, जिससे उनकी पत्नी की जान चली गई। यही पीड़ा गांव के रहने वाले रामशंकर की भी है। उनकी पत्नी जागेश्वरी (65) की बीमारी के चलते मौत हो गई है।
गांव के अशोक कुमार बताते हैं कि उनकी मां भाग्यवती (80) को बुखार आ रहा था। फिर सांस लेने में तकलीफ होने लगी। सीएचसी इलाज के लिए ले गया था। इलाज करने की कौन कहे, चिकित्सकों ने देखा तक नहीं।
कोरोना के कारण मां को घर ले आया, लेकिन उनकी जान बचा नहीं सका। पूरे झंडा गांव निवासी दिनेश कुमार के पिता कृष्ण कुुमार (75), पूरे गड़रियन निवासी बृजेश कुमार के बेटे जगदीश पाल (58), डंगरी गांव निवासी अलगू की मां राम दुलारी (75), शेर बहादुर के पिता जगदीश (70), चकवापुर गांव निवासी बृजेश कुमार के बेटे जगदीश (52), रामकिशुन की पत्नी जानकी देवी (58) की मौत हो चुकी है।
इन सबका कहना है कि बुखार और सांस लेने की दिक्कत के कारण उनके परिवारीजनों की जान गई है। सूचना के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की टीम न तो गांव पहुंची और न ही सैनिटाइजेशन कराया गया। टीकाकरण के लिए कैंप भी नहीं लगा।
इलाज मिलता तो बच जाती जान
चकमलिकभींटा निवासी सूरज, पूर्व ग्राम प्रधान भुल्लू सिंह, अशोक कुमार, राजकुमार कहते हैं कि स्वास्थ्य विभाग और क्षेत्रीय प्रशासन द्वारा अब तक इतनी मौत हो जाने के बावजूद न तो गांव में किसी प्रकार का कैंप लगाया और ना ही टीकाकरण कराया गया। आए दिन हो रही मौतों से लोगों में दहशत और भय का माहौल है। जिन लोगों की मौतें हुई हैं, उन्हें समय से इलाज मिल जाता तो उनकी जान बच जाती।
लोग मर रहे, अधीक्षक नहीं उठाते फोन
एक तरफ कटरी क्षेत्र में लोग जान गंवा रहे हैं, वहीं डलमऊ सीएचसी अधीक्षक डॉ.प्रदीप गुप्ता फोन तक नहीं उठाते हैं। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि अधीक्षक को फोन मिलाया लेकिन फोन नहीं उठता।
इससे हम लोग उनसे अपनी समस्या तक नहीं बता पा रहे हैं। इलाज कराने की बात तो बहुत दूर की है। अमर उजाला ने भी अधीक्षक को फोन करके उनका पक्ष जानने का प्रयास किया, लेकिन उनका फोन नहीं उठा।

गांव-गांव स्वास्थ्य टीम भेजकर जांच कराकर लोगों का इलाज कराया जा रहा है। कटरी क्षेत्र के चकमलिक भींटी समेत अन्य गांवों में भी स्वास्थ्य टीमें भेजकर लोगों की जांच कराई जाएगी। लोगों के इलाज में किसी तरह की कोई लापरवाही नहीं बरती जा रही है। यदि कोई लापरवाही बरत रहा है तो शिकायत मिलेगी तो कार्रवाई भी की जाएगी।
डॉ.बीरेंद्र सिंह, सीएमओ
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