{"_id":"67290c769f357a6bb5034488","slug":"there-is-no-provision-of-icu-for-the-treatment-of-serious-patients-in-the-medical-college-pratapgarh-news-c-262-1-ptp1003-127710-2024-11-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Pratapgarh News: मेडिकल कॉलेज में गंभीर रोगियों के इलाज के लिए नहीं है आईसीयू का इंतजाम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Pratapgarh News: मेडिकल कॉलेज में गंभीर रोगियों के इलाज के लिए नहीं है आईसीयू का इंतजाम
विज्ञापन
मेडिकल कॉलेज में 10 बेड का आईसीयू वार्ड दीपावली के पहले शुरू करने का प्राचार्य का दावा फेल हो गया। अबतक आईसीयू वार्ड तैयार नहीं हो सका, जबकि ठंड की शुरुआत होने के साथ सांस और ब्रेन हैमरेज के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। ऐसे में मरीजों का इलाज जिले में हो पाना आसान नहीं।
ठंड के दिनों में अतिगंभीर रोगियों की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे मरीजों को आईसीयू की जरूरत पड़ती है। इनमें अधिकांश रोगी मधुमेह, ब्रेन हैमरेज, हार्ट अटैक और दमा के होते हैं, जबकि बीते माह मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सलिल श्रीवास्तव ने दावा किया था कि दीपावली के पहले आईसीयू वार्ड में मरीजों को भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया जाएगा। मरीजों को प्रयागराज नहीं जाना पड़ेगा। लेकिन आईसीयू वार्ड न होने के कारण ह्दयरोगियों के साथ दमा के मरीजों को चिकित्सक मजबूरी में रेफर कर देते हैं।
आईसीयू के अभाव में बीते दिसंबर में रेफर किए गए थे 470 मरीज
मेडिकल कॉलेज में आईसीयू न होने के कारण बीते दिसंबर में 470 मरीजों को चिकित्सकों ने प्रयागराज रेफर किया था। मेडिकल कॉलेज के एक डॉक्टर ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि आईसीयू न होने के कारण हर रोज औसतन सात से अधिक मरीजों को केवल प्राथमिक उपचार ही मिल पाता है। उन्हें रेफर करना पड़ता है।
विज्ञापन
आईसीयू में होनी चाहिए यह सुविधाएं
मेडिकल कॉलेज में आईसीयू की आवश्यकता है। इसमें जीवन रक्षक प्रणाली, वेंटीलेटर, हाईफ्लो ऑक्सीजन, डीफाइब्रिलेटर, इंफ्यूजन पंप, ऑक्सीजन कसेंट्रेटर, मॉनीटर, ईसीजी, ग्लूको मीटर, बाइपैप, प्रोटेबल एक्स-रे, सेक्सन मशीन, व्हीलचेयर, स्ट्रेचर, अत्याधुनिक बेड सहित अन्य उपकरण होने चाहिए। इसके अलावा विशेषज्ञ चिकित्सक व पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती होनी चाहिए।
25 नवंबर के पहले आईसीयू वार्ड तैयार हो जाएगा। ऑक्सीजन पाइपलाइन बिछाने का कार्य पूरा हो गया है। वेंटीलेटर को वार्ड में रखवा दिया गया है। अन्य व्यवस्था भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा।
- डॉ. शैलेंद्र कुशवाहा, सीएमएस, मेडिकल कॉलेज।
विज्ञापन
ठंड के दिनों में अतिगंभीर रोगियों की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे मरीजों को आईसीयू की जरूरत पड़ती है। इनमें अधिकांश रोगी मधुमेह, ब्रेन हैमरेज, हार्ट अटैक और दमा के होते हैं, जबकि बीते माह मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सलिल श्रीवास्तव ने दावा किया था कि दीपावली के पहले आईसीयू वार्ड में मरीजों को भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया जाएगा। मरीजों को प्रयागराज नहीं जाना पड़ेगा। लेकिन आईसीयू वार्ड न होने के कारण ह्दयरोगियों के साथ दमा के मरीजों को चिकित्सक मजबूरी में रेफर कर देते हैं।
विज्ञापन
आईसीयू के अभाव में बीते दिसंबर में रेफर किए गए थे 470 मरीज
मेडिकल कॉलेज में आईसीयू न होने के कारण बीते दिसंबर में 470 मरीजों को चिकित्सकों ने प्रयागराज रेफर किया था। मेडिकल कॉलेज के एक डॉक्टर ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि आईसीयू न होने के कारण हर रोज औसतन सात से अधिक मरीजों को केवल प्राथमिक उपचार ही मिल पाता है। उन्हें रेफर करना पड़ता है।
विज्ञापन
आईसीयू में होनी चाहिए यह सुविधाएं
मेडिकल कॉलेज में आईसीयू की आवश्यकता है। इसमें जीवन रक्षक प्रणाली, वेंटीलेटर, हाईफ्लो ऑक्सीजन, डीफाइब्रिलेटर, इंफ्यूजन पंप, ऑक्सीजन कसेंट्रेटर, मॉनीटर, ईसीजी, ग्लूको मीटर, बाइपैप, प्रोटेबल एक्स-रे, सेक्सन मशीन, व्हीलचेयर, स्ट्रेचर, अत्याधुनिक बेड सहित अन्य उपकरण होने चाहिए। इसके अलावा विशेषज्ञ चिकित्सक व पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती होनी चाहिए।
25 नवंबर के पहले आईसीयू वार्ड तैयार हो जाएगा। ऑक्सीजन पाइपलाइन बिछाने का कार्य पूरा हो गया है। वेंटीलेटर को वार्ड में रखवा दिया गया है। अन्य व्यवस्था भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा।
- डॉ. शैलेंद्र कुशवाहा, सीएमएस, मेडिकल कॉलेज।