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अस्पतालों में आग लगी तो जाएगी मरीजों की जान
Updated Sun, 16 Jul 2017 07:46 PM IST
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प्रतापगढ़। जिले में अस्पतालों में भी मरीजोें और उनके तीमारदारों की अनदेखी की जा रही है। सरकारी व प्राइवेट अस्पताल में आग की घटनाओं से बचाव के लिए इंतजाम नहीं हैं। हर कदम पर लापरवाही बरती जा रही है। यदि अस्पतालों में आग लगी तो कई लोगों की जान जा सकती हैं।
लखनऊ के केजीएमयू के ट्रामा सेंटर में लगी आग से छह मरीजों की जान चली गई। कई जीवन-मौत से संघर्ष कर रहे हैं। अगर इस तरह के हादसे जिले के सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में होते हैं तो यहां भी सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। यहां तो पर्याप्त दमकल भी नहीं हैं। इमरजेंसी, मेडिकल, चिल्ड्रेन वार्ड और अन्य किसी भी वार्ड में फायर किट नहीं है। न ही आग से बचाव के दूसरे कोई तरीके हैं। जबकि मेडिकल और चिल्ड्रेन वार्ड के साथ कुपोषण पुनर्वास केंद्र दूसरे तल पर हैं। मेडिकल वार्ड जाने के लिए सीढ़ी पर कदम रखते ही विद्युत पॉवर सप्लाई स्विच लगाया गया है।
कभी शार्ट-सर्किट से कोई हादसा हो गया तो मेडिकल और चिल्ड्रेन वार्ड के साथ सर्जिकल वार्ड पुरुष में भर्ती मरीजों को भागने के लिए कोई रास्ता नहीं मिलेगा। आग पर काबू पाने के लिए फायर किट भी नहीं मिलेगा। ब्लड बैंक के मेनगेट के साथ ही सर्जिकल वार्ड में शार्ट सर्किट से कई घटनाएं भी हुई हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार चुप्पी साधे बैठे हैं।
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दो चार अस्पतालों को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर में अंदर जाने और निकलने के लिए एक ही रास्ता है। कुछ अस्पताल दो तल तो कुछ तीन तल के हैं। इन अस्पतालों में भी फायर किट नहीं है। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग की ओर से संचालक को अस्पताल चलाने की अनुमति दे दी गई है। फायर विभाग कभी भी फायरकिट की जांच करने के लिए नहीं कहता है। जिला महिला अस्पताल का ओटी और दो वार्ड दूसरे तल पर हैं। तीसरे तल पर एसएसएनसीयू वार्ड है। दूसरे तल पर जाने के लिए बनी सीढ़ी के नीचे ही पॉवर सप्लाई स्विच सेट किया गया है। लापरवाही किसी भी दिन लोगों की जान पर भारी पड़ सकती है।
वार्डों में तीमारदार करते हैं ध्रूमपान
जिला अस्पताल के सर्जिकल वार्ड से लेकर मेडिकल वार्ड तक कुछ तीमारदार और स्वास्थ्य कर्मचारी अपनी बाइक खड़ी करते हैं। वहीं मरीजों के साथ बहुत से ऐसे भी तीमारदार आते हैं जो अस्पताल परिसर में ही ध्रूमपान भी करते हैं। इससे भी आग लगने का खतरा बना रहता है। खुलेआम ध्रूमपान करने वालों को जुर्माने की चेतावनी दी गई है, लेकिन कभी किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई।
संकरी गलियों में प्राइवेट अस्पताल, लगता है जाम
शहर के ज्यादातर प्राइवेट अस्पताल संकरी गलियों में हैं। वहीं जिला व महिला अस्पताल जाने वाली सड़क पर दिन भर जाम लगा रहता है। चार पहिया तो दूर पैदल और बाइक से चलना दूभर हो जाता है। एंबुलेंस चालकों को काफी परेशान होना पड़ता है। सायरन बजाने के बाद भी उन्हें निकलने के लिए रास्ता नहीं मिलता है।
जिला अस्पताल में अग्निशमन यंत्र लगवाने के लिए नोटिस दिया गया है। लेकिन अभी तक नहीं लगवाया गया है। वहीं दो चार प्राइवेट अस्पतालों को छोड़ दिया जाए तो किसी भी नर्सिंगहोम में अग्निशमन यंत्र की व्यवस्था नहीं है। नोटिस दिया जा रहा है। पखवारे भर के अंदर अग्निशमन यंत्र की व्यवस्था न करने वाले अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - महेन्द्र प्रताप, सहायक अग्निशमन अधिकारी।
