{"_id":"68c7079bfa489e27cf051048","slug":"the-bully-of-the-jungle-honey-badger-small-in-size-even-tigers-and-leopards-remain-alert-pilibhit-news-c-121-1-lkh1003-143872-2025-09-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"जंगल का दबंग: हनी बेजर...छोटा कद, बाघ और तेंदुए भी रहते सतर्क","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जंगल का दबंग: हनी बेजर...छोटा कद, बाघ और तेंदुए भी रहते सतर्क
Sun, 14 Sep 2025 11:51 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Sun, 14 Sep 2025 11:51 PM IST
विज्ञापन
फखरूल इस्लाम
पीलीभीत। जंगल की दुनिया में हर जीव का अपना डर और दबदबा होता है। मगर कुछ वन्यजीव ऐसे भी होते हैं, जो अपने छोटे कद के बावजूद पूरे जंगल में अपनी बहादुरी और लड़ाकूपन के लिए बदनाम हैं। इन्हीं में से एक है हनी बेजर...। पीलीभीत टाइगर रिजर्व में इस दुर्लभ और आक्रामक वन्यजीव की मौजूदगी दर्ज की गई है। विशेषज्ञ कहते हैं कि हनी बेजर का नाम सुनते ही बाघ, तेंदुए और लकड़बग्घे जैसे बड़े शिकारी भी दो बार सोचते हैं।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व मेंं वैसे तो बाघ के अलावा अन्य वन्यजीवों की निराली दुनिया है। जंगल का बेहतर वातावरण वन्यजीवों के कुनबे को भी लगातार बढ़ा रहा है। इनमें कई वन्यजीवों के दुर्लभ होने के साथ खासियत भी अलग है। इसमें हनी बेजर भी शामिल है। हनी बेजर की पीटीआर के जंगल में मौजूदगी दर्ज की गई है। इसकी खासियत सभी को एक बार सोचने पर मजबूर कर देती है।
-- -
इस लिए खास है हनी बेजर
बिज्जू जैसा दिखने वाला यह वन्यजीव ढाई फीट लंबा होता है। सर्वाहारी होते हुए भी इसे शहद से खास लगाव है और इसी वजह से इसका नाम पड़ा ‘हनी बेजर’। लेकिन इसका असली परिचय इसकी लड़ाकू प्रवृत्ति है। खतरे का आभास होते ही यह जहरीले सांप, अजगर और यहां तक कि बाघ-तेंदुए पर भी हमला करने से नहीं हिचकिचाता। टरक्वाइज वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन सोसायटी के अध्यक्ष मोहम्मद अख्तर मियां बताते हैं कि हनी बेजर को जंगल का सबसे निडर खिलाड़ी कहा जाता है। इसके नुकीले पंजे और तेज दांत बड़े से बड़े शिकारी को भी पीछे हटने पर मजबूर कर देते हैं।
विज्ञापन
-- --
जैवविविधता की बड़ी पहचान
पीलीभीत टाइगर रिजर्व बीते एक दशक में जैवविविधता के लिहाज से देश के प्रमुख संरक्षित क्षेत्रों में गिना जाने लगा है। यहां बाघों की बढ़ती संख्या के साथ-साथ दुर्लभ जीव-जंतु भी लौटकर आ रहे हैं। रेड कोरल कुकरी स्नैक, रस्टी स्पॉटेड कैट और हार्नबिल की तरह अब हनी बेजर की मौजूदगी भी इस रिजर्व की समृद्ध पारिस्थितिकी का सबूत है।
-- --
बरसात से दूरी, शुष्क इलाकों से लगाव
हनी बेजर को ज्यादा बरसात पसंद नहीं। यह अपेक्षाकृत शुष्क इलाकों में रहना पसंद करता है और अक्सर भालुओं के इलाके के आसपास नजर आता है।
-- -
छोटा लेकिन बहुत तेज
