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पहले से था जमीन पर कब्जे का अंदेशा, फिर भी लापरवाह रहा प्रशासन
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गाटा संख्या को लेकर भी असमंजस की रही थी स्थिति
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चेयरमैन पति और पूर्व ब्लॉक प्रमुख के भू-माफिया घोषित होने का मामला
पीलीभीत। शहर के बीचोंबीच बाजार से सटे इलाके में डाकघर की बेशकीमती साढ़े छह सौ गज जमीन पर कब्जे के मामले में प्रशासन की भी बड़ी लापरवाही उजागर हुई थी। इस जमीन पर कब्जे की आशंका जताते हुए महीनों पहले लेखपाल ने अफसरों को रिपोर्ट दी थी। फिर भी प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए थे। एक ही जमीन के दो गाटा संख्या वाले कागजात भी पेश किए गए थे। एक में इसे डाकघर की जमीन बताया गया था, तो आरोपी पक्ष ने अपने पास मौजूद कागज में दूसरा गाटा संख्या दर्शाकर जमीन पर हक जताया था।
10 जुलाई 2019 की रात बरेली गेट के पास स्थित डाकघर की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश हुई थी। दूसरे दिन डीएम-एसपी से जब डाकघर के अधिकारियों ने शिकायत की, तब जाकर कार्रवाई की शुरुआत हुई थी। खास बात ये थी कि जमीन पर कब्जे का अंदेशा जताए जाने के बाद भी प्रशासनिक स्तर से जमीन को सुरक्षित रखने के ठोस कदम नहीं उठाए गए थे।
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लेखपाल चूरीलाल ने आठ दिसंबर 2018 को एक रिपोर्ट तैयार की थी, जिसमें बताया गया था कि डाकघर की इस जमीन का 500 वर्गमीटर हिस्सा खाली पड़ा है। इसकी बाउंड्री दो दशक पुरानी है। भवन जर्जर होने की वजह से सिटी डाकघर दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया है। जमीन पर एक व्यक्ति ने वाद भी दायर कर रखा है। रिपोर्ट में जमीन पर अवैध कब्जे की आशंका जताते हुए निगरानी की बात कही गई थी। मगर इस रिपोर्ट को नजरअंदाज कर दिया गया था।
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वहीं एक अन्य पहलू भी घटना के दौरान चर्चित रहा था। एक तरफ डाकघर के अधिकारी अपना गाटा संख्या बताकर जमीन को सरकारी बता रहे थे। वहीं आरोपी पक्ष भी इसी जमीन को दूसरा गाटा संख्या दर्शाते हुए बैनामा समेत अन्य कागजात दिखाते रहे थे। उनका कहना था कि जिस जमीन पर उन्होंने कब्जा लिया है, वह डाकघर की है ही नहीं। उसका गाटा संख्या अलग बताया था।
पुलिस ने भी किया खेल, कई को दिया अभयदान
बहुचर्चित मामले में पुलिस का खेल भी कम नहीं रहा था। घटना की रात ही तत्कालीन सीओ सिटी धर्म सिंह मार्छाल ने वहां रुककर तोड़फोड़ आदि के बारे में सवाल जवाब किए थे। उस वक्त एक इंस्पेक्टर ने उन्हें गुमराह कर लौटा दिया था। इसके बाद विवेचना में भी खेल किया जाता रहा। डाकघर की जमीन से भारी मात्रा में ईंट, लोहा आदि मलबा निकला था, जिसे ट्रैक्टर ट्रॉलियों में लादकर कबाड़ी को बेचकर लाखों रुपये कमाने की चर्चाएं रही थीं। पुलिस ने भी विवेचना के दौरान पहले तो सख्ती की बात की और बाद में सभी को अभयदान दे दिया था। एक दरोगा की कार्यशैली की उस वक्त भी एसपी से शिकायत की गई थी।
चेयरमैन पति बोले, भाजपा के एक बड़े नेता के इशारे पर फंसाया जा रहा
जहानाबाद चेयरमैन ममता गुप्ता के पति दुर्गाचरण गुप्ता उर्फ अन्ना ने खुद पर की गई कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि नाबालिग बेटे, पुत्री, पत्नी पूरे परिवार पर भाजपा के एक बड़े नेता के इशारे पर प्रशासन लगातार गलत तरीके से मुकदमे दर्ज कर रहा है। यह सब राजनीतिक बदले की भावना के तहत कराया जा रहा है। बताया कि उनके नाम पर कहीं पर भी कोई संपत्ति नहीं है। फिर मुझे भू-माफिया घोषित कैसे कर दिया गया। मेरे दो मकान हैं, वह भी ननिहाल से मिले हुए हैं। इसकी जांच कराई जानी चाहिए। संवाद
