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बिना सूचना एक हजार छात्रों का खाता बंद
Pratapgarh
Updated Mon, 27 Oct 2014 05:30 AM IST
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प्रतापगढ़। आवेदन करने के बाद भी पिछले साल करीब एक हजार छात्रों को शुल्क प्रतिपूर्ति का पैसा नहीं मिला। कारण यह रहा कि आईडी-प्रूफ न होने से बैंक ने उनका खाता बगैर सूचना बंद कर दिया। जब उन्हें जानकारी हुई तो देर हो चुकी थी। छात्र चाह कर भी खाता नहीं सुधरवा सके। ऐसे में सरकार के जरिए उनके लिए भेजा गया पैसा अफसरों ने वापस कर दिया। इस तरह पात्र होते हुए भी उन छात्रों को योजना का लाभ नहीं मिला।
वित्तीय वर्ष 2013-2014 में दशमोत्तर के छात्रों को शुल्क प्रतिपूर्ति देने के लिए आवेदन कराया गया। पात्रता की श्रेणी में आने वाल विद्यार्थियों ने आवेदन किया। आनलाइन आवेदन करने के बाद सभी खाते में पैसा आने का इंतजार करने लगे। समाज कल्याण विभाग के सूत्र कहते हैं कि आनलाइन आवेदन की सूची बनाई गई। जिसके आधार पर सरकार ने बजट फाइनल किया। छात्रों के खाते में पैसा भेजने के लिए बैंक को रकम दी गई। इसी बीच कुछ बैंकों ने केवाईसी (नो योर कस्टमर) के तहत खुले खातों में लगाए गए आईडी-प्रूफ की छानबीन शुरू कर दी। इस तरह शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए आवेदन करने वाले लगभग एक हजार छात्रों के खाते में लगी आईडी-प्रूफ में दिक्कत बताई गई। ऐसी दशा में बैंकों ने उन आवेदकों का खाता बंद कर दिया। हैरत की बात यह है कि छात्रों को खाता बंद करने की सूचना तक नहीं दी गई। उन छात्रों के बंद खाते में शुल्क प्रतिपूर्ति की रकम नहीं पहुंची। पात्रता सूची में नाम होने के कारण शासन से भेजा गया पैसा आनलाइन दिखाई दे रहा है। छात्र इस उम्मीद में शांत रहे कि पैसा आया है तो देर-सवेर खाते में भी चढ़ जाएगा। लंबी इंतजारी के बाद जब खाते में पैसा नहीं पहुंचा तो उन्होंने कारण खोजना शुरू किया। खाता बंद होने की बात सुन छात्रों के होश उड़ गए। काफी देर हो चुकी थी। इस लिए चाह कर भी वे बंद खाते को लेकर कुछ नहीं कर सके। इसके बावजूद आज भी तमाम छात्र शुल्क प्रतिपूर्ति की उम्मीद में बैठे हैं।
शुल्क प्रतिपूर्ति का इंतजार कर रहे छात्रों को अब उम्मीद छोड़ देनी चाहिए। क्योंकि खाता बंद होने के बाद जो पैसा विभाग के अकाउंट में बचा था उसे अफसरों ने वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर सरकार को वापस कर दिया है।
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जिला समाज कल्याण अधिकारी प्रवीण कुमार सिंह ने बताया कि बैंक में खाता छात्रों ने ही खुलवाया था। उन्होंने आईडी-प्रूफ लगाया या नहीं ये बात मैं नहीं जानता। हमें सिर्फ इतना पता है कि आईडी-प्रूफ के अभाव में उन छात्रों का बैंक ने खाता बंद कर दिया था। इससे पैसा उनके अकाउंट में नहीं गया। बचा हुआ सारा पैसा हमने सरकार को वापस कर दिया है।
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वित्तीय वर्ष 2013-2014 में दशमोत्तर के छात्रों को शुल्क प्रतिपूर्ति देने के लिए आवेदन कराया गया। पात्रता की श्रेणी में आने वाल विद्यार्थियों ने आवेदन किया। आनलाइन आवेदन करने के बाद सभी खाते में पैसा आने का इंतजार करने लगे। समाज कल्याण विभाग के सूत्र कहते हैं कि आनलाइन आवेदन की सूची बनाई गई। जिसके आधार पर सरकार ने बजट फाइनल किया। छात्रों के खाते में पैसा भेजने के लिए बैंक को रकम दी गई। इसी बीच कुछ बैंकों ने केवाईसी (नो योर कस्टमर) के तहत खुले खातों में लगाए गए आईडी-प्रूफ की छानबीन शुरू कर दी। इस तरह शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए आवेदन करने वाले लगभग एक हजार छात्रों के खाते में लगी आईडी-प्रूफ में दिक्कत बताई गई। ऐसी दशा में बैंकों ने उन आवेदकों का खाता बंद कर दिया। हैरत की बात यह है कि छात्रों को खाता बंद करने की सूचना तक नहीं दी गई। उन छात्रों के बंद खाते में शुल्क प्रतिपूर्ति की रकम नहीं पहुंची। पात्रता सूची में नाम होने के कारण शासन से भेजा गया पैसा आनलाइन दिखाई दे रहा है। छात्र इस उम्मीद में शांत रहे कि पैसा आया है तो देर-सवेर खाते में भी चढ़ जाएगा। लंबी इंतजारी के बाद जब खाते में पैसा नहीं पहुंचा तो उन्होंने कारण खोजना शुरू किया। खाता बंद होने की बात सुन छात्रों के होश उड़ गए। काफी देर हो चुकी थी। इस लिए चाह कर भी वे बंद खाते को लेकर कुछ नहीं कर सके। इसके बावजूद आज भी तमाम छात्र शुल्क प्रतिपूर्ति की उम्मीद में बैठे हैं।
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शुल्क प्रतिपूर्ति का इंतजार कर रहे छात्रों को अब उम्मीद छोड़ देनी चाहिए। क्योंकि खाता बंद होने के बाद जो पैसा विभाग के अकाउंट में बचा था उसे अफसरों ने वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर सरकार को वापस कर दिया है।
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जिला समाज कल्याण अधिकारी प्रवीण कुमार सिंह ने बताया कि बैंक में खाता छात्रों ने ही खुलवाया था। उन्होंने आईडी-प्रूफ लगाया या नहीं ये बात मैं नहीं जानता। हमें सिर्फ इतना पता है कि आईडी-प्रूफ के अभाव में उन छात्रों का बैंक ने खाता बंद कर दिया था। इससे पैसा उनके अकाउंट में नहीं गया। बचा हुआ सारा पैसा हमने सरकार को वापस कर दिया है।