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Pilibhit News: स्लीपर बसों पर रोक के निर्देश बेअसर, रात में खूब दौड़ रहीं
Mon, 21 Sep 2026 12:43 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Mon, 21 Sep 2026 12:43 AM IST
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शहर के असम चौराहे पर फ्लाई ओवर के नीचे खड़ी स्लीपर बस। संवाद
पीलीभीत। स्लीपर बसों के संचालन पर रोक लगाने के लिए शासन स्तर से लगातार निर्देश जारी किए जा रहे हैं, लेकिन जिले में इन निर्देशों का असर दिखाई नहीं दे रहा है। रात होते ही स्लीपर बसें सड़कों पर फर्राटा भरती नजर आती हैं।
खास बात यह है कि इन बसों के संचालन को लेकर जिम्मेदार विभाग के अफसरों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई होती नहीं दिख रही है। इससे स्लीपर बसों में सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्लीपर बसों में यात्रियों को लेटकर सफर कराया जाता है। रात के समय तेज रफ्तार और लंबे रूट पर चलने वाली इन बसों में हादसा होने की स्थिति में यात्रियों के लिए सुरक्षित बाहर निकलना भी चुनौती बन सकता है। इसके बावजूद जिले के प्रमुख मार्गों पर इन बसों का संचालन जारी है। कई बसें रात के समय निर्धारित मानकों की अनदेखी करते हुए सड़कों पर दौड़ती दिखाई देती हैं। शासन स्तर से समय-समय पर परिवहन विभाग को यात्री सुरक्षा और नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए जाते हैं। अभियान चलाकर वाहनों की जांच करने के दावे भी किए जाते हैं, लेकिन स्लीपर बसों के संचालन पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पा रहा है।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि जब शासन स्तर से ऐसे वाहनों पर कार्रवाई के निर्देश हैं तो जिले में इनका संचालन कैसे जारी है, इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
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खास बात यह है कि इन बसों के संचालन को लेकर जिम्मेदार विभाग के अफसरों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई होती नहीं दिख रही है। इससे स्लीपर बसों में सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
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स्लीपर बसों में यात्रियों को लेटकर सफर कराया जाता है। रात के समय तेज रफ्तार और लंबे रूट पर चलने वाली इन बसों में हादसा होने की स्थिति में यात्रियों के लिए सुरक्षित बाहर निकलना भी चुनौती बन सकता है। इसके बावजूद जिले के प्रमुख मार्गों पर इन बसों का संचालन जारी है। कई बसें रात के समय निर्धारित मानकों की अनदेखी करते हुए सड़कों पर दौड़ती दिखाई देती हैं। शासन स्तर से समय-समय पर परिवहन विभाग को यात्री सुरक्षा और नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए जाते हैं। अभियान चलाकर वाहनों की जांच करने के दावे भी किए जाते हैं, लेकिन स्लीपर बसों के संचालन पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पा रहा है।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि जब शासन स्तर से ऐसे वाहनों पर कार्रवाई के निर्देश हैं तो जिले में इनका संचालन कैसे जारी है, इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

शहर के असम चौराहे पर फ्लाई ओवर के नीचे खड़ी स्लीपर बस। संवाद

शहर के असम चौराहे पर फ्लाई ओवर के नीचे खड़ी स्लीपर बस। संवाद