रोगियों की जिंदगी पर भारी पड़ रहे धरती के भगवान

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Updated Wed, 19 Jul 2017 12:20 AM IST

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रोगियों की जिंदगी पर भारी पड़ रहे धरती के भगवान
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रायबरेली। ये दो केस बताने के लिए काफी हैं कि धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर रोगियों की जिंदगी पर भारी पड़ रहे हैं। जिला अस्पताल और सीएचसी व पीएचसी महज रेफर सेंटर बनकर रह गए हैं। चिकित्सक पहले नफा नुकसान देखते हैं। बात नहीं बनी तो झंझट से बचने के लिए गंभीर हालत को हथियार बनाते हुए रोगी को रेफर कर देते हैं। ऐसे में रोगियों को परेशानी का सामना करना पड़ा है। खासकर देहात क्षेत्र की सीएचसी व पीएचसी की हालत अधिक खस्ताहाल है, जहां पर 60 फीसदी से ज्यादा रोगियों को जिला अस्पताल रेफर किया जाता है। वहीं जिला अस्पताल से 30 फीसदी रोगी लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफर किए जाते हैं। यह हाल तब है, जब जिले के सरकारी अस्पतालों में रोगियों के बेहतर इलाज के लिए संसाधन व स्टाफ मुहैया कराया गया है।

केस एक : इलाज किया नहीं और कर दिया रेफर
चार दिन पहले रतापुर निवासी बड़े सिंह को जिला अस्पताल की इमरजेंसी लाया गया। चिकित्सक ने देखा। इलाज किया और गंभीर हालत बताकर उसे लखनऊ रेफर कर दिया। पहले वार्ड में भर्ती करके बेहतर ढंग से इलाज करना मुनासिब नहीं समझा गया। नतीजतन इसी दौरान उसकी अस्पताल की इमरजेंसी में मौत हो गई। इसको लेकर परिवारीजनों ने हंगामा किया और चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाया।


केस दो : अचानक हालत गंभीर बता कर दिया रेफर
महराजगंज की रहने वाली संतोष कुमारी का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा था। उसे इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया था। हालत गंभीर बताकर डॉक्टर ने मंगलवार को लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया। परिवारीजन उसे एंबुलेंस के लिए लखनऊ चले गए। परिवारीजन नाराज थे और उनका कहना था कि अचानक गंभीर हालत बताकर लखनऊ रेफर कर दिया। मरीज को बचाना है तो लखनऊ ले ही जाना पडे़गा।

बेहतर इलाज हो तो बचाई जा सकती जान
सीएचसी व पीएचसी से जिला अस्पताल की दूरी अधिक होती है। रोगी सीएचसी व पीएचसी इलाज के पहुंचते हैं, लेकिन बिना इलाज के ही उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में यहां तक पहुंचने से रोगी की बीच में ही मौत हो जाती है। सीएचसी-पीएचसी में तैनात डॉक्टर रोगी का पर्चा तक नहीं बनाते और उसे ऐसे ही रेफर कर देते।

नर्सिंग होम को ज्यादा देते तरजीह
सरकारी अस्पतालोें में तैनात ऐसे कई चिकित्सक हैं, जो अपने नर्सिंग या फिर क्लीनिक में रोगियों के इलाज को ज्यादा तरजीह देते हैं। शहर के रफी नगर में निजी क्लीनिक चलाने वाले एक चिकित्सक तो जिला अस्पताल में तैनात हैं, लेकिन वे अपने कक्ष से अधिकतर लापता रहते हैं। क्लीनिक आने वाले रोगियों पर अधिक ध्यान देते हैं। इसी तरह पुलिस लाइंस, जेल रोड पर भी सरकारी अस्पताल के चिकित्सक निजी क्लीनिक पर रोगियों के इलाज पर ज्यादा जोर देते हैं। यह खेल चोरी छिपे चल रहा है।

गंभीर हालत होने पर किया जाता रेफर
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एनके श्रीवास्तव का कहना है कि जिस गंभीर रोगी का इलाज यहां पर संभव नहीं हो पाता है, उसे ही लखनऊ रेफर किया जाता है। अस्पताल आने वाले रोगियों का बेहतर इलाज करने का प्रयास किया जाता है।

लापरवाही बरत रहे हैं तो कराएंगे जांच
सीएमओ डॉ. डीके सिंह का कहना है कि सीएचसी-पीएचसी में तैनात अधीक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि अस्पताल रोगी पहुंचने पर उसका पहले ठीक तरीके से इलाज किया जाए। गंभीर हालत होेने पर उसे जिला अस्पताल रेफर किया जाए। यदि इसमें चिकित्सक लापरवाही बरत रहे हैं तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।

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