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राज्य विश्वविद्यालय: परीक्षा फार्म भरने के बाद छात्रों की सहमति जरूरी
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परीक्षा फार्म भरने के दौरान कॉलेज प्रशासन अब मनमानी नहीं कर सके गा। परीक्षा फार्म भरने के बाद उसकी एक प्रति छात्रों को उपलब्ध करानी होगी। छात्रों की सहमति के बाद ही परीक्षा परीक्षा अंतिम रूप से विश्वविद्यालय की ओर से स्वीकार किया जाएगा। राज्य विश्वविद्यालय ने परीक्षा फार्म भरने के लिए सभी कॉलेजों को निर्देश जारी कर दिया है।
प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) विश्वविद्यालय की ओर से शैक्षणिक सत्र 2022-23 के विभिन्न पाठ्यक्रमों के विषम सेमेस्टर की परीक्षा के लिए लॉगिन खोल दी है। जिससे सभी कॉलेज समय परीक्षा फार्म भर सके। संस्थागत, व्यक्तिगत, भूतपूर्व और बैक पेपर का परीक्षा फार्म 15 दिसंबर तक भरा जाएगा।
18 दिसंबर तक शुल्क जमा किया जा सकेगा। खास बात यह है कि इस बार विश्वविद्यालय ने परीक्षा फार्म भरने के बाद उसकी एक प्रति छात्रों को जांच के लिए देने को कहा है। जिससे छात्र परीक्षा फार्म में भरे गए विषय एवं प्रश्नपत्रों की जांच कर सकें। उसके बाद उनकी सहमति प्राप्त कर उसे कॉलेज कार्यालय में सुरक्षित रख लें। जिससे भविष्य में परीक्षा के दौरान छात्रों द्वारा यह आरोप न लगाया जा सके कि विषय और प्रश्नपत्र गलत भरे गए हैं। प्रवेश पत्र जारी होने के बाद किसी प्रकार विषय और प्रश्नपत्र की गलती होने पर जिम्मेदारी छात्र और कालेज की होगी।
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दरअसल, पूर्व में कालेजों द्वारा छात्रों के विषयों का चयन मनमाने ढंग से कर दिया जाता था। छात्रों को विषयों की जानकारी नहीं हो पाती थी। प्रवेश पत्र मिलने के बाद उन्हें विषय का पता चलता है। ऐसी स्थिति में बिना पढ़ें परीक्षा देना छात्रों को मुश्किल होता था। कई बार इन्हीं बातों को कालेेजों में छात्रों द्वारा विवाद भी हो चुका है। शिकायत मिलने के बाद इस बार विश्वविद्यालय ने मामले को संज्ञान में लेकर नया नियम जारी कर दिया है।
छात्रों की सहमति के बाद विषयों में किसी तरह का परिवर्तन बाद में नहीं किया जाएगा। वहीं इसी सत्र से विश्वविद्यालय ने स्नातक प्रथम वर्ष में दाखिला लेने वाले छात्रों के लिए भी यह नियम लागू कर दिया है। दाखिले के दौरान चयन किए गए विषयों की जानकारी कालेज छात्रों को देंगे। दाखिले के बाद चयनित विषयों की एक प्रति छात्रों को उपलब्ध कराएंगे। विश्वविद्यालय आदेश के बाद छात्रों को दाखिले की एक प्रति सभी कॉलेजों ने उपलब्ध कराई थी।
स्नातक, परास्नातक विषम सेमेस्टर के छात्रों का परीक्षा फार्म भरा जा रहा है। कालेजों को निर्देश दिया गया है कि वह परीक्षा फार्म भरने के बाद उसकी एक प्रति छात्रों को उपलब्ध कराएं। जिससे उन्हें विषयों और प्रश्नपत्रों की जानकारी हो सके।
डॉ. कुलदीप सिंह, परीक्षा नियंत्रक, राज्य विवि।
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प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) विश्वविद्यालय की ओर से शैक्षणिक सत्र 2022-23 के विभिन्न पाठ्यक्रमों के विषम सेमेस्टर की परीक्षा के लिए लॉगिन खोल दी है। जिससे सभी कॉलेज समय परीक्षा फार्म भर सके। संस्थागत, व्यक्तिगत, भूतपूर्व और बैक पेपर का परीक्षा फार्म 15 दिसंबर तक भरा जाएगा।
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18 दिसंबर तक शुल्क जमा किया जा सकेगा। खास बात यह है कि इस बार विश्वविद्यालय ने परीक्षा फार्म भरने के बाद उसकी एक प्रति छात्रों को जांच के लिए देने को कहा है। जिससे छात्र परीक्षा फार्म में भरे गए विषय एवं प्रश्नपत्रों की जांच कर सकें। उसके बाद उनकी सहमति प्राप्त कर उसे कॉलेज कार्यालय में सुरक्षित रख लें। जिससे भविष्य में परीक्षा के दौरान छात्रों द्वारा यह आरोप न लगाया जा सके कि विषय और प्रश्नपत्र गलत भरे गए हैं। प्रवेश पत्र जारी होने के बाद किसी प्रकार विषय और प्रश्नपत्र की गलती होने पर जिम्मेदारी छात्र और कालेज की होगी।
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दरअसल, पूर्व में कालेजों द्वारा छात्रों के विषयों का चयन मनमाने ढंग से कर दिया जाता था। छात्रों को विषयों की जानकारी नहीं हो पाती थी। प्रवेश पत्र मिलने के बाद उन्हें विषय का पता चलता है। ऐसी स्थिति में बिना पढ़ें परीक्षा देना छात्रों को मुश्किल होता था। कई बार इन्हीं बातों को कालेेजों में छात्रों द्वारा विवाद भी हो चुका है। शिकायत मिलने के बाद इस बार विश्वविद्यालय ने मामले को संज्ञान में लेकर नया नियम जारी कर दिया है।
छात्रों की सहमति के बाद विषयों में किसी तरह का परिवर्तन बाद में नहीं किया जाएगा। वहीं इसी सत्र से विश्वविद्यालय ने स्नातक प्रथम वर्ष में दाखिला लेने वाले छात्रों के लिए भी यह नियम लागू कर दिया है। दाखिले के दौरान चयन किए गए विषयों की जानकारी कालेज छात्रों को देंगे। दाखिले के बाद चयनित विषयों की एक प्रति छात्रों को उपलब्ध कराएंगे। विश्वविद्यालय आदेश के बाद छात्रों को दाखिले की एक प्रति सभी कॉलेजों ने उपलब्ध कराई थी।
स्नातक, परास्नातक विषम सेमेस्टर के छात्रों का परीक्षा फार्म भरा जा रहा है। कालेजों को निर्देश दिया गया है कि वह परीक्षा फार्म भरने के बाद उसकी एक प्रति छात्रों को उपलब्ध कराएं। जिससे उन्हें विषयों और प्रश्नपत्रों की जानकारी हो सके।
डॉ. कुलदीप सिंह, परीक्षा नियंत्रक, राज्य विवि।