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चेयरमैन पति और पूर्व ब्लॉक प्रमुख के भू-माफिया घोषित होने का मामला पीलीभीत। शहर के बीचोंबीच बाजार से सटे इलाके में डाकघर की बेशकीमती साढ़े छह सौ गज जमीन पर कब्जे के मामले में प्रशासन की भी बड़ी लापरवाही उजागर हुई थी। इस जमीन पर कब्जे की आशंका जताते हुए महीनों पहले लेखपाल ने अफसरों को रिपोर्ट दी थी। फिर भी प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए थे। एक ही जमीन के दो गाटा संख्या वाले कागजात भी पेश किए गए थे। एक में इसे डाकघर की जमीन बताया गया था, तो आरोपी पक्ष ने अपने पास मौजूद कागज में दूसरा गाटा संख्या दर्शाकर जमीन पर हक जताया था।
10 जुलाई 2019 की रात बरेली गेट के पास स्थित डाकघर की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश हुई थी। दूसरे दिन डीएम-एसपी से जब डाकघर के अधिकारियों ने शिकायत की, तब जाकर कार्रवाई की शुरुआत हुई थी। खास बात ये थी कि जमीन पर कब्जे का अंदेशा जताए जाने के बाद भी प्रशासनिक स्तर से जमीन को सुरक्षित रखने के ठोस कदम नहीं उठाए गए थे।
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लेखपाल चूरीलाल ने आठ दिसंबर 2018 को एक रिपोर्ट तैयार की थी, जिसमें बताया गया था कि डाकघर की इस जमीन का 500 वर्गमीटर हिस्सा खाली पड़ा है। इसकी बाउंड्री दो दशक पुरानी है। भवन जर्जर होने की वजह से सिटी डाकघर दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया है। जमीन पर एक व्यक्ति ने वाद भी दायर कर रखा है। रिपोर्ट में जमीन पर अवैध कब्जे की आशंका जताते हुए निगरानी की बात कही गई थी। मगर इस रिपोर्ट को नजरअंदाज कर दिया गया था।
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वहीं एक अन्य पहलू भी घटना के दौरान चर्चित रहा था। एक तरफ डाकघर के अधिकारी अपना गाटा संख्या बताकर जमीन को सरकारी बता रहे थे। वहीं आरोपी पक्ष भी इसी जमीन को दूसरा गाटा संख्या दर्शाते हुए बैनामा समेत अन्य कागजात दिखाते रहे थे। उनका कहना था कि जिस जमीन पर उन्होंने कब्जा लिया है, वह डाकघर की है ही नहीं। उसका गाटा संख्या अलग बताया था।
पुलिस ने भी किया खेल, कई को दिया अभयदान
बहुचर्चित मामले में पुलिस का खेल भी कम नहीं रहा था। घटना की रात ही तत्कालीन सीओ सिटी धर्म सिंह मार्छाल ने वहां रुककर तोड़फोड़ आदि के बारे में सवाल जवाब किए थे। उस वक्त एक इंस्पेक्टर ने उन्हें गुमराह कर लौटा दिया था। इसके बाद विवेचना में भी खेल किया जाता रहा। डाकघर की जमीन से भारी मात्रा में ईंट, लोहा आदि मलबा निकला था, जिसे ट्रैक्टर ट्रॉलियों में लादकर कबाड़ी को बेचकर लाखों रुपये कमाने की चर्चाएं रही थीं। पुलिस ने भी विवेचना के दौरान पहले तो सख्ती की बात की और बाद में सभी को अभयदान दे दिया था। एक दरोगा की कार्यशैली की उस वक्त भी एसपी से शिकायत की गई थी।
चेयरमैन पति बोले, भाजपा के एक बड़े नेता के इशारे पर फंसाया जा रहा
जहानाबाद चेयरमैन ममता गुप्ता के पति दुर्गाचरण गुप्ता उर्फ अन्ना ने खुद पर की गई कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि नाबालिग बेटे, पुत्री, पत्नी पूरे परिवार पर भाजपा के एक बड़े नेता के इशारे पर प्रशासन लगातार गलत तरीके से मुकदमे दर्ज कर रहा है। यह सब राजनीतिक बदले की भावना के तहत कराया जा रहा है। बताया कि उनके नाम पर कहीं पर भी कोई संपत्ति नहीं है। फिर मुझे भू-माफिया घोषित कैसे कर दिया गया। मेरे दो मकान हैं, वह भी ननिहाल से मिले हुए हैं। इसकी जांच कराई जानी चाहिए। संवाद