फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   There was anticipation of occupation of land before, yet the administration remained careless

पहले से था जमीन पर कब्जे का अंदेशा, फिर भी लापरवाह रहा प्रशासन

Sun, 15 Nov 2020 11:40 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 15 Nov 2020 11:40 PM IST
विज्ञापन
There was anticipation of occupation of land before, yet the administration remained careless

गाटा संख्या को लेकर भी असमंजस की रही थी स्थिति
विज्ञापन

चेयरमैन पति और पूर्व ब्लॉक प्रमुख के भू-माफिया घोषित होने का मामला

पीलीभीत। शहर के बीचोंबीच बाजार से सटे इलाके में डाकघर की बेशकीमती साढ़े छह सौ गज जमीन पर कब्जे के मामले में प्रशासन की भी बड़ी लापरवाही उजागर हुई थी। इस जमीन पर कब्जे की आशंका जताते हुए महीनों पहले लेखपाल ने अफसरों को रिपोर्ट दी थी। फिर भी प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए थे। एक ही जमीन के दो गाटा संख्या वाले कागजात भी पेश किए गए थे। एक में इसे डाकघर की जमीन बताया गया था, तो आरोपी पक्ष ने अपने पास मौजूद कागज में दूसरा गाटा संख्या दर्शाकर जमीन पर हक जताया था।
10 जुलाई 2019 की रात बरेली गेट के पास स्थित डाकघर की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश हुई थी। दूसरे दिन डीएम-एसपी से जब डाकघर के अधिकारियों ने शिकायत की, तब जाकर कार्रवाई की शुरुआत हुई थी। खास बात ये थी कि जमीन पर कब्जे का अंदेशा जताए जाने के बाद भी प्रशासनिक स्तर से जमीन को सुरक्षित रखने के ठोस कदम नहीं उठाए गए थे।
विज्ञापन

लेखपाल चूरीलाल ने आठ दिसंबर 2018 को एक रिपोर्ट तैयार की थी, जिसमें बताया गया था कि डाकघर की इस जमीन का 500 वर्गमीटर हिस्सा खाली पड़ा है। इसकी बाउंड्री दो दशक पुरानी है। भवन जर्जर होने की वजह से सिटी डाकघर दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया है। जमीन पर एक व्यक्ति ने वाद भी दायर कर रखा है। रिपोर्ट में जमीन पर अवैध कब्जे की आशंका जताते हुए निगरानी की बात कही गई थी। मगर इस रिपोर्ट को नजरअंदाज कर दिया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

वहीं एक अन्य पहलू भी घटना के दौरान चर्चित रहा था। एक तरफ डाकघर के अधिकारी अपना गाटा संख्या बताकर जमीन को सरकारी बता रहे थे। वहीं आरोपी पक्ष भी इसी जमीन को दूसरा गाटा संख्या दर्शाते हुए बैनामा समेत अन्य कागजात दिखाते रहे थे। उनका कहना था कि जिस जमीन पर उन्होंने कब्जा लिया है, वह डाकघर की है ही नहीं। उसका गाटा संख्या अलग बताया था।
पुलिस ने भी किया खेल, कई को दिया अभयदान
बहुचर्चित मामले में पुलिस का खेल भी कम नहीं रहा था। घटना की रात ही तत्कालीन सीओ सिटी धर्म सिंह मार्छाल ने वहां रुककर तोड़फोड़ आदि के बारे में सवाल जवाब किए थे। उस वक्त एक इंस्पेक्टर ने उन्हें गुमराह कर लौटा दिया था। इसके बाद विवेचना में भी खेल किया जाता रहा। डाकघर की जमीन से भारी मात्रा में ईंट, लोहा आदि मलबा निकला था, जिसे ट्रैक्टर ट्रॉलियों में लादकर कबाड़ी को बेचकर लाखों रुपये कमाने की चर्चाएं रही थीं। पुलिस ने भी विवेचना के दौरान पहले तो सख्ती की बात की और बाद में सभी को अभयदान दे दिया था। एक दरोगा की कार्यशैली की उस वक्त भी एसपी से शिकायत की गई थी।

चेयरमैन पति बोले, भाजपा के एक बड़े नेता के इशारे पर फंसाया जा रहा
जहानाबाद चेयरमैन ममता गुप्ता के पति दुर्गाचरण गुप्ता उर्फ अन्ना ने खुद पर की गई कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि नाबालिग बेटे, पुत्री, पत्नी पूरे परिवार पर भाजपा के एक बड़े नेता के इशारे पर प्रशासन लगातार गलत तरीके से मुकदमे दर्ज कर रहा है। यह सब राजनीतिक बदले की भावना के तहत कराया जा रहा है। बताया कि उनके नाम पर कहीं पर भी कोई संपत्ति नहीं है। फिर मुझे भू-माफिया घोषित कैसे कर दिया गया। मेरे दो मकान हैं, वह भी ननिहाल से मिले हुए हैं। इसकी जांच कराई जानी चाहिए। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed