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Pilibhit News: बेट गेमिंग प्लेटफॉर्म और इन्वेस्टमेंट प्लान के जरिये करोड़ों की ठगी करने वाले गिरोह के दो आरोपी गिरफ्तार
Mon, 21 Sep 2026 12:31 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Mon, 21 Sep 2026 12:31 AM IST
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साइबर ठगी के गिरफ्तार आरोपी।
जहानाबाद (पीलीभीत)। ऑपरेशन साइ-वज्र के तहत जहानाबाद पुलिस ने म्यूल बैंक खातों के जरिये संचालित किए जा रहे संदिग्ध साइबर फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से छह मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, 16 कूटरचित आधार कार्ड, 10 एटीएम कार्ड, सात चेकबुक और 10 बैंक पासबुक बरामद हुई हैं। जांच में देश के विभिन्न राज्यों से जुड़े करीब 200 साइबर शिकायतों का पता चला है। संबंधित खातों में उपलब्ध करीब पांच लाख रुपये की धनराशि होल्ड कराई गई है।
सीओ सदर नताशा गोयल ने बताया कि जुलाई में जहानाबाद थाने में साइबर ठगी से संबंधित रिपोर्ट दर्ज की गई थी। विवेचना के दौरान पुलिस इस पूरे नेटवर्क तक पहुंची। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान जहानाबाद के मोहल्ला विलई पसियापुर निवासी मोहसिन पुत्र अमजद और बरेली के भोजीपुरा थाना क्षेत्र के हरवंशपुर लक्ष्मनियापुर निवासी राहुल पुत्र मेघनाद के रूप में हुई है।
प्रारंभिक पूछताछ और जांच में सामने आया कि गिरोह 47 बेट गेमिंग प्लेटफॉर्म और विभिन्न इन्वेस्टमेंट प्लान के माध्यम से लोगों को निवेश कर लाभ कमाने का लालच देता था। इसके बाद साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि के लेनदेन के लिए बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता था। पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य गरीब और सीधे-सादे लोगों को सरकारी योजना के तहत खाता खुलवाने या 10 हजार रुपये तक का आर्थिक लाभ दिलाने का झांसा देते थे। उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड और सिम कार्ड समेत अन्य दस्तावेज लेकर बैंक खाते खुलवाए जाते थे। बाद में पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक और अन्य बैंकिंग साधन अपने कब्जे में लेकर इन खातों का म्यूल अकाउंट के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था।
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तीन खातों से करीब 102 करोड़ के लेनदेन का विवरण
प्रारंभिक बैंकिंग विश्लेषण में हारून के खाते से संबंधित 85 साइबर शिकायतों में करीब 42.54 करोड़ रुपये, मोहसिन के खाते से संबंधित 15 शिकायतों में करीब 32 करोड़ रुपये और राहुल के खाते से जुड़ीं 34 शिकायतों में करीब 28 करोड़ रुपये के लेनदेन का विवरण सामने आया है। इन तीनों खातों से संबंधित आंकड़ों के अनुसार, कुल करीब 102.54 करोड़ रुपये के लेनदेन का विवरण मिला है।
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दानिश की शिकायत से शुरू हुई जांच, कई स्थानीय लोग भी सामने आए
पुलिस के अनुसार, ग्राम गौनेरी दान निवासी दानिश ने 30 जुलाई 2026 को थाना जहानाबाद में तहरीर दी थी। उसने आरोप लगाया था कि करीब एक वर्ष पूर्व मोइन और मोहसिन ने लोन दिलाने के नाम पर उसके आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेज लिए थे। इसके बाद उसके नाम से बैंक खाते खुलवाकर एटीएम कार्ड और चेकबुक अपने पास रख लिए गए। बाद में उसे जानकारी हुई कि उसके खातों और पहचान संबंधी दस्तावेजों का संदिग्ध वित्तीय लेनदेन में इस्तेमाल किया जा रहा है। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना शुरू की। जांच के दौरान कई अन्य स्थानीय लोगों ने भी इसी तरह उनके नाम से खाते खुलवाकर बैंकिंग दस्तावेज ले लिए जाने की जानकारी दी। पुलिस के मुताबिक, ऐसे स्थानीय व्यक्तियों के खातों में भी 50 लाख रुपये से अधिक के साइबर फ्रॉड से संबंधित जमा और निकासी के लेनदेन सामने आए हैं।
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अन्य की तलाश में जुटीं पुलिस टीमें