जिला अस्पताल में बजट के अभाव में फायर किट नहीं लग पाया है। महिला अस्पताल में लगवा दिया गया है। जल्द ही जिला अस्पताल में भी लग जाएगा। जांच कराई जाएगी। जिन प्राइवेट अस्पतालों में आग से बचाव की व्यवस्था नहीं है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. यूके पांडेय, सीएमओ।
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लखनऊ के केजीएमयू के ट्रामा सेंटर में लगी आग से छह मरीजों की जान चली गई। कई जीवन-मौत से संघर्ष कर रहे हैं। अगर इस तरह के हादसे जिले के सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में होते हैं तो यहां भी सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। यहां तो पर्याप्त दमकल भी नहीं हैं। इमरजेंसी, मेडिकल, चिल्ड्रेन वार्ड और अन्य किसी भी वार्ड में फायर किट नहीं है। न ही आग से बचाव के दूसरे कोई तरीके हैं। जबकि मेडिकल और चिल्ड्रेन वार्ड के साथ कुपोषण पुनर्वास केंद्र दूसरे तल पर हैं। मेडिकल वार्ड जाने के लिए सीढ़ी पर कदम रखते ही विद्युत पॉवर सप्लाई स्विच लगाया गया है।
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कभी शार्ट-सर्किट से कोई हादसा हो गया तो मेडिकल और चिल्ड्रेन वार्ड के साथ सर्जिकल वार्ड पुरुष में भर्ती मरीजों को भागने के लिए कोई रास्ता नहीं मिलेगा। आग पर काबू पाने के लिए फायर किट भी नहीं मिलेगा। ब्लड बैंक के मेनगेट के साथ ही सर्जिकल वार्ड में शार्ट सर्किट से कई घटनाएं भी हुई हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार चुप्पी साधे बैठे हैं।
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दो चार अस्पतालों को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर में अंदर जाने और निकलने के लिए एक ही रास्ता है। कुछ अस्पताल दो तल तो कुछ तीन तल के हैं। इन अस्पतालों में भी फायर किट नहीं है। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग की ओर से संचालक को अस्पताल चलाने की अनुमति दे दी गई है। फायर विभाग कभी भी फायरकिट की जांच करने के लिए नहीं कहता है। जिला महिला अस्पताल का ओटी और दो वार्ड दूसरे तल पर हैं। तीसरे तल पर एसएसएनसीयू वार्ड है। दूसरे तल पर जाने के लिए बनी सीढ़ी के नीचे ही पॉवर सप्लाई स्विच सेट किया गया है। लापरवाही किसी भी दिन लोगों की जान पर भारी पड़ सकती है।
वार्डों में तीमारदार करते हैं ध्रूमपान
जिला अस्पताल के सर्जिकल वार्ड से लेकर मेडिकल वार्ड तक कुछ तीमारदार और स्वास्थ्य कर्मचारी अपनी बाइक खड़ी करते हैं। वहीं मरीजों के साथ बहुत से ऐसे भी तीमारदार आते हैं जो अस्पताल परिसर में ही ध्रूमपान भी करते हैं। इससे भी आग लगने का खतरा बना रहता है। खुलेआम ध्रूमपान करने वालों को जुर्माने की चेतावनी दी गई है, लेकिन कभी किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई।
संकरी गलियों में प्राइवेट अस्पताल, लगता है जाम
शहर के ज्यादातर प्राइवेट अस्पताल संकरी गलियों में हैं। वहीं जिला व महिला अस्पताल जाने वाली सड़क पर दिन भर जाम लगा रहता है। चार पहिया तो दूर पैदल और बाइक से चलना दूभर हो जाता है। एंबुलेंस चालकों को काफी परेशान होना पड़ता है। सायरन बजाने के बाद भी उन्हें निकलने के लिए रास्ता नहीं मिलता है।
जिला अस्पताल में अग्निशमन यंत्र लगवाने के लिए नोटिस दिया गया है। लेकिन अभी तक नहीं लगवाया गया है। वहीं दो चार प्राइवेट अस्पतालों को छोड़ दिया जाए तो किसी भी नर्सिंगहोम में अग्निशमन यंत्र की व्यवस्था नहीं है। नोटिस दिया जा रहा है। पखवारे भर के अंदर अग्निशमन यंत्र की व्यवस्था न करने वाले अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - महेन्द्र प्रताप, सहायक अग्निशमन अधिकारी।
जिला अस्पताल में बजट के अभाव में फायर किट नहीं लग पाया है। महिला अस्पताल में लगवा दिया गया है। जल्द ही जिला अस्पताल में भी लग जाएगा। जांच कराई जाएगी। जिन प्राइवेट अस्पतालों में आग से बचाव की व्यवस्था नहीं है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. यूके पांडेय, सीएमओ।