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UP News: पीलीभीत में बाघ ने उत्तराखंड के युवक को मार डाला, जंगल में मिला खून से लथपथ शव

Tue, 05 Dec 2023 06:56 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत Published by: मुकेश कुमार Updated Tue, 05 Dec 2023 06:56 PM IST
सार

पीलीभीत जिले में जंगल से सटे इलाकों में बाघ का आतंक थम नहीं रहा। न्यूरिया क्षेत्र में बाघ ने हमला कर एक युवक को मार डाला। मृतक की पहचान उत्तराखंड के बग्घा 54 इलाके निवासी तारा सिंह के तौर पर हुई। 

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Tiger kills farmer of Uttarakhand in Pilibhit
बाघ के हमले में किसान की मौत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पीलीभीत के न्यूरिया क्षेत्र में गांव भरतपुर के जंगल में सोमवार शाम बाघ ने उत्तराखंड के युवक को मार डाला। रातभर उसका शव जंगल में ही पड़ा रहा। सूचना पर पहुंचे वन विभाग के अफसरों ने बाघ के हमले से इनकार किया लेकिन पोस्टमार्टम में इसकी पुष्टि हुई। बाद में वन विभाग ने मौके पर चार कैमरे लगाकर बाघ की निगरानी के लिए टीम तैनात की।

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उत्तराखंड के बग्घा 54 इलाका निवासी किसान तारा सिंह ( 33) सोमवार सुबह खरीदारी करने अपने साथी के साथ बाइक से न्यूरिया आया था। मझोला में उसने बाइक की मरम्मत कराई और शाम को भरतपुर जंगल के कच्चे रास्ते से घर के लिए रवाना हुआ। उसका साथी दिन में ही अपना काम निपटाकर गांव लौट गया था। देर रात तारा सिंह घर नहीं पहुंचा तो परिजनों ने खोजबीन की लेकिन कुछ पता नहीं चला। 
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मंगलवार सुबह जंगल के रास्ते निकलने वाले राहगीरों ने महोफ रेंज के खकरा-15 में खून से लथपथ तारा सिंह का शव देखा। सूचना पर पहुंचे उसके भाई गोविंद सिंह ने उसकी शिनाख्त की। मौके पर पहुंचे वन विभाग के अफसरों ने बाघ के हमले में तारा सिंह की मौत होने से इनकार किया। इस पर पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पोस्टमार्टम में तारा सिंह के गले पर बाघ के पंजों के निशान मिले।

नहीं मिली बाइक, कैसे जंगल तक पहुंचा तारा
परिजनों के मुताबिक तारा सिंह बाइक से ही गांव की ओर रवाना हुआ था। लेकिन, जहां उनका शव मिला, उसके आसपास उनकी बाइक नहीं मिली। पुलिस ने आसपास के क्षेत्र में बाइक की तलाश भी की लेकिन कुछ पता नहीं चला। इसी आधार पर वन विभाग के अफसरों ने संदेह जताते हुए इसे बाघ के हमले में मौत होने से इनकार किया।

शॉर्टकट के चक्कर में गई जान
तारा सिंह ने समय और ईंधन बचाने के लिए शार्टकट रास्ता चुना। वही निर्णय जानलेवा साबित हुआ। उसके गांव के लोग न्यूरिया आने जाने के लिए अक्सर भरतपुर जंगल के कच्चे रास्ते का ही इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि इस रास्ते से वे पांच किलोमीटर की दूरी तय करके न्यूरिया पहुंच जाते हैं। वहीं पक्की सड़क से उन्हें 12 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है।

प्रभागीय वनाधिकारी टाइगर रिजर्व के नवीन खंडेलवाल ने बताया कि मामला संदिग्ध है और बाघ के हमले से मौत होने की पुष्टि नहीं की जा सकती है। फिलहाल मौके पर चार कैमरों को लगा दिया गया है। टीम को भी निगरानी के लिए लगाया गया है।

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