सीओ सदर नताशा गोयल ने बताया कि जांच में गिरोह से जुड़े विशाल मौर्य और फरमान पुत्र अफसर खां निवासी हरवंशपुर लक्ष्मनियापुर, थाना भोजीपुरा, बरेली की भूमिका भी सामने आई है। दोनों की गिरफ्तारी के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। बरामद मोबाइल फोन और लैपटॉप में मौजूद डिजिटल डाटा का एफएसएल परीक्षण कराया जा रहा है। पुलिस अन्य बैंक खातों, म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने वालों और साइबर ठगी से जुड़े लाभार्थियों की पहचान में जुटी है। संबंधित खातों में उपलब्ध करीब पांच लाख रुपये होल्ड कराने के साथ ही वित्तीय और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। आरोपियों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है। वहीं, बाकी की तलाश के लिए तीन टीमें जुटी हुईं हैं।
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सीओ सदर नताशा गोयल ने बताया कि जुलाई में जहानाबाद थाने में साइबर ठगी से संबंधित रिपोर्ट दर्ज की गई थी। विवेचना के दौरान पुलिस इस पूरे नेटवर्क तक पहुंची। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान जहानाबाद के मोहल्ला विलई पसियापुर निवासी मोहसिन पुत्र अमजद और बरेली के भोजीपुरा थाना क्षेत्र के हरवंशपुर लक्ष्मनियापुर निवासी राहुल पुत्र मेघनाद के रूप में हुई है।
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प्रारंभिक पूछताछ और जांच में सामने आया कि गिरोह 47 बेट गेमिंग प्लेटफॉर्म और विभिन्न इन्वेस्टमेंट प्लान के माध्यम से लोगों को निवेश कर लाभ कमाने का लालच देता था। इसके बाद साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि के लेनदेन के लिए बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता था। पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य गरीब और सीधे-सादे लोगों को सरकारी योजना के तहत खाता खुलवाने या 10 हजार रुपये तक का आर्थिक लाभ दिलाने का झांसा देते थे। उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड और सिम कार्ड समेत अन्य दस्तावेज लेकर बैंक खाते खुलवाए जाते थे। बाद में पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक और अन्य बैंकिंग साधन अपने कब्जे में लेकर इन खातों का म्यूल अकाउंट के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था।
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तीन खातों से करीब 102 करोड़ के लेनदेन का विवरण
प्रारंभिक बैंकिंग विश्लेषण में हारून के खाते से संबंधित 85 साइबर शिकायतों में करीब 42.54 करोड़ रुपये, मोहसिन के खाते से संबंधित 15 शिकायतों में करीब 32 करोड़ रुपये और राहुल के खाते से जुड़ीं 34 शिकायतों में करीब 28 करोड़ रुपये के लेनदेन का विवरण सामने आया है। इन तीनों खातों से संबंधित आंकड़ों के अनुसार, कुल करीब 102.54 करोड़ रुपये के लेनदेन का विवरण मिला है।
दानिश की शिकायत से शुरू हुई जांच, कई स्थानीय लोग भी सामने आए
पुलिस के अनुसार, ग्राम गौनेरी दान निवासी दानिश ने 30 जुलाई 2026 को थाना जहानाबाद में तहरीर दी थी। उसने आरोप लगाया था कि करीब एक वर्ष पूर्व मोइन और मोहसिन ने लोन दिलाने के नाम पर उसके आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेज लिए थे। इसके बाद उसके नाम से बैंक खाते खुलवाकर एटीएम कार्ड और चेकबुक अपने पास रख लिए गए। बाद में उसे जानकारी हुई कि उसके खातों और पहचान संबंधी दस्तावेजों का संदिग्ध वित्तीय लेनदेन में इस्तेमाल किया जा रहा है। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना शुरू की। जांच के दौरान कई अन्य स्थानीय लोगों ने भी इसी तरह उनके नाम से खाते खुलवाकर बैंकिंग दस्तावेज ले लिए जाने की जानकारी दी। पुलिस के मुताबिक, ऐसे स्थानीय व्यक्तियों के खातों में भी 50 लाख रुपये से अधिक के साइबर फ्रॉड से संबंधित जमा और निकासी के लेनदेन सामने आए हैं।
अन्य की तलाश में जुटीं पुलिस टीमें
सीओ सदर नताशा गोयल ने बताया कि जांच में गिरोह से जुड़े विशाल मौर्य और फरमान पुत्र अफसर खां निवासी हरवंशपुर लक्ष्मनियापुर, थाना भोजीपुरा, बरेली की भूमिका भी सामने आई है। दोनों की गिरफ्तारी के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। बरामद मोबाइल फोन और लैपटॉप में मौजूद डिजिटल डाटा का एफएसएल परीक्षण कराया जा रहा है। पुलिस अन्य बैंक खातों, म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने वालों और साइबर ठगी से जुड़े लाभार्थियों की पहचान में जुटी है। संबंधित खातों में उपलब्ध करीब पांच लाख रुपये होल्ड कराने के साथ ही वित्तीय और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। आरोपियों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है। वहीं, बाकी की तलाश के लिए तीन टीमें जुटी हुईं हैं।