{"_id":"58d40b404f1c1b61371a13aa","slug":"women-died-in-belha","type":"story","status":"publish","title_hn":"अपनोें की संवेदनहीनता ने ली प्रसूता की जान ","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
अपनोें की संवेदनहीनता ने ली प्रसूता की जान
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Thu, 23 Mar 2017 11:22 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
सिस्टम की खामी और अपनों की संवेदनहीनता के चलते जिला महिला अस्पताल में एक प्रसूता की जान चली गई। उसे पांच दिनों पहले प्रसव पीड़ा होने पर भर्ती कराया गया था। डाक्टरों ने खून की कमी के चलते प्रसव कराने से इनकार कर दिया। परिजन ब्लैडबैंक पहुंचे तो उसके ग्रुप का खून नहीं मिला। घरवाले भी खून देने के लिए तैयार नहीं हुए। जैसे-तैसे महिला का प्रसव कराया गया। उसने एक बच्ची को जन्म दिया। डाक्टरों के रेफर करने के बाद भी परिवारीजन उसे लेकर घर चले गए। खून की कमी से उसकी हालत बिगड़ी तो गुरुवार को फिर महिला अस्प्ताल लाया गया, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अब अस्पताल प्रशासन भी अपने बचाव में लगा हुआ है।
अंतू थाना क्षेत्र के सेतापुर गांव निवासी संजू (25) पत्नी सुभाष गर्भवती थी। पांच दिनों पहले उसे प्रसव पीड़ा शुरू हुई तो परिजनों ने जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया। यहां चिकित्सकों ने ब्लड की कमी बताते हुए तत्काल खून की मांग की। घरवाले भागकर ब्लडबैंक पहुंचे तो वहां महिला के ग्रुप का खून नहीं था। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि महिला को इलाहाबाद ले जाने के लिए कहा जा रहा था, लेकिन घरवालों ने दबाव डालकर प्रसव कराया। प्रसव के बाद महिला की हालत गंभीर देखकर उसे इलाहाबाद रेफर कर दिया गया, लेकिन परिजन अगले दिन उसे लेकर घर चले गए। बताते हैं कि ब्लड की कमी और रक्तस्राव अधिक होने से उसकी हालत और बिगड़ गई।
गुरुवार दोपहर घरवाले गंभीर हालत में उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। यहां चिकित्सकों ने संजू को मृत घोषित कर दिया। अब सवाल यह उठता है कि अगर उसे खून की कमी थी तो फिर डाक्टरों ने प्रसव कराने का रिस्क क्यों लिया। खून की व्यवस्था होने तक इंतजार क्यों नहीं किया गया। अस्पताल प्रशासन यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना चाह रहा है कि प्रसूता के परिवारीजनों ने इधर-उधर से दबाव डालकर प्रसव कराया। ऐसे में सवाल यह खड़ा होता है कि किसी के दबाव डालने पर डाक्टर क्या किसी की जिंदगी को खतरे में डाल देंगे। महिला की मौत के लिए न सिर्फ उसके घरवाले बल्कि कहीं न कहीं अस्पताल प्रशासन भी जिम्मेदार है।
विज्ञापन
अंतू थाना क्षेत्र के सेतापुर गांव निवासी संजू (25) पत्नी सुभाष गर्भवती थी। पांच दिनों पहले उसे प्रसव पीड़ा शुरू हुई तो परिजनों ने जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया। यहां चिकित्सकों ने ब्लड की कमी बताते हुए तत्काल खून की मांग की। घरवाले भागकर ब्लडबैंक पहुंचे तो वहां महिला के ग्रुप का खून नहीं था। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि महिला को इलाहाबाद ले जाने के लिए कहा जा रहा था, लेकिन घरवालों ने दबाव डालकर प्रसव कराया। प्रसव के बाद महिला की हालत गंभीर देखकर उसे इलाहाबाद रेफर कर दिया गया, लेकिन परिजन अगले दिन उसे लेकर घर चले गए। बताते हैं कि ब्लड की कमी और रक्तस्राव अधिक होने से उसकी हालत और बिगड़ गई।
विज्ञापन
गुरुवार दोपहर घरवाले गंभीर हालत में उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। यहां चिकित्सकों ने संजू को मृत घोषित कर दिया। अब सवाल यह उठता है कि अगर उसे खून की कमी थी तो फिर डाक्टरों ने प्रसव कराने का रिस्क क्यों लिया। खून की व्यवस्था होने तक इंतजार क्यों नहीं किया गया। अस्पताल प्रशासन यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना चाह रहा है कि प्रसूता के परिवारीजनों ने इधर-उधर से दबाव डालकर प्रसव कराया। ऐसे में सवाल यह खड़ा होता है कि किसी के दबाव डालने पर डाक्टर क्या किसी की जिंदगी को खतरे में डाल देंगे। महिला की मौत के लिए न सिर्फ उसके घरवाले बल्कि कहीं न कहीं अस्पताल प्रशासन भी जिम्मेदार है।
विज्ञापन