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धान खरीद: 72 घंटे में भुगतान का दावा, 22 दिन बाद भी खाते में नहीं पहुंची धनराशि
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सरकारी क्रय केंद्रों पर धान बेचने वाले किसानों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 72 घंटे के अंदर भुगतान करने का निर्देश दिया था, मगर आलम यह है कि उपज बेचने वाले किसानों का 22 दिन बाद भी भुगतान नहीं हुआ है। इससे वह कभी खरीद केंद्र तो कभी जनपदीय अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं।
जिले में एक नवंबर से धान की खरीद प्रारंभ हुई थी। अभी तक 2563 मीट्रिक टन धान की खरीद हुई है। यह धान जिले के 674 किसानों से विभिन्न केंद्रों पर खरीदा गया है। धान बेचने वाले 674 किसानों में से 259 किसानों के 2.08 करोड़ रुपये बकाया हैं। जिले के 415 किसानों को अभी तक 5.54 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।
शासन ने 72 घंटे यानि धान की बिक्री करने के तीन दिन के अंदर किसानों के खाते में धनराशि भेजने का दावा किया था, मगर धान बिक्री के 22 दिन बीतने के बाद भी किसानों के खाते में भुगतान नहीं किया जा रहा है। इससे किसान परेशान हैं। बिक्री केंद्रों पर किसानों की पासबुक, आधार नंबर और खतौनी सहित सभी विवरण धान बेचने के पहले लिए जाते हैं, मगर भुगतान करने में विभाग दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। जिले में 76,000 मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य है, मगर पहले एक महीने में धान खरीद की स्थिति ठीक नहीं है।
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अफसरों का दावा, किसी का खाता ब्लाक, किसी ने वर्षों से नहीं किया लेनदेन
धान बेचने वाले किसानों को भुगतान करने में आ रही दिक्कतों को लेकर अफसरों का दावा है कि कुछ किसानों के खाते बंद हैं, तो कुछ किसानों ने वर्षों से लेन-देन नहीं किया है। ऐसी दशा में उनके खाते में धनराशि का भुगतान नहीं हो पा रहा है। किसान धान बेचने के बाद सिर्फ बैंक में बैलेंस देखने जाते हैं, अपने खाते की वस्तुस्थिति की जानकारी नहीं लेना चाहते हैं। इससे अधिकांश किसानों के खाते में धनराशि का भुगतान नहीं हो पा रहा है।
किसानों का दावा, भुगतान की बात कहने पर टरका रहे अफसर
सदर ब्लॉक के बहलोलपुर गांव निवासी राघवेंद्र सिंह ने अपना धान तो बेच दिया, मगर अभी 76.48 हजार रुपये खाते में नहीं आए हैं। राघवेंद्र का कहना है कि भुगतान के लिए प्रतिदिन आश्वासन मिलता है, मगर खाते में धनराशि नहीं आ रही है। राजगढ़ के आलोक प्रताप सिंह के 18,624 रुपये बकाया हैं, भुगतान के लिए प्रतिदिन चक्कर लगा रहे हैं। मगर अभी तक खाते में धनराशि नहीं आई है।
राजगढ़ के ही मृत्युंजय सिंह के 13,192 रुपये बकाया हैं। इसी तरह संडवाखास के महेंद्र प्रताप सिंह के 58,200 रुपये बकाया हैं। महेंद्र का कहना है कि कई बार खरीद केंद्र प्रभारी से रुपये भेजने के लिए कहा गया, मगर जब शिकायत की जाती है, तो कल भुगतान की बात कही जाती है। मानधाता के सरायआनादेव के प्रदीप कुमार सिंह ने 1.04 लाख रुपये का धान बेचा, मगर अभी तक भुगतान नहीं किया गया है।
