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शारदा पार जाने के लिए 30 किलोमीटर के स्थान पर 130 किलोमीटर का सफर
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पूरनपुर। बारिश से शारदा नदी के पार तक जाने वाला तीस किलोमीटर लंबा पूरनपुर खजुरिया मार्ग खराब हो गया है। इससे बसें सेवाएं बंद हैं। चार पहिया वाहन भी आ-जा नहीं सकते। मार्ग इतना खराब है कि दोपहिया वाहन और पैदल निकलने वालों को भी दिक्कत हो रही है। बसों का संचालन बंद होने से तहसील मुख्यालय से शारदापार आवागमन करने वालों अब 30 के स्थान पर 130 किलोमीटर की दूरी तय कर पड़ रही है। एक घंटे के स्थान पर इतने ही सफर में पूरा दिन लग रहा है। आम आदमी की जिंदगी मुश्किल में है।
पूरनपुर से अगर शारदा पार खजुरिया गांव जाना है तो शारदा नदी पार करनी पड़ती है। कुल तीस किलोमीटर का सफर है। इस सफर को भी तब करते हैं जब नदी पर पैंटून पुल बन जाए। साल में छह से सात महीने तक पैंटून पुल न बनने से वाहनों का आवागमन बंद रहता है। पुल हर साल बनने और उसके हटाने की तिथियां निर्धारित हैं। पिछले छह-सात सालों से शारदा नदी दो धारों में बंटने पर दोनों धारों पर पैंटून पुल बनाना पड़ता है। नदी पर पक्का पुल बनाने की मांग सालों से की जा रही है। मगर पुल न बनने से लोगों को आवागमन में भारी असुविधा होती है। हल्की सी बारिश होने पर नदी का रास्ता खराब हो जाता है और वाहन सवारों को आवागमन में भारी असुविधा होती है। रास्ता खराब होने पर अक्सर चार पहिया वाहनों का आवागमन अक्सर बंद हो जाता है। इस बार पुल से आवागमन एक जनवरी को शुरू हुआ। तब से अब तक तीन बार वाहनों का आवागमन बंद हो चुका है। बारिश से बृहस्पतिवार को रास्ता खराब होने से दोपहर से बसों और चार पहिया वाहनों का आवागमन पूरी तरह बंद हो गया। दो पहिया वाहन सवारों और पैदल आवागमन करने वालो को भी भारी असुविधा होती है। पैंटून पुल और नदी रास्ते की देखदेख का जिम्मा पीडब्ल्यूडी का है। मगर बारिश में रास्ता खराब विभागीय अफसर भी हाथ खड़ा करना शुरू कर देते है। उनका तर्क रहता है कि मौसम साफ होने और धूप निकलने पर ही रास्ता को सही किया जा सकेगा।
करीब एक लाख आबादी हो रही प्रभावित
पूरनपुर। शारदा पार इलाके में ग्राम पंचायत मुरैनिया गांधीनगर, शांतीनगर, राणा प्रतापनगर, कबीरगंज, विजयनगर, नहरोसा, श्रीनगर, कुठिया गुदिया, सिद्धनगर, भरतपुर, वमनपुर भागीरथ, रामनगर, सिंघाड़ा उर्फ टाटरगंज, बैल्हा, अशोकनगर, शास्त्रीनगर सहित सोलह ग्राम पंचायतों में करीब एक लाख की आबादी है। जो पूरन पुर तहसील की है और शारदा पार बसी है। इनका आवागमन प्रभावित है।
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ऐसे होता है 130 किलोमीटर लंबा सफर
तहसील क्षेत्र के शारदा पार पहुंचने को पैंटून पुल से आवागमन करने को लोगों को 30 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। मगर पैंटून पुल हटने से लोगों को आवागमन के लिए शाहजहांपुर के कस्बा खुटार से लखीमपुर के मैलानी, भीरा, पलिया, संपूर्णानगर होते हुए 130 किलोमीटर का सफर तय करना होता है। इस समय पुल का मार्ग खराब होने से 130 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ रहा है।
हर साल बनाया जाता है पुल
पूरनपुर। शारदा नदी पर हर साल बरसात समाप्त होने पर 15 अक्तूबर तक तैयार किए गए पुल से आवागमन शुरू कराने और बरसात में बाढ़ की आशंका पर पुल को हटाने की तिथि 15 जून निर्धारित है।
शारदा नदी से आवागमन बंद होने पर नदी पार के लोगों को तहसील और जिला मुख्यालय आवागमन को भारी असुविधा होती है। जिला मुख्यालय या तहसील मुख्यालय आवागमन को अपने पास वाहन न होने पर लोग घर से निकलकर उसी दिन घर नहीं पहुंच पाते। रास्ता खराब होने पर हाल में ग्राम पंचायत की ओर से कुछ स्थानों पर मिट्टी डलवाई गई थी। मगर बारिश में हर बार रास्ता खराब हो जाता है।
- बासुदेव कुंडू, प्रधान चंदिया हजारा
पूरनपुर से टाटरगंज रोड पर पहले करीब 25 बसों का संचालन होता था। पिछले कई सालों से मात्र कुछ महीने ही बसों का संचालन हो पा रहा है। खराब रास्ते के लिए करीब एक दशक से हर साल प्रदर्शन करना पड़ता है। रास्ता खराब होने से बस मालिकों को नुकसान होता है। पूरे साल का टैक्स बस मालिक देते है। कई सालों से दूसरे रुट पर बसों को चलाने को परमिट की मांग की जा रही है। समस्याओं को लेकर अब मात्र 17 बसें ही रुट पर रह गई। बस मालिकों का मोटरबाजी से मोह भंग होता जा रहा है।
