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जान हथेली पर रख आग बुझाते रहे युवक
ब्यूरो।अमर उजाला प्रतापगढ़
Updated Sun, 24 May 2015 11:26 PM IST
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महिमापुर गांव में लगी आग के दौरान लपटों का रौद्र रूप देखकर सभी के होश उड़ गए। 45 डिग्री तापमान के बीच लगी भयंकर आग की चपेट में आने से लगभग आधा गांव जल रहा था। ग्रामीण आग बुझाने के लिए जूझ रहे थे, लेकिन सफलता नहीं मिल पा रही थी। सूचना पर जब फायर ब्रिगेड की टीमें पहुंची तो आसमान में ऊंची-ऊंची लपटें उठ रही थीं। फायर ब्रिगेड की टीम भी आग को चीरते हुए गांव में घुसने का साहस नहीं जुटा पा रही थी। इस बीच गांव का रोहित मिश्र आगे आया और साहस दिखाते हुए फायर ब्रिगेड की आग बुझाने की पाइप लेकर जलते घरों के बीच घुसता चला गया।
उसका साहस देख गांव के शिवम मिश्रा, बृजेश पांडेय, अवधेश तिवारी, दिनेश तिवारी व सुशील शुक्ला भी बहादुरी दिखाते हुए रोहित के साथ कंधे से कंधा मिलाने लगे। सभी ने आग की लपटों को चीरते हुए जल रहे घरों पर पानी डालना शुरू कर दिया। जान की परवाह न कर घरों की छतों से लेकर पेड़ों पर चढ़कर सभी आग बुझाते रहे। ग्रामीणों व अधिकारियों के साथ सांसद व विधायक भी इनकी बहादुरी का गुणगान करते नहीं थक रहे थे। सभी का कहना था कि अगर इन युवकों ने बहादुरी नहीं दिखाई होती तो पूरा गांव आग की चपेट में आ जाता। अधिकारियों ने इनकी बहादुरी की रिपोर्ट शासन तक भेजे जाने की बात कही है।
महिमापुर में आग की चपेट में आने से दस घर जल गए। नुकसान तो सभी का हुआ, लेकिन सबसे बड़ा सदमा रघवुर वर्मा के परिजनों को लगा है। रघुवर की छोटी बेटी अंजू की शादी तय थी। जून माह में बारात आनी है। परिजन शादी की तैयारी में जुटे थे। बर्तन व कपड़े की खरीदारी करने के साथ ही घर में राशन पानी का इंतजाम भी हो चुका था। रविवार को आग ने तांडव मचाया तो अंजू की शादी का सपना भी जलकर राख हो गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। शादी की तैयारी के लिए खरीदे गए सामान भी जल गए। आग इतनी तेज फैली कि लोग शादी के बर्तन व कपड़े तक नहीं बचा सके। एक तरफ रघुवर का घर धू-धू कर जल रहा था वहीं दूसरी ओर गांव के समीप अंजू की बहन राजकली दहाडे़ मारकर रो रही थी। बिलखते हुए कह रही थी कि अब शादी कैसे होगी।
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उसका साहस देख गांव के शिवम मिश्रा, बृजेश पांडेय, अवधेश तिवारी, दिनेश तिवारी व सुशील शुक्ला भी बहादुरी दिखाते हुए रोहित के साथ कंधे से कंधा मिलाने लगे। सभी ने आग की लपटों को चीरते हुए जल रहे घरों पर पानी डालना शुरू कर दिया। जान की परवाह न कर घरों की छतों से लेकर पेड़ों पर चढ़कर सभी आग बुझाते रहे। ग्रामीणों व अधिकारियों के साथ सांसद व विधायक भी इनकी बहादुरी का गुणगान करते नहीं थक रहे थे। सभी का कहना था कि अगर इन युवकों ने बहादुरी नहीं दिखाई होती तो पूरा गांव आग की चपेट में आ जाता। अधिकारियों ने इनकी बहादुरी की रिपोर्ट शासन तक भेजे जाने की बात कही है।
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महिमापुर में आग की चपेट में आने से दस घर जल गए। नुकसान तो सभी का हुआ, लेकिन सबसे बड़ा सदमा रघवुर वर्मा के परिजनों को लगा है। रघुवर की छोटी बेटी अंजू की शादी तय थी। जून माह में बारात आनी है। परिजन शादी की तैयारी में जुटे थे। बर्तन व कपड़े की खरीदारी करने के साथ ही घर में राशन पानी का इंतजाम भी हो चुका था। रविवार को आग ने तांडव मचाया तो अंजू की शादी का सपना भी जलकर राख हो गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। शादी की तैयारी के लिए खरीदे गए सामान भी जल गए। आग इतनी तेज फैली कि लोग शादी के बर्तन व कपड़े तक नहीं बचा सके। एक तरफ रघुवर का घर धू-धू कर जल रहा था वहीं दूसरी ओर गांव के समीप अंजू की बहन राजकली दहाडे़ मारकर रो रही थी। बिलखते हुए कह रही थी कि अब शादी कैसे होगी।
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