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Pilibhit News: जंगल से बाहर निकले बाघ ने छुट्टा पशु को मारा
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कलीनगर। पीलीभीत टाइगर रिजर्व की बराही रेंज से सटे इलाके में बाघों की दहशत लगातार जारी है। जंगल से निकले बाघ ने छुट्टा पशु पर हमला कर मार दिया। घटना की जानकारी के बाद ग्रामीणों में दहशत फैल गई। सूचना के बाद वनकर्मियों ने क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी है।
कलीनगर तहसील क्षेत्र के अंतर्गत पुरैना ताल्लुके महाराजपुर गांव की सीमा बराही रेंज के जंगल से सटी है। रविवार रात एक बाघ जंगल से निकलकर बाहर आ गया और आबादी से सटे इलाके में खेतों में घूम रहे छुट्टा पशु को हमलाकर मार दिया।
सोमवार सुबह ग्रामीण सोनी के परिजन घर से बाहर निकले तो मृत पशु को पड़ा देखा। पास में ही बाघ के पैरों के निशान बने थे। जिससे क्षेत्र में दहशत फैल गई। ग्रामीण मौके पर जमा हो गए। सूचना के बाद क्षेत्रीय वनकर्मी भी मौके पर पहुंच गए। क्षेत्रीय वन दरोगा मोहम्मद आरिफ ने बताया कि जंगल से सटे इलाके में घटना हुई। क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है।
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ढकिया और नगरिया गांव में बाघ की दहशत बरकरार
तहसील क्षेत्र के नगरिया और ढकिया गांव की सीमा में सात दिन तक डेरा जमाय रहने वाला बाघ भले ही शारदा नदी के पार निकल गया, लेकिन ग्रामीणों में उसकी दहशत अब भी बरकरार है। ग्रामीणों का कहना है कि बाघ को लौटने का रास्ता नहीं मिला, इसलिए वह नदी के पार निकल गया। ऐसे में उसके लौटने का अंदेशा बना हुआ है। विभाग भी इसको लेकर सतर्कता बरते हुए हैं। क्षेत्र में लगाए गए पिंजरे को अभी वहां से नहीं हटाया गया है। संवाद
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कलीनगर तहसील क्षेत्र के अंतर्गत पुरैना ताल्लुके महाराजपुर गांव की सीमा बराही रेंज के जंगल से सटी है। रविवार रात एक बाघ जंगल से निकलकर बाहर आ गया और आबादी से सटे इलाके में खेतों में घूम रहे छुट्टा पशु को हमलाकर मार दिया।
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सोमवार सुबह ग्रामीण सोनी के परिजन घर से बाहर निकले तो मृत पशु को पड़ा देखा। पास में ही बाघ के पैरों के निशान बने थे। जिससे क्षेत्र में दहशत फैल गई। ग्रामीण मौके पर जमा हो गए। सूचना के बाद क्षेत्रीय वनकर्मी भी मौके पर पहुंच गए। क्षेत्रीय वन दरोगा मोहम्मद आरिफ ने बताया कि जंगल से सटे इलाके में घटना हुई। क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है।
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ढकिया और नगरिया गांव में बाघ की दहशत बरकरार
तहसील क्षेत्र के नगरिया और ढकिया गांव की सीमा में सात दिन तक डेरा जमाय रहने वाला बाघ भले ही शारदा नदी के पार निकल गया, लेकिन ग्रामीणों में उसकी दहशत अब भी बरकरार है। ग्रामीणों का कहना है कि बाघ को लौटने का रास्ता नहीं मिला, इसलिए वह नदी के पार निकल गया। ऐसे में उसके लौटने का अंदेशा बना हुआ है। विभाग भी इसको लेकर सतर्कता बरते हुए हैं। क्षेत्र में लगाए गए पिंजरे को अभी वहां से नहीं हटाया गया है। संवाद