- हाजी लियाकत हुसैन, प्रबंधक, बस यूनियन
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पूरनपुर से अगर शारदा पार खजुरिया गांव जाना है तो शारदा नदी पार करनी पड़ती है। कुल तीस किलोमीटर का सफर है। इस सफर को भी तब करते हैं जब नदी पर पैंटून पुल बन जाए। साल में छह से सात महीने तक पैंटून पुल न बनने से वाहनों का आवागमन बंद रहता है। पुल हर साल बनने और उसके हटाने की तिथियां निर्धारित हैं। पिछले छह-सात सालों से शारदा नदी दो धारों में बंटने पर दोनों धारों पर पैंटून पुल बनाना पड़ता है। नदी पर पक्का पुल बनाने की मांग सालों से की जा रही है। मगर पुल न बनने से लोगों को आवागमन में भारी असुविधा होती है। हल्की सी बारिश होने पर नदी का रास्ता खराब हो जाता है और वाहन सवारों को आवागमन में भारी असुविधा होती है। रास्ता खराब होने पर अक्सर चार पहिया वाहनों का आवागमन अक्सर बंद हो जाता है। इस बार पुल से आवागमन एक जनवरी को शुरू हुआ। तब से अब तक तीन बार वाहनों का आवागमन बंद हो चुका है। बारिश से बृहस्पतिवार को रास्ता खराब होने से दोपहर से बसों और चार पहिया वाहनों का आवागमन पूरी तरह बंद हो गया। दो पहिया वाहन सवारों और पैदल आवागमन करने वालो को भी भारी असुविधा होती है। पैंटून पुल और नदी रास्ते की देखदेख का जिम्मा पीडब्ल्यूडी का है। मगर बारिश में रास्ता खराब विभागीय अफसर भी हाथ खड़ा करना शुरू कर देते है। उनका तर्क रहता है कि मौसम साफ होने और धूप निकलने पर ही रास्ता को सही किया जा सकेगा।
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करीब एक लाख आबादी हो रही प्रभावित
पूरनपुर। शारदा पार इलाके में ग्राम पंचायत मुरैनिया गांधीनगर, शांतीनगर, राणा प्रतापनगर, कबीरगंज, विजयनगर, नहरोसा, श्रीनगर, कुठिया गुदिया, सिद्धनगर, भरतपुर, वमनपुर भागीरथ, रामनगर, सिंघाड़ा उर्फ टाटरगंज, बैल्हा, अशोकनगर, शास्त्रीनगर सहित सोलह ग्राम पंचायतों में करीब एक लाख की आबादी है। जो पूरन पुर तहसील की है और शारदा पार बसी है। इनका आवागमन प्रभावित है।
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ऐसे होता है 130 किलोमीटर लंबा सफर
तहसील क्षेत्र के शारदा पार पहुंचने को पैंटून पुल से आवागमन करने को लोगों को 30 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। मगर पैंटून पुल हटने से लोगों को आवागमन के लिए शाहजहांपुर के कस्बा खुटार से लखीमपुर के मैलानी, भीरा, पलिया, संपूर्णानगर होते हुए 130 किलोमीटर का सफर तय करना होता है। इस समय पुल का मार्ग खराब होने से 130 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ रहा है।
हर साल बनाया जाता है पुल
पूरनपुर। शारदा नदी पर हर साल बरसात समाप्त होने पर 15 अक्तूबर तक तैयार किए गए पुल से आवागमन शुरू कराने और बरसात में बाढ़ की आशंका पर पुल को हटाने की तिथि 15 जून निर्धारित है।
शारदा नदी से आवागमन बंद होने पर नदी पार के लोगों को तहसील और जिला मुख्यालय आवागमन को भारी असुविधा होती है। जिला मुख्यालय या तहसील मुख्यालय आवागमन को अपने पास वाहन न होने पर लोग घर से निकलकर उसी दिन घर नहीं पहुंच पाते। रास्ता खराब होने पर हाल में ग्राम पंचायत की ओर से कुछ स्थानों पर मिट्टी डलवाई गई थी। मगर बारिश में हर बार रास्ता खराब हो जाता है।
- बासुदेव कुंडू, प्रधान चंदिया हजारा
पूरनपुर से टाटरगंज रोड पर पहले करीब 25 बसों का संचालन होता था। पिछले कई सालों से मात्र कुछ महीने ही बसों का संचालन हो पा रहा है। खराब रास्ते के लिए करीब एक दशक से हर साल प्रदर्शन करना पड़ता है। रास्ता खराब होने से बस मालिकों को नुकसान होता है। पूरे साल का टैक्स बस मालिक देते है। कई सालों से दूसरे रुट पर बसों को चलाने को परमिट की मांग की जा रही है। समस्याओं को लेकर अब मात्र 17 बसें ही रुट पर रह गई। बस मालिकों का मोटरबाजी से मोह भंग होता जा रहा है।
- हाजी लियाकत हुसैन, प्रबंधक, बस यूनियन