नेपाल बॉर्डर से सटे घने जंगलों में बाघों और तेंदुओं की मौजूदगी पहले से ही है। ऐसे में हनी बेजर जैसे आक्रामक जीव की मौजूदगी ने वन्यजीव विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है। क्योंकि यह छोटा-सा मगर निडर जीव जंगल की पारिस्थितिकी में ‘जंगल के दबंग’ की भूमिका निभाता है।
विज्ञापन
पीलीभीत। जंगल की दुनिया में हर जीव का अपना डर और दबदबा होता है। मगर कुछ वन्यजीव ऐसे भी होते हैं, जो अपने छोटे कद के बावजूद पूरे जंगल में अपनी बहादुरी और लड़ाकूपन के लिए बदनाम हैं। इन्हीं में से एक है हनी बेजर...। पीलीभीत टाइगर रिजर्व में इस दुर्लभ और आक्रामक वन्यजीव की मौजूदगी दर्ज की गई है। विशेषज्ञ कहते हैं कि हनी बेजर का नाम सुनते ही बाघ, तेंदुए और लकड़बग्घे जैसे बड़े शिकारी भी दो बार सोचते हैं।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व मेंं वैसे तो बाघ के अलावा अन्य वन्यजीवों की निराली दुनिया है। जंगल का बेहतर वातावरण वन्यजीवों के कुनबे को भी लगातार बढ़ा रहा है। इनमें कई वन्यजीवों के दुर्लभ होने के साथ खासियत भी अलग है। इसमें हनी बेजर भी शामिल है। हनी बेजर की पीटीआर के जंगल में मौजूदगी दर्ज की गई है। इसकी खासियत सभी को एक बार सोचने पर मजबूर कर देती है।
विज्ञापन
इस लिए खास है हनी बेजर
बिज्जू जैसा दिखने वाला यह वन्यजीव ढाई फीट लंबा होता है। सर्वाहारी होते हुए भी इसे शहद से खास लगाव है और इसी वजह से इसका नाम पड़ा ‘हनी बेजर’। लेकिन इसका असली परिचय इसकी लड़ाकू प्रवृत्ति है। खतरे का आभास होते ही यह जहरीले सांप, अजगर और यहां तक कि बाघ-तेंदुए पर भी हमला करने से नहीं हिचकिचाता। टरक्वाइज वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन सोसायटी के अध्यक्ष मोहम्मद अख्तर मियां बताते हैं कि हनी बेजर को जंगल का सबसे निडर खिलाड़ी कहा जाता है। इसके नुकीले पंजे और तेज दांत बड़े से बड़े शिकारी को भी पीछे हटने पर मजबूर कर देते हैं।
विज्ञापन
जैवविविधता की बड़ी पहचान
पीलीभीत टाइगर रिजर्व बीते एक दशक में जैवविविधता के लिहाज से देश के प्रमुख संरक्षित क्षेत्रों में गिना जाने लगा है। यहां बाघों की बढ़ती संख्या के साथ-साथ दुर्लभ जीव-जंतु भी लौटकर आ रहे हैं। रेड कोरल कुकरी स्नैक, रस्टी स्पॉटेड कैट और हार्नबिल की तरह अब हनी बेजर की मौजूदगी भी इस रिजर्व की समृद्ध पारिस्थितिकी का सबूत है।
बरसात से दूरी, शुष्क इलाकों से लगाव
हनी बेजर को ज्यादा बरसात पसंद नहीं। यह अपेक्षाकृत शुष्क इलाकों में रहना पसंद करता है और अक्सर भालुओं के इलाके के आसपास नजर आता है।
छोटा लेकिन बहुत तेज
नेपाल बॉर्डर से सटे घने जंगलों में बाघों और तेंदुओं की मौजूदगी पहले से ही है। ऐसे में हनी बेजर जैसे आक्रामक जीव की मौजूदगी ने वन्यजीव विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है। क्योंकि यह छोटा-सा मगर निडर जीव जंगल की पारिस्थितिकी में ‘जंगल के दबंग’ की भूमिका निभाता है।