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Pilibhit News: उत्तराखंड वन प्रभाग ने जताई सहमति, पर्यावरण मंत्रालय भेजी जाएगी रिपोर्ट
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चूका बीच में हुई बैठक में मौजूद पीटीआर और उत्तराखंड के वन अफसर। स्रोत विभाग
पीलीभीत। इको सेंसटिव जोन को लेकर पर्यावरण मंत्रालय की आपत्ति के बाद पीटीआर और उत्तराखंड के वन अफसरों की संयुक्त बैठक हुई। स्थिति से अवगत कराने से साथ अन्य बिंदुओं पर चर्चा के बाद उत्तराखंड वन प्रभाग की ओर से सहमति जताई गई। अब मामले में पर्यावरण मंत्रालय को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
पीटीआर में दो माह पूर्व इको सेंसटिव जोन को लेकर सख्ती बरतनी शुरू की गई थी। सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देकर 10 किमी दायरे में इको सेंसटिव जोन माना गया था। इस दायरे में पक्के निर्माण पर रोक लगाई थी। बाकायदा जिला प्रशासन को पत्र लिखकर सहयोग भी मांगा गया था। इसके बाद कई होम स्टे संचालकों को नोटिस भी जारी किए गए थे।
पीटीआर के इस कदम के बाद रिसॉर्ट, होटल और तमाम होम स्टे संचालकों ने डीएम से मिलकर अपना पक्ष भी रखा था। इसके बाद इको सेंसटिव जोन से संबंधित पूरा प्रस्ताव केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेजा गया है। इसमें जंगल सीमा से सटे एक किमी दायरे को इको सेंसटिव जोन में शामिल करने पर सहमति मांगी गई थी। प्रस्ताव पर पूर्व में मंत्रालय के महानिदेशक की वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान कुछ आपत्तियों लगाई थी। इसमें पीटीआर की सीमा से सटी उत्तराखंड की सुरई रेंज की सीमा होने के चलते दूसरे प्रभाग पर ही असर पड़ने की बात कहकर सहमति मांगी गई थी।
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इसको लेकर पीटीआर और उत्तराखंड वन प्रभाग के अफसरों की चूका बीच में बैठक हुई। इसमें उत्तराखंड के वन अफसरों की इको सेंसटिव जोन के बिंदुओं पर सहमति जाहिर की गई। दरअसल, सुरई रेंज का एक हिस्सा जनपद सीमा में पड़ता है। ऐसे में वन अफसरों ने सहमति जाहिर की है। अब रिपोर्ट पर्यावरण मंत्रालय को भेजने जाएगी। बैठक में डीएफओ मनीष सिंह के अलावा तराई पूर्वी वन प्रभाग हल्द्वानी के प्रभागीय वनाधिकारी हिमांशु बागरी, खटीमा की एसडीओ संचिता, पीटीआर के एसडीओ आरपी सिंह आदि मौजूद रहे।
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पीटीआर में दो माह पूर्व इको सेंसटिव जोन को लेकर सख्ती बरतनी शुरू की गई थी। सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देकर 10 किमी दायरे में इको सेंसटिव जोन माना गया था। इस दायरे में पक्के निर्माण पर रोक लगाई थी। बाकायदा जिला प्रशासन को पत्र लिखकर सहयोग भी मांगा गया था। इसके बाद कई होम स्टे संचालकों को नोटिस भी जारी किए गए थे।
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पीटीआर के इस कदम के बाद रिसॉर्ट, होटल और तमाम होम स्टे संचालकों ने डीएम से मिलकर अपना पक्ष भी रखा था। इसके बाद इको सेंसटिव जोन से संबंधित पूरा प्रस्ताव केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेजा गया है। इसमें जंगल सीमा से सटे एक किमी दायरे को इको सेंसटिव जोन में शामिल करने पर सहमति मांगी गई थी। प्रस्ताव पर पूर्व में मंत्रालय के महानिदेशक की वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान कुछ आपत्तियों लगाई थी। इसमें पीटीआर की सीमा से सटी उत्तराखंड की सुरई रेंज की सीमा होने के चलते दूसरे प्रभाग पर ही असर पड़ने की बात कहकर सहमति मांगी गई थी।
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इसको लेकर पीटीआर और उत्तराखंड वन प्रभाग के अफसरों की चूका बीच में बैठक हुई। इसमें उत्तराखंड के वन अफसरों की इको सेंसटिव जोन के बिंदुओं पर सहमति जाहिर की गई। दरअसल, सुरई रेंज का एक हिस्सा जनपद सीमा में पड़ता है। ऐसे में वन अफसरों ने सहमति जाहिर की है। अब रिपोर्ट पर्यावरण मंत्रालय को भेजने जाएगी। बैठक में डीएफओ मनीष सिंह के अलावा तराई पूर्वी वन प्रभाग हल्द्वानी के प्रभागीय वनाधिकारी हिमांशु बागरी, खटीमा की एसडीओ संचिता, पीटीआर के एसडीओ आरपी सिंह आदि मौजूद रहे।