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Pilibhit News: अंतिम संस्कार कर अपने गए भूल... अब मुक्तिधाम वाले सिराएंगे फूल

Thu, 28 Sep 2023 12:29 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत Updated Thu, 28 Sep 2023 12:29 AM IST
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Those who committed the last rites have forgotten, now the people of Muktidham will sprinkle flowers.
रखे अ​स्थि कलश दिखाता कर्मी । संवाद
पीलीभीत। मुक्तिधाम में एक साल से मिट्टी के कलश और पोटली में 160 लोगों की अस्थियां मोक्ष के लिए अपनों का इंतजार कर रही हैं, लेकिन उनके अपने अब तक विसर्जन के लिए अस्थियां लेने नहीं आए हैं। अब इन अस्थियों का विसर्जन मुक्तिधाम समिति की ओर से बदायूं के कछला गंगा घाट पर कराया जाएगा। पिछले वर्ष भी समिति ने करीब 110 अस्थि कलशों का विसर्जन कराया था।
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यूं तो ईदगाह के पास स्थित मुक्तिधाम में दाह संस्कार के बाद ही ज्यादातर परिवार अस्थियां पास में ही बह रही देवहा नदी में विसर्जित कर देते हैं, लेकिन कुछ लोग अस्थियों को अगले दिन ले जाने की बात कहकर वहीं रखवा देते हैं, लेकिन बाद में लेने नहीं आते। एक साल में ऐसे करीब 160 अस्थि कलश मुक्तिधाम में एकत्र हो गए हैंं, इन्हें अब विसर्जित किया जाना है।
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मुक्तिधाम में जो अस्थियां रखी हैं, उनके परिजनों के पते और मोबाइल नंबर का ब्योरा कमेटी के पास है। मुक्तिधाम कमेटी की ओर से सभी परिजनों से सूचना दी जा रही है कि वे अस्थियां ले जाएं। पितृ पक्ष के अंतिम दिनों तक परिजनों का रास्ता देखा जाएगा। इसके बाद समिति इन अस्थियों का विसर्जन करा देगी।
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विधि-विधान से कराया जाता विसर्जन
मुक्तिधाम के कर्मचारी भगवानदास ने बताया कि अस्थियों का विधि-विधान से विसर्जन कराया जाता है। विसर्जन से पहले सभी अस्थियों को दूध से नहलाया जाता है। उसके बाद हवन-पूजन कराया जाता और बाद में अस्थियों को गंगा में विसर्जित कर दिया जाता है। विसर्जन का काम मुक्तिधाम कमेटी करती है।
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29 सितंबर से 14 अक्तूबर तक पितृ पक्ष
पंडित नवीन चंद्र ने बताया कि 29 सितंबर पूर्णिमा से पिृत पक्ष शुरू हो जाएगा, जो 14 अक्तूबर अमावस्या तक चलेगा। इस बीच कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किया जा सकता है। पितृ पक्ष के समय अस्थियों का विसर्जन करना सबसे अच्छा माना जाता है। मान्यता है कि पितृ पक्ष पक्ष में विसर्जन करने से आत्मा को मोक्ष मिलना सुगम हो जाता है।

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वर्जन
मुक्तिधाम पर 160 अस्थि कलश रखे हैं। इन्हें पितृ पक्ष के अंतिम दिन कछला गंगा घाट पर विसर्जित किया जाएगा। विसर्जन से पहले संबंधित परिजनों को सूचना दी जा रही है, ताकि वे अपने हाथों से अपनों की अस्थियों का विसर्जन कर सकें। अगर कोई परिवार आता है तो ठीक नहीं तो समिति सभी अस्थियों का विसर्जन विधि-विधान करेंगी। - देवेश बंसल, सचिव मुक्तिधाम समिति
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