धान बेचने वाले किसानों का डाटा अपलोड कराने का कार्य तेजी से चल रहा है। खाता बंद होने और लंबे समय से लेन-देन नहीं करने से उनके खाते में धनराशि अंतरित होने के बजाय वापस आ जाती है। ऐसी दशा में किसानों से खाता अपडेट कराने के बाद ही भुगतान किया जा सकता है। अजीत कुमार त्रिपाठी, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
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जिले में एक नवंबर से धान की खरीद प्रारंभ हुई थी। अभी तक 2563 मीट्रिक टन धान की खरीद हुई है। यह धान जिले के 674 किसानों से विभिन्न केंद्रों पर खरीदा गया है। धान बेचने वाले 674 किसानों में से 259 किसानों के 2.08 करोड़ रुपये बकाया हैं। जिले के 415 किसानों को अभी तक 5.54 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।
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शासन ने 72 घंटे यानि धान की बिक्री करने के तीन दिन के अंदर किसानों के खाते में धनराशि भेजने का दावा किया था, मगर धान बिक्री के 22 दिन बीतने के बाद भी किसानों के खाते में भुगतान नहीं किया जा रहा है। इससे किसान परेशान हैं। बिक्री केंद्रों पर किसानों की पासबुक, आधार नंबर और खतौनी सहित सभी विवरण धान बेचने के पहले लिए जाते हैं, मगर भुगतान करने में विभाग दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। जिले में 76,000 मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य है, मगर पहले एक महीने में धान खरीद की स्थिति ठीक नहीं है।
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अफसरों का दावा, किसी का खाता ब्लाक, किसी ने वर्षों से नहीं किया लेनदेन
धान बेचने वाले किसानों को भुगतान करने में आ रही दिक्कतों को लेकर अफसरों का दावा है कि कुछ किसानों के खाते बंद हैं, तो कुछ किसानों ने वर्षों से लेन-देन नहीं किया है। ऐसी दशा में उनके खाते में धनराशि का भुगतान नहीं हो पा रहा है। किसान धान बेचने के बाद सिर्फ बैंक में बैलेंस देखने जाते हैं, अपने खाते की वस्तुस्थिति की जानकारी नहीं लेना चाहते हैं। इससे अधिकांश किसानों के खाते में धनराशि का भुगतान नहीं हो पा रहा है।
किसानों का दावा, भुगतान की बात कहने पर टरका रहे अफसर
सदर ब्लॉक के बहलोलपुर गांव निवासी राघवेंद्र सिंह ने अपना धान तो बेच दिया, मगर अभी 76.48 हजार रुपये खाते में नहीं आए हैं। राघवेंद्र का कहना है कि भुगतान के लिए प्रतिदिन आश्वासन मिलता है, मगर खाते में धनराशि नहीं आ रही है। राजगढ़ के आलोक प्रताप सिंह के 18,624 रुपये बकाया हैं, भुगतान के लिए प्रतिदिन चक्कर लगा रहे हैं। मगर अभी तक खाते में धनराशि नहीं आई है।
राजगढ़ के ही मृत्युंजय सिंह के 13,192 रुपये बकाया हैं। इसी तरह संडवाखास के महेंद्र प्रताप सिंह के 58,200 रुपये बकाया हैं। महेंद्र का कहना है कि कई बार खरीद केंद्र प्रभारी से रुपये भेजने के लिए कहा गया, मगर जब शिकायत की जाती है, तो कल भुगतान की बात कही जाती है। मानधाता के सरायआनादेव के प्रदीप कुमार सिंह ने 1.04 लाख रुपये का धान बेचा, मगर अभी तक भुगतान नहीं किया गया है।
धान बेचने वाले किसानों का डाटा अपलोड कराने का कार्य तेजी से चल रहा है। खाता बंद होने और लंबे समय से लेन-देन नहीं करने से उनके खाते में धनराशि अंतरित होने के बजाय वापस आ जाती है। ऐसी दशा में किसानों से खाता अपडेट कराने के बाद ही भुगतान किया जा सकता है। अजीत कुमार त्रिपाठी, जिला खाद्य विपणन अधिकारी