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बेल्हा में हमेशा कायम रहा है गंगा जमुनी तहजीब

Sat, 09 Nov 2019 11:39 PM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 09 Nov 2019 11:39 PM IST
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belha was calm at the time of ram mandir decission
प्रतापगढ़ ने हमेशा बनाए रखा धीरज
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1992 में भी नहीं बिगड़ा माहौल, पड़ोसी जनपदों में हुई थीं हिंसा की घटनाएं
फैसले के बाद लोग एक-दूसरे के साथ बैठे, सुख-दुख की चर्चा में रहे मशगूल
प्रतापगढ़। बेल्हा में हमेशा गंगा-जमुनी तहजीब देखने को मिलती है। अयोध्या में विवादित ढांचा विध्वंस के बाद भले ही पड़ोसी जनपदों में घटनाएं हुईं, लेकिन जिले का अमन-चैन बना रहा। शनिवार को भी फैसला आने के बाद दोनों समुदायों के लोग एक साथ बैठे। सुख-दुख साझा करते नजर आए। प्रशासनिक अमला भी जिले की इस पहचान को संजोकर रखने में अपना योगदान देता रहा।
मुंबई में सीरियल बम ब्लास्ट हो या गुजरात में गोधरा कांड के बाद भड़की हिंसा। या फिर अयोध्या में 1992 में विवादित ढांचा विध्वंस। दूसरे प्रदेशों व पड़ोसी जनपदों में हिंसा की घटनाएं हुईं, लेकिन जिला अप्रिय वारदातों से अछूता रहा। ऐसे हालात में यहां के हिन्दू व मुस्लिम सहनशीलता का परिचय देते हुए एक-दूसरे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े नजर आए। हर कोई एक दूसरे के सुख-दुख में शामिल रहा। लोगों की मानें तो बवाली लोगों को उकसाने के बजाए उन्हें सबक सिखाने का भी लोग काम करते रहे। बेल्हा देवी मंदिर के पुजारी राजा पंडा का कहना है कि विपरीत परिस्थितियों में भी सांप्रदायिक सौहार्द्र बरकरार रखने के मामले में बेल्हा के लोग हमेशा आगे आए हैं। चांद तारा मस्जिद के इमाम मौलाना इश्तियाक साहब का कहना है कि जिले के लोग हर मामलों को बहुत गंभीरता से लेते हैं। लोगों में सहनशीलता है। यहां के अमनपसंद लोगों ने कभी भी दूसरों का लहू बहने नहीं दिया। जरूरत पड़ने पर हर लोग एक-दूसरे की मदद के लिए तैयार भी रहे। सरदार मंजीत सिंह ने कहा कि बेल्हा की गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल दूसरे जिलों में लोग देते हैं। इसे जीवन भर बरकरार रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। आने वाली नस्लों को भी जिले के अमन-चैन व भाईचारे को मजबूत करने के लिए काम करना होगा।
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..और फिर लौट के न आए विद्याशंकर
प्रतापगढ़। आसपुर देवसरा के पर्वतपुर सुलेमान निवासी विद्याशंकर पांडेय इलाके के सरस्वती विद्या मंदिर में शिक्षक थे। वह 1992 में कारसेवा के दौरान अयोध्या गए थे, लेकिन फिर लौटकर नहीं आए। परिवार के लोग उनकी काफी तलाश किए, लेकिन कुछ पता नहीं चला। सालों बाद भी लोग उन्हें खोजने के लिए अयोध्या जाते रहे। शनिवार को अयोध्या प्रकरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया। फैसला आने के बाद परिवार के लोग गमजदा हो गए। उनकी आंखें भर आईं। उनकी कमी पूरे परिवार को सालती रही।
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